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कर्णप्रयाग Guide

कर्णप्रयाग, उत्तराखंड का एक प्रमुख ऐतिहासिक नगर है। उत्तराखंड के महत्त्वाकांक्षी और महत्वपूर्ण All Weather Road का एक प्रमुख पढ़ाव भी है। जानिए कर्णप्रयाग के इतिहास, आकर्षण, कैसे यहाँ पहुचें आदि के साथ ढेरों जानकारियाँ…

गैरसैंण – उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी

गैरसैण को ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में मान्यता मिलना, उत्तराखंड के अपेक्षाकृत कम विकसित – पर्वतीय भूभाग के विकास के लिए अच्छी शुरुआत हो सकती हैं। आइये देखें कैसा हैं – गैरसैण।

ग्वालदम बधानगढ़ी Trek

इस विडियो टूर मे हैं – उत्तराखंड के एक छोटे से हिल स्टेशन ग्वालदम से बधानगढ़ी मंदिर का ट्रेक, जानेंगे यहाँ कैसे जाते हैं, स्वागत हैं आपका पॉप्कॉर्न ट्रिप मे।

Laung Prabang, Laos trip – video

अगर आपको लगता हैं, अपने देश की मुद्रा ज्यादातर देशों से कमजोर है, चाहते हैं,सस्ती जमीन खरीदना, तो जानिये इस देश को, यहाँ, सिर्फ ₹10,000 यहाँ की मुद्रा millionaire बना देंगी। साथ ही सिर्फ ₹ 50,000 में यहाँ भारतीय भी 1 बीघा जमीन खरीद सकते हैं। यहाँ भगवान बुद्ध के कई मंदिर हैं। जानिये इस दिलचप्स देश के बारें में।

देवरिया ताल ट्रेक

उखीमठ – चोपता मार्ग में उखीमठ से लगभग 4 किलोमीटर, और चोपता से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तिराहा, और इस तिराहे से 4 किलोमीटर दूर  हैं – सारी विलेज।

छोलिया – उत्तराखंड का लोकप्रिय नृत्य

छोलिया (या छलिया) उत्तराखंड के कुमायूँ क्षेत्र में प्रचलित एक प्रसिद्ध नृत्य शैली है। यह मूल रूप से एक विवाह  के समय जाना वाला तलवार नृत्य है, जिसे कई अन्य कई शुभ अवसरों पर भी किया जाता है।

नानकमत्ता गुरुद्वारा

ये है नानकमत्ता, आज से लगभग 500 वर्ष पूर्व सन 1514 ईस्वी यहाँ गुरुनानक देव आए थे। आज हम Explore करेंगे इसी स्थान को। जानेंगे यहा आप कैसे आ सकते हैं, यहाँ का इतिहास, यहाँ का महत्व, यहाँ कौन से जगह में क्या स्थित है, कहाँ आप भोजन कर सकते हैं, कहाँ रात्री विश्राम कर सकते हैं।

बागेश्वर – कुमाऊं – उत्तराखंड की तीर्थ नगरी

भगवान शिव के एक रूप – बागनाथ जी का स्थान  – बागेश्वर – उत्तराखंड राज्य के कुमाऊँ की धार्मिक नगरी और तीर्थस्थल के रूप में सुप्रसिद्ध हैं। बागेश्वर भ्रमण के साथ भगवान श्री बागनाथ जी के दर्शन करें – इस वीडियो टूर द्वारा।

मक्कू मठ – भगवान तुंगनाथ का शीतकालीन प्रवास

भगवान तुंगनाथ जी की डोली – शीतकाल में तुंगनाथ के कपाट बंद होने के बाद मक्कु में लायी जाती है। और यहाँ के प्रसिद्ध मक्कुमठ में स्थापित की जाती है।