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शिमला से चंडीगढ़ टैक्सी रु 1200/ में

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Shimla to Chandigarh Taxi

अपनी पिछली यात्रा में शिमला से चंडीगढ़ लौटने के लिए बस अथवा टैक्सी से लौटने का ऑप्शन था। कुछ वजहों से हमारे पास सामान अधिक था, तो बस से यात्रा करना असुविधाजनक था, इसलिए टैक्सी हायर की। इस 110 किलोमीटर की दूरी के लिए टैक्सी रु 2500 से रु0 4000 में मिल रही थी।

तब हमने सर्च किया bla bla वेबसाईट/ एप में, जिस समय हमें लौटना था उसके आस-पास हमें, एक कार मिल रही थी। जिसमे प्रति सीट का किराया रु0 300/ दिख रहा था, हमने सभी चार सीटस बुक कर ली, जिससे यात्रा सुविधाजनक हो पाए।

जिनको जानकारी नहीं है इस वेबसाईट की – उनके लिए – bla bla एक कार pooling एप/ वेबसाईट है, इसमे कोई individual या टैक्सी चालक कहीं जा रहे हो, तो अपनी यात्रा की लागत कम करने के लिए, एप मे अपनी जर्नी लिस्ट कर देते है। और उसी दिशा मे किसी और को भी जाना हो तो कार ड्राइवर के द्वारा लिस्ट किया हुआ मूल्य अप्रूव कर बुक करवा सकते हैं, (ध्यान रखें advance मे कुछ भी पेमेंट न दें, अपनी यात्रा पूरी होने के बाद ही भुगतान करें)

कार/ टैक्सी किसी अन्य सवारी के साथ शेयर न करना चाहे तो – उपलब्धता के अनुसार सभी seats बुक कर आराम से अपनी मंजिल पर पँहुच सकते है। जो कि सामान्य टैक्सी बुक कराने की तुलना मे बहुत कम होता है।

सब चीज परफेक्ट और फूलप्रूफ तो होती नहीं, bla bla मे लिस्टेड कार हमेशा आपको तय कार्यक्रम के अनुसार उपलब्ध हो जाएगी, ऐसा भी नहीं है।

हम इस एप के माध्यम से बुकिंग कराने के बाद बताए गए पिक अप पॉइंट पर पँहुचे, और कुछ देर बाद सफेद रंग की स्विफ्ट Dzire कार पहुची, जो एक टैक्सी थी, किसी सवारी को लेकर चंडीगढ़ से शिमला ड्रॉप करने आई थी, और अब उसे वापस लौटना था, चुकि – टैक्सी ड्राइवर दोनों ओर का किराया, बुकिंग कराने वाले से पहले ही वसूल लेते है, तो उसके लिए वापसी मे लौटते हुए कम कीमत मे सवारी बैठा कर अतिरिक्त लाभ कमाने का मौका होता है।

टैक्सी के अलावा कई निजी वाहन स्वामी भी इस एप मे अपने वाहन के route को डेट और टाइम के साथ लिस्ट कर लेते है, जिससे उन्हे यात्रा मे हमसफर भी मिल जाते है, और यात्रा का व्यय भी कम हो जाता है।

हम टैक्सी मे बैठे कुछ ही मिनट हुए थे, तभी ड्राइवर का मोबाइल बजा – बातचीत से मालूम हुआ कि किसी और ने भी हमारी तरह इस एप के माध्यम से इसी टैक्सी मे अपनी बुकिंग कराई थी, ड्राइवर ने काल पर बहाना बनाते हुए दूसरे यात्री को कहाँ कि “वह रास्ते मे कहीं जाम पर फंसा है और समय पर नहीं पहुच पाएगा” हमें बुकिंग कराने वाले दूसरे यात्री के लिए बुरा लगा कि – उसे टैक्सी नहीं मिल पायी।

लेकिन ड्राइवर को इस सब से कोई सरोकार नहीं था, उसने अपनी ओर से सफाई देते बताया कि कई बार लोग बुकिंग कराने के बाद तय जगह पर तय समय पर नहीं पहुचते, तो वह दो मोबाईल से लिस्टिंग कर, दो अलग -2 बुकिंग ले लेता है। और जो पहले मिल जाए या जिससे अच्छी डील मिल जाए उसे अपने साथ ले जाता है, और और दूसरी बुकिंग को ऐसे ही छोड़ देता है।

इस तरह आप जब भी इस एप के माध्यम से बुकिंग कराएं, ड्राइवर से तय करवा लें कि वो लेने ही आएगा। और अगर फिर भी अंतिम समय मे न आए तो, किसी अन्य माध्यम से भी यात्रा के लिए भी तैयार रहें। #popcorntrip

एक समय था सैर सपाटा अमीरों के लिए ही था।

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travelling for all

एक समय था सैर सपाटा अमीरों के ही शौक थे, और यह विलासिता मे आता था। बाकींलोग तो साल – दो साल मे अपने रिश्तेदारी में चले जाए तो वहीं घूमना माना जाता था। फिर महीनों तक उस घूमने के मित्रों – मोहल्ले मे चर्चे होते।

अभी बहुत समय नहीं बीता इस बात को। फिर लोगों की औसत आय बढ़ने के साथ – दूर दराज के स्थानों और दुनिया के प्रति जानकारी और वहाँ पहुँचने का आकर्षण भी बढ़ने लगा।

यात्राओं मे स्टिल केमेरे की भी भूमिका बड़ी, कहीं जाओं तो तस्वीरें भी खीच लो, कोडेक, फूजी जैसे कमेरे मे रील डालो और अपनी यात्राओं को छवियों के साथ अमर कर लो। तब लोग फुरसत से निकलते और एक या दो डेस्टिनेशन को देख कुछ दिन किसी होटल मे रूम लेकर रहते है लौट आते।

फिर डिजिटल केमेरे आए – लोग खुश थे – अब अच्छी क्वालिटी (तथाकथित) मिलने के साथ रील पर होने वाले पैसे बचेंगे, हालांकि – डिजिटल केमेरे कई गुना महेंगे थे। खैर आरंभिक/ एकमुश्त होने वाले खर्चे से अधिक मानव मनोविज्ञान को आपरैशनल/ रनिंग कोस्ट अखरती है। फिर वो कोई वाहन हो या डिवाइस। फिर मोबाईल मे भी केमेरे आने लगे।

फिर इंटरनेट के आने के बाद अन्य कई सेक्टर की तरह घूमने फिरने मे भी क्रांति हुई, तब मोबाईल सिर्फ बात करने, संदेश भेजने, टाइम देखने आदि का माध्यम ही नहीं रहा, बल्कि इंटरनेट उपयोग का भी एक अच्छा टूल बन गया।

साधारण मोबाईल के स्मार्टफोन बनने के बाद – जहां एक ओर सोशल मीडिया ने प्रवेश किया दूसरी ओर होटल/ पैकेज बुकिंग की तमाम साइट्स आने लगी – जिहोने सस्ते होटेल्स लिस्ट करने शुरू कर दिए, टैक्सी बुकिंग एप आने लगी और सोशल मीडिया पर लोगों ने अपने यात्रा की तस्वीरें अपलोड करनी शुरू कर दिए। जो दूसरे लोगों को भी घूमने के लिए प्रेरित करने करने लगी।

फिर अब आया video का दौर – तमाम साइट्स मे रील बनाना, ज्यादा से ज्यादा स्थानों को कवर करके -Vlog बनाना, अपलोड करना।

घूमने के तरीके और उद्देश्य मे भी परिवर्तन हो गया है – जो कुछ समय पहले फुरसत के समय का आनंद लेना होता था। अब घूमने के समय ज्यादातर लोगों को अपने लिए भी फुरसत नहीं होती, घूमा इसलिए जा रहा है कि – हमने कितनी ज्यादा से ज्यादा जगह कितने कम से कम समय मे देख ली, डेस्टिनेशन में बिताने से ज्यादा समय सड़कों से गुजरने में बीत रहा है।

हाँ अभी भी कई लोग है – जिन्हे घूमते हुए न अपनी सेल्फ़ी लेने की परवाह होती, न सोशल मीडिया पर अपनी यात्राओं की तस्वीर डालने की ख्वाहिश होती, किसी डेस्टिनेशन मे जाकर वहां की फिज़ाओं को महसूस करते हैं, जहां होते है बस वहीं रहते है – और बाकि सब भूल जाते हैं। #popcorntrip

AirBnB से Home-Stay बुकिंग में रखें सावधानियाँ !

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AirBnB Booking Experience

पिछली यात्रा में, विभिन्न स्थानों में ठहरने के लिए ज़्यादातर एयर बीएनबी द्वारा बुक करायी।

इसके पीछे ख्याल यह था कि – एक तो वो होटल जैसे औपचारिक नहीं होंगे, दूसरा अपने घरों के साथ मिलने वाले किचन में अपने मानकों के आधार पर खुद ही बनाकर हाईजीन भोजन लिया जाये।

कुछ जगहों पर अपेक्षित घर मिले – जहां रूम के साथ attached किचन भी था, और भोजन बनाने के लिए गॅस स्टोव और बर्तन भी, हालांकि हम खाना बनाने के लिए/ खाना सर्व करने के अपने बर्तन स्वयं ही साथ ले गए थे, जिससे कुछ अतिरिक्त वजन साथ ले जाना पड़ा, लेकिन यह सब इसलिए कि यात्राओं के दौरान लगातार अनियमित और अनियंत्रित खानपान से सेहत पर बुरा असर पड़ता है।

कुछ ऐसे भी प्रोपेर्टिस मिली – जो असल मे होटेल थे, और होम की तरह उपरोक्त एप मे लिस्टेड थे, उनसे चेक इन के बाद उनसे किचन के बारें मे पूछा – उन्होंने बताया हाँ हमारी अपनी किचन है – आप मेनू से ऑर्डर कर लो, खाना वहीं से आएगा।

एक प्रॉपर्टी ऐसी थी – जो किसी अपार्टमेंट बिल्डिंग का फ्लोर थी – पहले बिल्डर ने इस अपार्टमेंट को बेचने का सोचा था, लेकिन बिक नहीं पाया तो, उन्होने एप पर लिस्ट करके ऐसे रूम किराए पर देने शुरू कर दिये। 3 BHK के तीनों कमरे तीन अलग अलग अतिथियों को देकर एक कॉमन किचन दे दिया – जहां कुकिंग के लिए आपको अपनी बारी का इंतजार करना होता, और कहीं कोई पहले वाले का तैयार किया नॉन – वेज बिखरा हो, फिर शुद्ध शाकाहारी परिवार क्या करे!

कुछ लोगों ने दूसरों घरों को किराए पर कमरे लेकर ऐसे रेंट आउट करना शुरू दिया हैं, अब क्योकि ऐसी जगह ओनर की जगह केयर टेकर द्वारा managed होती है तो फिर सफाई और स्वच्छता, बस रेलवे स्टेशन के निकट सस्ते होटेल्स के कमरों सी थी। धूल और सीलन की गंध के बीच मकड़ी के जाले/ cockroaches के झुंड उत्सव मनाते दिखे।

कुछ स्थान अच्छे तो थे लेकिन उस स्थान से बहुत दूर, जहां आपने जाना था। कुछ अधूरी अथवा गलत जानकारी के साथ लिस्टेड थी।

कुल मिलकर आप जब भी इस एप से बूकिंग कराएं तो यह मान कर न बैठे कि – जो आप बूक करा रहें वह कोई घर या घर का एक हिस्सा ही होगा। बुकिंग से पूर्व होस्ट से सवाल पूछ कर अपने confusion दूर किए जा सकते है।

कई ऐसी प्रॉपर्टीस, जो हमारे मानकों में ठीक नहीं थी, किसी और के नजरिए से ठीक हो सकती है – क्योकि हमारे हिसाब से जिस प्रोपेर्टी की रेटिंग 2 स्टार से भी कम होनी चाहिए थी, उनकी औसत रेटिंग 4.5 स्टार से ज्यादा थी, हाँ कुछ प्रॉपर्टीस जो नयी लिस्टेड थी और जिनकी कोई रेटिंग नहीं थी – बहुत अच्छी भी थी।

यात्राओं के दौरान ठहरने के लिए सहीं स्थान प्राप्त करना भी एक कला है।

#PopcornTrip

चित्रकूट यात्रा गाइड

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chitrakoot

चित्रकूट में प्रभु श्री राम अपने वनवास अवधि के साढ़े ग्यारह वर्ष, देवी सीता और अनुज लक्ष्मण के साथ बिताये थे। चित्रकूट पौराणिक महत्व रखने के साथ साथ ऐतिहासिक, धार्मिक, भौगोलिक और वन्य जीव sanctuary होने की वजह से भी जाना जाता है।

चित्रकूट में स्थित प्रभु श्री राम की स्मृतियाँ सहेजे विभिन्न स्थलों के साथ ही जानेंगे यहाँ कैसे पहुंचे, कहाँ रुकें, कब आयें सहित अनेकों महत्वपूर्ण एवं रोचक जानकारियां।

चित्रकूट के प्रमुख आकर्षण में से एक है यहाँ बहती मंदाकिनी नदी, जिसे पयस्विनी नदी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इसी नदी के तट पर भगवान श्री राम ने अपने पिता महाराजा दशरथ को तिलांजलि दी थी। इसी नदी के तट पर कई घाट हैं, जिनमें से कुछ हैं रामघाट, कैलाश घाट, जानकी घाट, राघव घाट आदि। घाटों के तट पर विभिन्न देवी देवताओं, ऋषियों को समर्पित कई मंदिर भी स्थित हैं।

वर्तमान में यहाँ रामघाट में प्रतिदिन होने वाली सायंकालीन आरती, तीर्थयात्रियों के चित्रकूट आगमन के अनुभव को अविस्मरणीय बनाता है। इस समय मन्दाकिनी नदी पर चलती रौशनी जगमगाती रंगों से भरी नावें आकर्षक लगती है।

स्वामी मत्यगजेंद्रनाथ अथवा स्वामी मत्यगयेंद्रनाथ रामघाट में स्थित एक प्रमुख मंदिर है – मान्यता है – कि भगवान ब्रह्माजी ने इसी स्थान पर यज्ञ किया था। यज्ञ के प्रभाव से निकले शिवलिंग को स्वामी मत्यगजेंद्र नाथ जी के नाम से जाना जाता है। प्रभु श्री राम यहां पर वनवास काल में आए तो उन्होंने चित्रकूट निवास के लिए स्वामी मत्यगजेंद्रनाथ से आज्ञा ली थी।

सावन के माह और महाशिवरात्रि में यहाँ बड़ी संख्या में श्रदालु में शिवलिंग पर जलाभिषेक करते है. स्वामी मत्यागयेन्द्र नाथ जी के दर्शन से शोक, भय और अवसाद से मुक्ति मिलती है।संध्या आरती के बाद – उत्तर प्रदेश पर्यटन द्वारा द्वारा मन्दाकिनी नदी पर लेज़र शो और 30 मिनट की भगवान राम पर आधारित एक फिल्म दिखाई जाती है। जो यहाँ पँहुचे तीर्थयात्रियों के अनुभव को और भी सुंदर बनाती है।

इसके बाद पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित होने वाला फाउंटेन शो बेहद आकर्षक लगता है। Light and Sound तकनीक द्वारा मन्दाकिनी नदी में लेजर शो द्वारा प्रभु श्री राम के जीवन पर आधारित एक लघु फिल्म यहाँ आने वाले लोगों को आनंदित करती है।

चित्रकूट की भूमि में, पग – पग पर प्रभु राम के चरणों ने स्पर्श किया होगा, यह विचार ही श्रदालुओं, के हृदय में असीम आनंद, पवित्रता और उमंग भर देता है।

उत्तर प्रदेश – जहाँ देवता मानव रूप में अवतार लेते है। प्रभु श्री राम और श्री कृष्ण ने यहाँ की पावन भूमि में जन्म लिया और इस भूमि को उनकी लीलाएं देखने का भी सौभाग्य मिला।

भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के 75 जिलों मे से एक है – चित्रकूट, इस जनपद के पडोसी जिले है – उत्तर प्रदेश के बाँदा, फतेहपुर, कौशाम्बी, प्रयागराज और मध्य प्रदश में सतना।

चित्रकूट पहले बाँदा जिले का ही भाग था. जो 6 मई 1997 अलग जिले के रूप में अस्तित्व में आया, शुरू में जिले का नाम छत्रपति शाहू जी महाराज नगर रखा गया था, और लगभग 16 माह बाद, 4 सितंबर 1998 जिले का नाम शाहू जी महाराज नगर से बदलकर चित्रकूट कर दिया गया।

चित्रकूट मे चार तहसीलें है, जिनके नाम हैं – कर्वी, मऊ, मानिकपुर और राजापुर

चित्रकूट धाम का कुछ एरिया चित्रकूट जिले के बाहर मध्य प्रदेश मे भी है – यह मुख्यतः 5 गाँव या कस्बों का समूह है, जिनमे उत्तर प्रदेश में चित्रकूट जिले के कर्वी तहसील दो कस्बे सीतापुर और कर्वी तथा मध्य प्रदेश में सतना जिले के तीन कस्बे कामता, कोहली और नयागाँव शामिल है।

6 मई 1997 को हुआ, बाँदा जनपद से एक हिस्से को अलग कर अलग जनपद बना जिसका नाम आरम्भ में छत्रपति शाहू जी महाराज नगर रखा, और 4 सितंबर 1998 को जिले का नाम चित्रकूट कर दिया गया।

होटेल्स/ गेस्ट हाउस/ धर्मशाला

(आपका चित्रकूट परिक्षेत्र मे होटल/ धर्मशाला हो, जिसे आप लिस्ट कराना चाहें तो हमें ईमेल करें : mail (@) popcorntrip.com पर)

राही टुरिस्ट बंग्लो, उत्तर प्रदेश पर्यटन, पोद्दार इंटर कॉलेज के निकट, चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) फोन: (05198) – 224218, 224219
टुरिस्ट बंग्लो, मध्य प्रदेश, सतना बस स्टैंड के निकट, चित्रकूट, मध्य प्रदेश फोन: 07670 – 265326
जैपूरिया भवन धर्मशाला, पोद्दार इंटर कॉलेज के निकट, सीतापुर, चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) फोन: (05198) – 224221
राधिका भवन, सीतापुर, चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) फोन: 05198 8004236399
श्री जी भवन, सीतापुर, चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) फोन: 05198 05918 – 224005
कामदगिरि भवन, रामघाट के निकट, सीतापुर, चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) फोन: 05198 – 224313
विनोद लॉज, रामघाट, चित्रकूट, (उत्तर प्रदेश) फोन: 05198 224415
पित्र स्मृति विश्राम गृह, रामघाट, चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) फोन: 9450223214
मंदाकिनी सत्संग भवन, सीतापुर रोड, चित्रकूट, (उत्तर प्रदेश) फोन: 9450223446
होटल रामकृपा इन, नगरपालिका के निकट, कर्वी, चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) फोन: 05198 224405
अग्रवाल गेस्ट हाउस, रेलवे स्टेशन के सामने, कर्वी, चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) फोन: 05198 236370

भाग 2: चित्रकूट परिक्षेत्र के निकट के प्रमुख स्थल :

इस वीडियो मे देखेंगे करेंगे – कुछ बेहद खास स्थानों जो उत्तर प्रदेश मे चित्रकूट परिक्षेत्र मे आने वाले पर्यटकों के अनुभव को और भी और भी यादगार बना देंगे ।
इस विडियो मे है – चित्रकूट और इसके समीप कुछ ऐसे स्थल/ आकर्षण जो चित्रकूट आने वाले पर्यटकों के अनुभव को अविस्मरणीय बनायेंगे। 

जिनमे शामिल है –  ऐतिहासिक और देश के सबसे बड़े किलों में गिने जाने वाले किलों मे एक – कालिंजर दुर्गबांदा के पास जैविक खेती, रानीपुर वाइल्ड लाइफ, धारकुंडी, शबरी जल प्रपात एवं गणेश बाग, जहां खजुराहो की तरह मूर्तिया देखी जा सकती हैं।

https://youtu.be/3Y6dH1cmjVM

Organic Farm in Banda (Humane Agrarian Centre)
https://www.facebook.com/avartansheelkheti




चम्पावत, उत्तराखंड यात्रा गाइड

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Champawat

उत्तराखण्ड में अगर संस्कृति और सभ्यता के प्राचीनतम स्थान की बात करें तो जो उनमे चम्पावत का प्रमुख है। यहाँ के ऐतिहासिक स्तंभ, स्मारक, पांडुलिपियां, पुरातत्व संग्रह और लोककथाएं इसके ऐतिहासिक महत्व का प्रमाण हैं। कत्युर  साम्राज्य ने अतीत में इस क्षेत्र पर शासन किया था। उसके पश्चात् चंद वंश की राजधानी रहा यह स्थान,उन्होंने अपनी प्राचीन राजधानी में कई मंदिरों और प्राचीन स्मारकों का निर्माण किया है। वर्तमान में ये स्मारक पर्यटक के लिए अब आकर्षण है। बालेश्वर मंदिर, देवीधुरा, पंचेश्वर, पवनगिरी मंदिर कुछ ऐसे वास्तुशिल्प भवन हैं जो चंद वंश द्वारा निर्मित है।

चम्पावत के होटल्स/ रिसॉर्ट्स

चम्पावत नगर में कई बजट होटल उपलब्ध है, जिनकी जानकारी हमारे पास हैं उनमे से कुछ ये हैं (अगर आप किसी होटल/ गेस्ट हाउस की जानकारी जोड़ना चाहते है, या बदलना चाहते है तो हमें ईमेल [email protected] अथवा व्हाट्सएप करें)

Hotel N Green City Near Khatkana Bridge, Champawat, [email protected] +91 9412097010, +91 95577 62109

Hotel Mount View, Near Bus Station, Chamapawat, [email protected] +91 9927167905

Hotel Rajatdeep Main Bus Stand, Champawat, [email protected] +91 9897370393

Hotel Shiva Residency GIC Chowk, Champawat, [email protected] +91 9412044242

Yamandeep Guest House Talli Madli, Champawat [email protected] +91 9897600008

Hotel Sea Hawk, Champawat

Valley View Bamanjol, Sukhi Dhang, Shyamlatal Road, Champawat, [email protected] +91 9651649669

Shiva Hotel and Restaurant Koli Dhek, Lohaghat, Champawat [email protected] +91 7351636530

Prakash Hotel Kakrali Gate, Tanakpur Dist Champawat, Tanakpur, Champawat [email protected] +91 9759976023

Om Hotel Chauki, Manch Tamli Road Champawat, Champawat [email protected] +91 7251034124

Nath Guest House JYAL FARM PITHORAGARH ROAD TANAKPUR, champawat [email protected] +91 8791329124

All Weather Hotel and restaurant Vill- Khola sunar PO-Barakote, Lohaghat, Champawat, [email protected] +91 7078244977

Barahi Guest House Tanakpur road, Champawat, [email protected] +91 9456704485

Golju Regency, Goral Chour road, Champawat [email protected] +91 8979599191

Harsh Hotel, Pati, Champawat [email protected] +91 9917152430

Hotel Akashdeep Pithoragarh Road Chhatar, Champawat [email protected] +91 9997181836

Hotel Baleshwar Resort Baleshwar Marg, Champawat, [email protected] +91 9412037273

Hotel Blu Empire 039, Tanakpur, Champawat [email protected] +91 9760129367

Hotel Cedar Plaza PANCHESWAR ROAD LOHAGHAT, CHAMPAWAT [email protected] +91 9927594666 www.hotelcedarplaza.com

Hotel Gopala Vill – Kalukhan, P.O.- Gouthgarsari, Champawat [email protected] +91 8954508632

Hotel Ganpati Palace, Near Grif Camp, Champawat, [email protected] +91 9917341693

Hotel Harsh, Main Market, Champawat, Champawat [email protected] +91 9557387696

Hotel Mangal Deep, Punati Chatar Champawat, [email protected] +91 9456102639

Hotel Lakshya Pithoragarh Road, Tanakpur, Champawat [email protected] +91 7500253900

Hotel Laksh Villa Resort Near Bush Station, Champawat, [email protected] +91 8449348456

Hotel Mount View Near Bus Station, Chamapawat, [email protected] +91 9927167905

Hotel Ranjeet Palace Pithoragarh Road, Lohaghat, Champawat [email protected] +91 7579234567

Hotel Reyansh Mohanpur, Tanakpur, Champawat [email protected] +91 9456344433

Hotel Shikhar Bus Station Road, Tanakpur, Champawat [email protected] +91 9897621470

Hotel Sangam, Sant Baazar, Champawat, [email protected] +91 7500070770

Hotel Shivansh 32, Tanakpur, Champawat [email protected] +91 9837447645

Hotel Shumangalam 0014, Banbasa, Champawat [email protected] +91 9897008255

Hotel Tej Maan Near Khatkana Pul, Champawat, [email protected] +91 9897558613

Hotel Taj 242, Tanakpur, Champawat [email protected] +91 9412166000

Hotel Tiwari Near Bus Station, Champawat, [email protected] +91 8859378429

Hotel Upreti, Main Bus Stand, Champawat, [email protected] +91 7579102768

Jai Maa Ladidhura Hotel Vill: Mall Khola, Post: Barakhot, Champawat [email protected] +91 9690698405

JaiShree Khatima Road, Tanakpur, Champawat [email protected] +91 9758436260

Manas Farms Chandrika Homestay, Village: Forti, Lohaghat, Distt. Champawat Uttarakhand +91 94565 10527


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Haldwani to Tanakpur Journey

हल्द्वानी, नैनीताल जिले का एक प्रमुख नगर होने के साथ साथ कुमाऊँ के प्रवेश द्वारा के रूप में भी जाना जाता है। और टनकपुर नगर चंपावत जिले का नेपाल सीमा में बसा एक प्राचीन भारतीय नगर है। इस यात्रा संस्मरण और विडियो में इन्हीं दो स्थानों के बीच सड़क यात्रा का विवरण।
Poppcorn Trip के इस सफ़र के लिए उत्तराखंड में कुमाऊ में हल्द्वानी से सितारगंज/ खटीमा सहित विभिन्न पड़ावों से होकर चम्पावत, लोहाघाट, पिथोरागढ़ जनपद के भ्रमण का कार्यक्रम बनाकर, हमने अपनी यात्रा आरम्भ की।

हल्द्वानी से सितारगंज के लिए Roadways स्टेशन से आगे होते हुए गौला नदी के पुल को पार कर हल्द्वानी गौलापार क्षेत्र में पहूचे, यहाँ से हल्द्वानी का व्यस्त क्षेत्र पीछे छूटता जाता है, इसी मार्ग मे हमें दिखा – अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स, हल्द्वानी का स्टेडियम।

कुछ और आगे जाने पर हम पँहुचे नवाड़ खेड़ा तिराहे पर जहां से एक रोड हल्द्वानी, जहां से हम आए थे – दूसरी काठगोदाम और और तीसरी रोड से सितारगंज की ओर जा सकते है।

यहाँ से आगे दिखती है खुली सड़के, प्राकर्तिक वातावरण, हरियाली, कहीं किनारे के खेतों मे हरी – भरी लहलहाती फसलें और काम करते कृषक। मुख्य सड़क में लगे बोर्ड – बीच – बीच में आवश्यक जानकारी देकर अपनी भूमिका निभाते।

रोड के किनारे दिखते – कुछ फार्म और दूर – दूर बने घर, किसी पेंटर को उसके अगले मास्टरपीस के लिए प्रेरणा देते।

आगे बढ़ते हुए, मार्ग से दिखने वाले वाले छोटे -छोटे गाँव, कहीं सड़क के किनारे मंदिर, कहीं फलों या फूलों के विविध रंग, कहीं आपस मे संवाद करते पशु और ग्रामीण जीवन। सड़क पर सरपट दौड़ते वाहन दोनों और वनों से घिरी सड़क।

आगे चलते हुए हम पँहुचे चोरगलिया, जिसे नन्धौर वन्य अभयारण्य नाम से भी जाना जाता है। जहां वन विभाग से अनुमति लेकर wildlife सफारी की जा सकती है।

कुछ स्थानीय जानकार कहते है कि – चोरगलिया का सही नाम चार गलियाँ था, जो बिगड़ कर चोरगलिया हो गया। जबकि कुछ लोगों का मानना है कि कभी इस सुरम्य घने जंगलों वाले मार्ग में चोर डाकुओं की बहुतायत थी, इसलिए इस क्षेत्र का नाम चोरगलिया पड़ा।

यहाँ से आगे सितारगंज रोड मे आगे बड़े, जो यहाँ से 23 किलोमीटर दूर है। सितारगंज रोड में ही सिडकुल का इंडस्ट्रियल एरिया मिलता है।

संगीत प्रेमियों को झंकार देने वाले वाद्य यंत्र सितार से शुरू होने वाले उधम सिंह जनपद का प्रमुख स्थान सितारगंज समुद्र तल से 298 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

सितारगंज की मुख्य बाज़ार में जाना हो तो मुख्य चौराहे से दाई और जाकर बाज़ार में पंहुचा जा सकता है – यहाँ सभी तरह की दुकाने, शो रूम मिल जाते है. बाज़ार का केंद्र है पीपल चौराहा – बाज़ार का सबसे पुराना इलाका – इसी के इर्द गिर्द बाज़ार का विस्तार हुआ। बाज़ार की रोड से मुख्य हाई वे की और वापस आते कई सरकारी कार्यालय. स्कूल दिखाई देते है। कुछ देर बाज़ार में घुमकर वापस हम मुख्य हाई वे में पंहुचे अपने अपने सफ़र को जारी रखने के लिए।
सितारगंज से खटीमा रोड में हमें एक तिराहा दिखा, जहां से बायीं ओर को जाता मार्ग नानकमतता को और दाहिनी ओर को जाता मार्ग खटीमा के लिए है। गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब की दूरी 1.5 किलोमीटर है। नानकमत्ता स्थित गुरुद्वारा पर हम पूर्व में विडियो बना चुकें हैं, जो आप youtube में “Nanakmatta PopcornTrip” लिख के देख सकते हैं।


नानकमत्ता से आगे मिलती है – प्रतापपुर चौकी, और यहाँ से कुछ आगे ही स्थित है झनकट।

अपनी यात्रा मे आगे बढ्ने के लिए दायी ओर मुख्य हाईवे पर बने रहे। सितारगंज से 11 किलोमीटर के बाद, एक सुंदर स्थान मिलता है – झनकट। इस स्थान की एक विशेषता यह है कि – जहां समान्यतः किसी भी शहर में लोग हाई वे से बाइपास होकर अगले स्थान के लिए निकल जाते है – वहीँ झनकट की मुख्य बाज़ार हाइवे के दोनों और बसी है – मुख्य हाइवे और जो all weather रोड के रूप में भी विकसित हो रही के किनारे बाज़ार होने कारण लोगों को बाजार में चौड़ी सड़कें और पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ मिल जाते हैं। इसलिए इस छोटे से बाज़ार से गुजरने का अनुभव अनूठा है।

झनकट में हाइवे के किनारे – यहाँ के फास्ट फूड के कुछ स्टॉल। और सड़क के दोनों और स्थित लगभग सभी तरह की दुकाने है, जहां से स्थानीय लोग ख़रीददारी करते हैं.

यहाँ खेती के लिए उपजाऊ जमीन का महत्व इस बात से लगा सकते है कि – इस छोटे से स्थान में 8 राइस मिल है।

झनकट के बाद खटीमा/ टनकपुर मार्ग में मिला इस रूट मे पहला टोल गेट, जहां से FastTAg द्वारा टोल शुल्क दे कर हम आगे बड़े। इस मार्ग मे सड़क मे अच्छी गति से वाहन चलाया जा सकता है। झनकट से 20 किलोमीटर की दूरी पर है – खटीमा। खटीमा, उधम सिंह नगर का एक प्रमुख नगर।

खटीमा उत्तराखंड निर्माण की मांग करते हुए 1994 में शहीद हुए आंदोलनकारियों की भूमि के रूप मे भी जाना जाता है। यहाँ की बाज़ार मे सीमावर्ती राज्य नेपाल के भी लोग खरीददारी करने आते है।

खटीमा क्षेत्र में पर्यटको को आकर्षित और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तत्कालीन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी ने उत्तराखंड के पहले मगरमच्छों के पार्क का लोकार्पण किया। यहाँ 150 से अधिक क्रोकोडाइल हैं। एक दिसम्बर 2021 से यहाँ crocodile पार्क आरंभ हुआ। यहाँ आगुन्तुक जान सकेंगे कि मगरमच्छ कैसे रहते हैं, कैसे तैरते हैं, कैसे खाते हैं, कैसे सोते हैं, कैसे अपने भोजन के लिए शिकार करते हैं।

खटीमा की सीमा से बाहर आते हुए हुए वनखंडी महादेव मंदिर परिसर में स्थित है – 116 फीट ऊंची भगवान शिव की मूर्ति, संभवतः यह उत्तराखंड की सबसे ऊंची मूर्ति है।
खटीमा से 15 किलोमीटर की दूरी पर है बनबसा। बनबसा अपनी प्राकर्तिक सुन्दरता लिए जाना जाता है। प्रसिद्ध शारदा नहर का उद्गम भी बनबसा से ही हुआ है। बनबसा का मुख्य आकर्षण केन्द्र अंग्रेजों के समय बना बनबसा पुल व बनबसा पुल पर स्थित पार्क है।
बनबसा से हम चंपावत जनपद में है। यहाँ से नेपाल के लिए भी सड़क मार्ग से जा सकते है। कुछ समय पहले हम बनबसा से ही महेन्द्रनगर जिसे अब भीमदत्त कहते है से नेपाल गए थे।

अपने वाहन द्वारा नेपाल में प्रवेश की जानकारियों सहित नेपाल में महेंद्र नगर से काठमांडू और पोखरा की ट्रेवल गाइड पूर्व में पॉपकॉर्न ट्रिप में बना चुके हैं, जिसे आप PopcornTrip youtube channel में देख सकते हैं।
बनबसा से आगे बढ़ते हुए आता है टनकपुर। बनबसा से टनकपुर की दुरी 10 किलोमीटर है. टनकपुर, चंपावत और पिथौरागढ़ का प्रवेशद्वार है। शारदा नदी के किनारे बसा टनकपुर – धार्मिक, सांस्कृतिक, व्यापारिक महत्व के साथ सौन्दर्य प्राकृतिक के लिए उत्तराखंड के महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह चंपावत जनपद अंतिम रेलवे स्टेशन है। पहाड़ी स्थानों को लौटते लोगों और पर्यटक के लिए यहाँ कई होटेल्स और गेस्ट हाउस है।
नेपाल के साथ देश के विभिन्न स्थानों के लिए टनकपुर से रोडवेज़ की बस सेवाएँ है। यहाँ की बाज़ार मे सभी तरह की दुकाने है। जिनमे स्थानीय लोगो की जरूरत का समान मिल जाता है।

टनकपुर बस स्टेशन से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर से एक सड़क पूर्णागिरी मंदिर की ओर जाती है। पूर्णागिरी मंदिर यात्रा पर भी पूर्व मे पॉप्कॉर्न ट्रिप चैनल मे video बना चुके है, जिसे youtube में पॉपकॉर्न ट्रिप पूर्णागिरी टाइप कर सर्च किया जा सकता है।

इसी तिराहे के पास टनकपुर मे नन्धौर वन्य अभयारण्य का ककराली गेट है। इसका एक गेट हमने इसी video मे चोरगलिया मे देखा था।
मैदानी सड़क में सफ़र यहीं तक इसके आगे की यात्रा पहाड़ी घुमावदार मोड़ों से हुए होते आगे बढेगी, यात्रा के अगले भाग में यहाँ से चम्पावत की यात्रा रास्ते के खुबसूरत लैंडस्केप के साथ देखेंगे – श्यामलाताल को, जहाँ एक खुबसूरत ताल है, और जहाँ कभी स्वामी विवेकानंद भी आये थे।

आशा है आपको ये लेख पसंद आया होगा। विडियो देखें PopcornTrip चैनल में।

उत्तराखंड आपदा के समय, नैनीताल जिले के एक होम स्टे के अनुभव।

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पिछले वर्ष अक्टूबर माह मे जब नैनीताल जिले में बहुत ही ज्यादा बारिश होने से प्राकृतिक आपदा आई थी, कई मकान और खेतों के साथ सड़क के कई हिस्से बह गए, और उस अतिवृष्टि का सबसे ज्यादा प्रभावित रामगढ़/ मुक्तेश्वर क्षेत्र हुआ, हम उन दिनों वहीं एक गाँव सुपी किरोड स्थित एक होम स्टे में रुके थे।

जब हम हम सुपी किरोड़ पँहुचे – मौसम बहुत अच्छा था, अगले तीन दिन हमने आस पास के जंगल की सैर की, एवं निकटवर्ती पहाड़ियों में ट्रेकिंग की। इस पर हमने एक वीडियो भी बनाया जो हमारे यूट्यूब चैनल में देखा जा सकता है।

लेकिन जिन बातों का जिक्र हमने वीडियों मे नहीं किया वो यहाँ है।

तीन दिन का अच्छा समय बीतने के बाद – चौथे दिन अचानक मौसम खराब होने लगा, दिन भर होम स्टे के छोटे से कमरे के अंदर रहे। शाम तक लाइट भी चली गयी, पता चला कि – बिजली के कुछ खंबे गिर गए हैं। AirTel, Jio के सिग्नल वैसे भी कमरे के भीतर आते नहीं थे, इसलिए इंटरनेट भी नहीं था। बाहरी दुनिया से संपर्क नहीं हो पा रहा था। सिग्नल के लिए थोड़ा ऊपर की ओर जाना होता, लेकिन इस बारिश मे कैसे बाहर निकल पाते। ऊपर से ठंड, बाहर निकलते ही कपकपी छूट जाती, मोबाइल की उपयोगिता रात मे रोशनी देना रह गयी थी।

अगले दिन मौसम बारिश और तेज और लगातार होने लगी, रह रहकर आसमान तेज गर्जना करता, कमरे के अंदर आपस मे बात करने के लिए भी ऊंची आवाज़ मे बोलना होता, जलधारा इतनी तेज थी कि हमने अपने आस पास ही खेतों के कुछ हिस्से – पानी की तेज धारा के साथ बहते देखे, साथ ही वहाँ से दिखने वाले सामने पहाड़ी मे बसे गाँव के दृश्य भी डराने वाले थे – कई मकानों के नीचे से उनकी नीव का कुछ हिस्से ही बह गए थे या कुछ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे।

एक और दिन यह सिलसिला जारी रहा, हमें जानकारी मिली कि – गाँव के कई मकानों, रास्तों को नुकसान हुआ है। गाँव तक आती motorable सड़क के कुछ हिस्से ही बह गए है, जिससे गाँव का सड़क संपर्क भी कट गया।

शाम को बारिश भी कम होने लगी, लेकिन लगातार चलने वाली इस अप्रत्याशित वर्षा ने वहाँ कि ज़िंदगी को उथल पुथल कर रख दिया। इस खूबसूरत जगह की तस्वीर बदल गई थी, जगह जगह लेंड स्लाइड, टूटे रास्ते। फिर हिम्मत नहीं हुई कि – इस जगह camera ऑन कर सकें, आप जिस तस्वीर को देख रहे है वो इसी गाँव की है, बारिश के पूर्व।

ऐसी आपदा सामान्यतः बरसात के दिनों में भी नहीं आती, मॉनसून के बाद लोग घास काट उनके गट्ठे बनाकर खेतों मे ही सुखाने के लिए रख देते है, और अचानक अत्यधिक परिमाण मे आई इस बारिश के पानी को निकास का रास्ता नहीं मिला, जिससे बारिश से इकठ्ठा हुए पानी ने अपने हिसाब से इधर – उधर से रास्ता बना लिया, और उसका स्वरूप और भी विकराल हो गया।

इस लगातार बारिश के बाद – जब यह बंद हुई – तो हमने वापस लौटने का निश्चय किया, लेकिन सड़क कई जगह टूट गयी थी। जिसके अगले 3-4 दिन तक खुलने की संभावना नहीं थी, हम जिस टैक्सी से आए थे, वो हमें ड्रॉप कर वापस चली गयी थी, यहाँ से दूसरी टैक्सी लेनी थी, लेकिन सड़क तो बंद थी। तब अब वापस कैसे जाएँ!

जिस होम स्टे मे हम रुके थे वो मुख्य सड़क से लगभग एक किलोमीटर दूर था, समान ज्यादा था, जिसको ले जाने के लिए खच्चर तो उपलब्ध था, लेकिन पैदल मार्ग भी कई जगह से बुरी तरह टूट गए थे, या बह गए थे। कच्चे और टूटे रास्तों से जैसे तैसे आगे बढ़े, रास्ते इतने खराब हो चुके थे कि – जूते कीचड़ मे धस रहे थे, कपड़े पूरे भीग गए, जिससे ठंड भी लग रही थी। कुछ जगह गधेरे (पहाड़ी से आती तेज नहर/ नाले), जिनमे घुटनों तक पानी था, और बहुत तेज वेग से बह रहे थे, को पार कर आगे एक ऐसी जगह पहुंचे जहां से कसियालेख के लिए पैदल मार्ग था।

कसियालेख कुछ किलोमीटर दूर नजदीकी मार्केट हैं, जहां से आगे सड़क खुली होने की संभावना थी। जहां हम रुके थे, उसके निकट ही एक केंप साइट भी थी, जिसमे दिल्ली, गुड़गाँव से कुछ और पर्यटक भी अपने वाहनो मे आए थे, – जिन्हे तीन चार दिन पहले वापस जाना था, लेकिन सड़क टूटने और खराब मौसम के कारण उन्हे कुछ और दिन रुकना था। उस समय हम यह सोचकर रिलैक्स हुए कि, यहाँ हम अपने वाहन से नहीं आए थे। इसलिए हमारे पास ट्रेक कर, कुछ पैदल चलकर ही सही, आगे का सफर जारी रखने का तो ऑप्शन है।

कसियालेख पहुंचने के लिए फिर से पैदल चलना था – स्थानीय लोगों ने एक ट्रेकिंग रूट सुझाया जो जंगल से घिरा था, समस्या यह थी कि साथ मे थोड़ा ज्यादा समान था, जिसे ले जाने के लिए हमें किसी सहायता की आवश्यकता थी। जो मजदूर वहाँ थे, उन्हे सड़क ठीक करने का काम मिला था, थोड़ा – बहुत प्रयासों के बाद वहाँ के इंटर कॉलेज मे पढ़ने वाले दो बच्चे मिले, जो थोड़ा सा समान उठाकर हमारे साथ कसियालेख तक चलने को तैयार हो गए।

लगभग दो घंटे की ट्रेकिंग के बाद के बाद हम कसियालेख पहुचे – यहाँ से आगे भी रोड के हालात बहुत अच्छे नहीं थे। हमें जानकारी मिली कि – रामगढ़ से भीमताल के बीच और उससे आगे भी कई जगह सड़क बंद है। कुछ लोग – क्वारब से खैरना, रानीखेत से रामनगर होते हुए आगे जा रहे है, जो तुलनात्मक रूप से बहुत लंबा है।

कसियालेख से थोड़ी ही दूर है – भटेलिया, जो मुक्तेश्वर से बस 4-5 किलोमीटर पहले है, यहाँ कई टैक्सी मिल जाती है, हम टैक्सी की जानकारी लेने भटेलिया पहुचे – जहां पहुच कर अपडेट मिला कि – भीमताल होते हुए हल्द्वानी की रोड खुल चुकी है लेकिन बहुत जगह जाम है – टैक्सी कम थी, इसलिए टैक्सी वाले भी दो से तीन गुना चार्ज कर रहे थे।

हमारे पास अधिक ऑप्शन नहीं थे – बारिश मे तीन चार दिन बुरी तरह से एक रूम मे बंद होने के बाद हम अब वापस ही लौटना चाहते थे, तो टैक्सी वाले के डिमांड पर ही बुकिंग करा ली, वापस लौटते हुए कई जगह जाम मिला, और अंधेरा होने के बाद अपनी मंजिल पर पहुंचे।

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Almora

यह अल्मोड़ा है  – उन सब का जो यहाँ के है, और  उन सबका भी जो यहाँ कभी रहे हैं।

अल्मोड़ा उत्तराखंड के विख्यात और ऐतिहासिक स्थानों में से एक हैं। कई लोग अल्मोड़ा का परिचय उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में भी देते हैं।

कई बातें जो दुनिया मे कहीं और देखने – जानने को नहीं मिलेंगी। उनही बातों को तलाशने के साथ, करेंगे अल्मोड़ा को एक्सप्लोर।

दो दशक पहले –  जब मैंने अल्मोड़ा को जानना शुरू किया –  तब लोग अल्मोड़ा में लाला बाजार या उससे लगी  नन्दा देवी बाज़ार से पलटन बाज़ार तक तक तो लगभग  रोज ही घूम आते। अब भी शायद जाते हों।  यह दोनों स्थान अल्मोड़ा की मशहूर पटाल बाज़ार के दो कोनो पर स्थित हैं, जिसके बीच में चौक बाज़ार, कारखाना बाज़ार, खजांची मोहल्ला, ज़ोहरी बाज़ार,  गंगोला मोहल्ला, थाना बाज़ार आदि नाम से जानी जाने वाली कुछ – 2 दुरी पर स्थित बाज़ार हैं, जिनके साथ लोगों के रिहायशी मकान भी. और मकानों तक पहुँचने के लिए गलिया ।

यह हैं अल्मोड़ा का मशहूर मिलन चौक, नाम के अनुरूप – यहाँ रोड के किनारे खड़े हो, मित्रो, परिचितों के मध्य अक्सर अनौपचारिक मीटिंग्स हुआ करती।

कुछ वर्ष पूर्व तक, चार – छह किलोमीटर चलना, बेहद छोटी दूरी मानी जाती थी, पटाल बाज़ार या मॉल रोड मे घूमते हुए लोग रोज इतनी दूरियाँ यो ही तय कर लेते। कभी पैदल चल कर डयोली डाना, कसारदेवी, चितई अक्सर घूम आया करते। अल्मोड़ा में रहने वाले प्रकृति से प्रेम में पड़ ही जाते हैं।

विस्तार से देखें पूरा वीडियो

अल्मोड़ा से चितई मंदिर का खूबसूरत ट्रेक – चीड़ के जंगल से होते हुए ।

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Almora to chitai trek
Almora to chitai trek through pine forest

उत्तराखंड में कुमाऊ में  अल्मोड़ा जनपद पर्यटकों के बीच में अत्यंत प्रसिद्ध है, यहाँ कई दर्शनीय स्थल और ट्रैकिंग रूटस हैं – जिनके बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे ही एक खुबसूरत ट्रेक में हैं हम आज।

अल्मोड़ा से  लगभग 5 किलोमीटर दूर बिनसर रोड में कसार देवी के निकट है पपरसैली। जो शांत आबोहवा,  हिमालय के दृश्यों के साथ सिमतोला इको पार्क के लिए जाने जाती है। सिमतोला इको पार्क के साथ पपरसैली से कसारदेवी का पैदल ट्रेक और अल्मोड़ा के बारे में आने वाले विडियोज में देखेंगे।

पपरसैली में सिमतोला इको पार्क के पास से होते चितई के मंदिर तक का चीड के जंगलों से होते हुए अत्यंत ही मनोरम ट्रेक है। प्रकृति प्रेमियों के लिए अल्मोड़ा की पहाड़ियां का सौन्दर्य अतुलनीय है। ब्रिटिश काल में यूरोपियन भी इन जंगलों से अत्यंत प्रभावित रहे है। लेकिन अब दोपहियाँ और चार पहियों से चलने वाली नयी पीढियां – इन शांत और सुरम्य स्थानों से अनजान है।

सिमतोला इको पार्क के प्रवेश द्वार से पूर्व प्रसार भारती की चाहर दीवारी से दाई और से होते हुए –  एक संकरे रास्ते से आगे बढ़ते ही – ऐसा लगता है – जैसे एक अलग दुनिया में पंहुच गए हो। बरसात के मौसम के बाद यह ट्रेक किया इसलिए रास्ते में कहीं कहीं घास लम्बी थी, साथ में चिड की पत्तियां – पिरूल पर चलना – जैसे किसी गद्देदार आरामदेह रास्ते में चलने का एहसास दे रही थी, हालाकिं इनमे थोडा फिसलन होती है – इसलिए पैर को सावधानी से रख आगे बढे।  इसे एक आसान ट्रेक कह सकते है, जिसे छोटे बच्चे और अधिक उम्र के लोग कर सकते है  – पूरे रास्ते लगभग समतल हैं, बीच बीच में कहीं बहुत ही हलकी चढाई या ढलान मिलती है।

यह बायीं और दिख रहा सिमतोला इको पार्क का हिस्सा का हिस्सा है – जिसमे बैठने के लिए बेंच लगी है, यह रास्ता कुछ दूर तक सिमतोला इको पार्क की boundary को छुते हुए आगे बढ़ता है।

चितई के इस मार्ग में –  कुछ आगे जाकर दाई ओर डिअर पार्क की सीमा भी मिलती है, इस वन में अकेले और अँधेरा होने के बाद आने से बचना चाहिए, क्योकिं यह वन्य प्राणियों का भी विचरण स्थल है। अल्मोड़ा की भौगोलिक परिस्थितियों से परिचित न हो, तो इस ट्रेक में किसी स्थानीय जानकार गाइड के साथ ही जाएँ।

देखें पूरे ट्रेक का विडियो और करें चितई मंदिर दर्शन :

मुक्तेश्वर के समीप एक खुबुसरत गाँव और होम स्टे Unseen Nainital

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Home Stay Nainital
Home Stay Nainital

उत्तराखंड मे नैनीताल जिले मे प्रसिद्ध हिल स्टेशन –  मुक्तेश्वर के निकट – एक गाँव – सूपी किरोड़ गाँव में, यह एक लेस traveled बेहद खूबसूरत destination है। हम यहाँ एक होम स्टे मे रुके थे।

गाँव के आस पास घूमने के साथ हमने  – गाँव से दिखने वाली पहाड़ी की एक चोटी मे स्थित थकुड़ शिव मंदिर तक ट्रेक किया। यहाँ से और भी कई जगह के ट्रेक किया जा सकते है। 

शहर मे रहते हुए हम, जिन चीजों के ख्वाब भर देख सकते है – जैसे शुद्ध ऑक्सीज़न, प्रकृतिक स्रोत से मिलता स्वच्छ जल, खेतो मे उगी ताजी ओरगनिक सब्जियाँ, फल और साथ मे गाय के दूध से बने उत्पाद, वो यहाँ प्रचुरता से उपलब्ध हैं।

आस पास के जंगल मे सेकड़ों प्रजातियों के वृक्ष और पौधे देखे, जिनमे से कई औषधीय महत्व के थे। बॉटनी के स्टूडेंट्स को अपने विषय को Practically समझने के लिए इसे उपयुक्त स्थान कह सकते है। बर्ड और नेचर फोटोग्रापरस के केमरे की बेटरीयां यहाँ जल्दी – जल्दी drain होंगी।

यह है – कई सौ वर्ष पुराने सबसे बुजुर्ग साथ ही सबसे ऊँचे और मजबूत वृक्ष – ग्रामवासी श्रद्धा पूर्वक वृक्ष देवता कहते है।

हिम शृंखलाओं को गाँव के ऊपरी हिस्से अथवा – ऊपर जंगल की ओर चढ़ते हुए देखा जा सकता है।

विभिन्न प्रजातियों के पंछियों, तितलियों की कई प्रजातियाँ हमें – बिलकुल पास से गुजरती और अपने आस पास के बगीचों मे देखने को मिली। हर मौसम कम या ज्यादा दिखती है।

ताज़ी ओरगनिक सब्जियाँ, उसी समय तोड़ी जाती है, का स्वाद ही अलग होता है, जिसकी तुलना मंडी से खरीद कर लायी गयी सब्जियों से नहीं हो सकती।

एक दिन हमने गाँव से थकुड़ महादेव के मंदिर के लिए ट्रेक किया, जो लगभग 4-5 किलोमीटर का है, ट्रेक मे कहीं हल्की चढ़ाई कही सिदेह रास्ते और कहीं तीव्र चढाई है।

रास्ते मे कुछ आकर्षक बुगयाल यानि घास के मैदान मिलते है, ऊपर जैसे जंगल को जाते है – हिमालय की और अधिक चोटियाँ नज़र आने लगती है।

सुबह जल्दी निकल/ नाश्ता/ लंच पेक कर – एक पूरा दिन यहाँ बिताने के लिए अच्छा है,

मंदिर के लिए इस गाँव से जाने वाला ट्रेक्किग रूट घने जंगलो से होकर गुजरता है, जंगल मे बांज, चीड़, बुरास, देवदार, काफल, उतीश सहित कई सभी प्रजाति के पहाड़ी क्षेत्रों मे होने वाले वृक्ष और पौधे दिखाई देते है, जिनमे से कई का औषधीय महत्व भी है। जंगल इतना सघन है कि रास्ते मे कई जगह धूप जमीन तक नहीं पहुचती और कई जगह छन कर धूप हम तक पहुचती।

रास्ते मे नमी के कारण कई जगह काई जमी थी, जिससे कहीं – कहीं रास्ते फिसलन भरे थे, जिनमे बहुत धीमे और पैर जमा जमा कर रखने की जरूरत होती है।

देखें किरोड़ गाँव और थकुड़ महादेव मंदिर और पहाड़ी का ट्रेक –