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नैनीताल की खूबुसरती को सबसे पहले दुनिया से परिचित कराने और नैनीताल को बसाने का श्रेय अंग्रेज़ यात्री, लेखक और व्यापारी पी बैरन को जाता हैं, वे अपनी यात्राओं अनुभव से जुड़े लेख विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में पिल्ग्रिम नाम से भेजा करते थे।

पी बैरन सन 1839 में केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा करने के बाद ये कुमाऊँ की ओर बढ़ते हुए, खैरना पहुचे। खैरना नैनीताल से 30 किलोमीटर दूर, रानीखेत/ अल्मोड़ा जाने वाली रूट मे एक छोटा सा खूबसूरत कस्बा हैं।

केदारनाथ और बद्रीनाथ पर बनें हमारे विडियोज बहुत पसंद किए गए, उनके बारें मे भी देखना चाहें – तो लिंक description में हैं।

पी बैरन को खैरना में, वहाँ से दिखने वाली पहाड़ी – ‘शेर का डाण्डा’ की जानकारी मिली, स्थानीय लोगों ने बताया कि – उस पहाड़ी के पीछे एक सुंदर ताल भी हैं। घना जंगल और हिंसक पशुओं के कारण उस समय वहाँ लोग कम ही जाते थे।

शेर का डांडा मे – डांडा शब्द स्थानीय बोली में कहें जाने वाले शब्द ड़ाना या डान से बना हैं, जिसका अर्थ हैं – पहाड़ी यानि रिज, शेर का डांडा यानि – ऐसी पहाड़ी जहां tiger फॅमिली के सदस्य रहते हैं।

साहसिक पर्यटन के शौकीन ‘पी बैरन’ ने कुछ स्थानीय लोगोको अपने साथ चलने को तैयार किया और ट्रेक करके समुद्र तल से 2350 मीटर ऊंची ‘शेर का डांडा’ पहुचे,सुंदर पहाड़ी और यहाँ से से खूबसूरत ताल को देखकर वह मंत्र मुग्ध हो गए, जो ताल उन्होने शेर का डांडा पहाड़ी से देखा, उसे ही आज हम नैनीताल नाम से जानते हैं।

‘पी बैरन’ की तरह, नैनीताल का विडियो सफर शुरू करते हैं, शेर का डांडा से,जहां आज भी tiger, लेपर्ड, भालू और दूसरे जानवर देखे जा सकते हैं, अब इस जगह अब 4.6 hectare मे फैला हाइ altitude ज़ू हैं।

नैनीताल में, शेर का डांडा में ज़ू पहुँचने के लिए, लगातार चलने वाली shuttle सर्विस उपलब्ध हैं, ज़ू के लिए टॅक्सी सेवा, तल्लीताल riksa स्टैंड से मॉल रोड की ओर चलते हुए कुछ कदम की दूरी पर available हैं।

ये हैं ज़ू की चढ़ाई और संकरी रोड।

अधिक जानने के लिए देखें विडियो

Nainital City Guide

 

नैनीताल मे प्रवेश करते ही पहले टॅक्सी स्टैंड हैं, और इसके बाद नज़र आता है – रोडवेज़ का बस स्टॉप। जो तल्लीताल मे हैं, यहाँ कुछ होटेल्स भी हैं।

इसके बाद नैनीताल शहर में फोर व्हीलेर्स के प्रवेश के लिए के lake ब्रिज का शुल्क तल्लीताल चेक पॉइंट मे लिया जाता हैं, 2 व्हीलेर्स के लिए कोई चार्ज नहीं लिया जाता।

कार अथवा टॅक्सी से शहर में जाने के लिए टोल मूल्य देना होता है, जो मॉल रोड से एक बार गुजरने के लिए ही मान्य है। टोल शुल्क स्क्रीन मे देखा जा सकता हैं।

यहाँ से नैनीताल की मॉल रोड शुरू होती हैं जो मल्लीताल तक जाती हैं।, टोल ब्रिज के बाद माल रोड के 2 रोड्स मे बट जाती हैं, जो 2 अलग अलग elevavation में है – लोअर मॉल रोड, और अपर मॉल रोड, लोअर मॉल रोड, जो lake की ओर हैं, से wahan तल्लीताल से मल्लीताल की ओर और upar मॉल रोड से मल्लीताल से तल्लीताल की ओर आते हैं।

ये दोनों रोड्स, मल्लीताल में, फिर आपस मे मिल जाती हैं।

Naintal main टुरिस्ट सीज़न में upar मॉल रोड शाम 6 बजे के 8 बजे तक माल रोड मे वाहनों की आवाजाही बंद रहती हैं, इस रोड मे चलते हुए, एक तरफ झील और दूसरी ओर नैनीताल के होटेल्स, restaurants और शौरूम्स हैं। इस समय रोशनी से नहाएँ क्बुसूरत नैनीताल शहर, और ताल के किनारे मॉल रोड में घूमना – ये वो बात हैं, जो सैलानीयों की मधुर स्मृतियों मे हमेशा के लिए बस जाती ।

अधिक जानने के लिए देखे विडियो

Devsthal Temple

Preface | Introduction | What is on screen | History | How to Reach | Where to stay | Nearby attractions | Closing (like share comment, subscribe, will meet soon with new journey or destination)
अल्मोड़ा शहर से कौसानी जाते हुए आपने ये मंदिर देखा होगा, अगर नहीं तो आईये आज देख लेते हैं इस विडियो द्वारा
अल्मोड़ा कौसानी राष्ट्रीय राजमार्ग NH109 पर अल्मोड़ा से लगभग १५ किलोमीटर की दुरी पर ये स्थान है कोसी के समीप महतगांव और ये यहाँ स्थित प्रसिद्द शिव मंदिर देवस्थल। ये है सड़क से मंदिर के लिए मार्ग, जिसके द्वारा कुछ सीडियां उतर और एक छोटा सा पुल पार करके आप मंदिर के प्रागण में पहुच जाते है।
यहाँ पर भगवान शिव को समर्पित मंदिर कोसी नदी के तट पर स्थित मंदिर देवस्थल।

यहाँ पर श्रधालुवों को आकर एक अद्भुत शांति का अहसास होता है। ये है मंदिर का परिक्रमा पथ। मंदिर की सीमा से लगा हुआ मंदिर के पीछे की ओर कौसाम्बी नदी जिसे कोसी नदी कहते हैं का दृश्य।
अनेको शुभअवसरों पर यहाँ धार्मिक कार्यों, भजन कीर्तन, पुराण कथा, बैठकी होली, सत्संग आदि आयोजित होते रहते हैं। जिस्मी स्थानीय जनमानस भागिदारी करते हैं. छेत्र के लोगो में मंदिर के प्रति गहरी श्रद्धा और निष्ठां है। मंदिर के समीप ही कोसी नदी के दूसरी ओर एक वृद्दाश्रम भी स्ठित है।

प्रत्येक शिवरात्रि को यहाँ विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमे दूर दूर से श्रद्धालु उत्साह पूर्वक सम्मिलित होते है।
इसके अलावा यही के समीप एक अन्य प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर कटारमल सूर्य मंदिर भी स्थित है, जो आज से लगभग १ हजार वर्ष पहले कत्युरी शासन में निर्मित हुआ था. मंदिर के बारे में वृस्तित और रोचक जानकारी देते विडियो का लिंक आपको स्क्रीन के उप्परी हिस्से और नीचे डिस्क्रिप्शन में मिल जायेगा, साथ ही अल्मोड़े से कौसानी यात्रा के रोचक विडियो और यहाँ कैसे पहुचे, कहा ठहरे आदि की जानकारी के लिए भी आप popcorntrip चैनल के अन्य वीडियोस द्वारा जानकारी प्राप्त कर सकते हैं

हम इस चैनल में लाते हैं, विभिन्न पर्यटक, धार्मिक स्थलों और यात्राओं से जुडी जानकारी देते विडियो, इसलिए अपडेट रहने के लिए चैनल सब्सक्राइब करने के साथ साथ तुरंत notification पाने के लिए बेल आइकॉन में क्लिक भी कर लें
शिव सबका कल्याण करें, फिर जल्द मुलाकात होगी,, स्वस्थ्य रहें, प्रसन्न रहे।

सामन्यतह प्रत्येक शिव मंदिर के समीप शमशान घाट अवश्य होता है, परन्तु इस शिव मंदिर की एक खासियत यह है की इसके पास शमशान घाट नहीं है।

और इन्फोर्मतिवे विडियो का लिंक भी आपको इस चैनल में मिल जायेगा
विडियो
Viwers आप को इस चैनल में यहीं के समीप ९वि शताब्दी का बना कत्युरी राज में निर्मित कटारमल सूर्य मंदिर के रोचक जानकारी देता विडियो का लिंक स्क्रीन के उप्परी हिस्से और नीचे डिस्क्रिप्शन में मिल जायेगा, आदि और अल्मोड़ा से कौसानी यात्रा का विडियो।

Bhowali Travel Guide

कुमाऊँ, उत्तराखंड में organic पहाड़ी – फलों, सब्जी की बाज़ार, देखिये नैनीताल जिले का खूबसरत हिल स्टेशन – भवाली
#Bhowali is a beautiful and peaceful place, adjoining to Nainital. anyone to go the hills of Uttarakhand from Kathgodam railway station, must pass through Bhowali.
In this video, you will see the beauty of Bhowali and will know some interesting fact about Bhowali, such as information about-
Where is Bhowali, how to reach there, nearby attractions, activities, where to stay etc.
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Some other video links, mentioned in this video are, as follows:-

1) The journey from Ranikhet to Bhowali – https://youtu.be/PQAxhBI3YHo
2) About Kainchi Temple – https://youtu.be/qFiB4qPwGFs
3) The famous Dunagiri Temple, Bhatkot peak & Pandukholi – https://youtu.be/NCFFtoeFZi4
4) Haldwani to Almora – https://youtu.be/glI_eu5pDtg

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#NainitalOnline
To get information about hotels & resort in and around Nainital, Bhowali visit the site – https://www.NainitalOnline.com
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Travel & Events

हल्द्वानी की कहानी। Haldwani – explore the city

हल्द्वानी शहर, जो कि नैनीताल जिले मे स्थित हैं और उत्तराखंड के बड़े शहरों मे से एक हैं, से आप परिचित होंगे ही। शहर को ‘हल्द्वानी’ नाम कैसे मिला? पहले कैसा था हल्द्वानी, ब्रिटीशेर्स से पहले कौन शासन करता था, और हल्द्वानी में मुगल क्यों नहीं कर सकें अधिकार, सहित देखिये शहर हल्द्वानी की दिलचस्प कहानी।

जानिये हल्द्वानी शहर को #Haldwani (Distt: #Nainital), Gateway To Kumaon #Uttarakhand, A short film on Haldwani, Know a few interesting facts, history, geography, tour the city. The story of a city.
Main Roads in Haldwani as Kaladhungi Road, Rampur Road, Bareilly Road, Nainital Road.
Main Crossing – Kaladhungi Chauraha, Educational institution in Haldwani, Hospitals, streets.
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रानीखेत से भवाली

इस मार्ग में सड़क के किनारे पेराफीट का कलर कॉम्बिनेशन ये अहसास कराते हैं कि – आप आर्मी एरिया में हैं. देवदार, बांज बलूत और चीड के वृक्षों से घिरा ये क्षेत्र है रानीखेत का।

रानीखेत जिसे – क्वीन’स मीडो (queen’s meadow) भी कहते हैं – उत्तराखंड में अल्मोड़ा जिले का एक बहुत ही खुबसूरत हिल स्टेशन और छावनी क्षेत्र है।

रानीखेत अपनी प्राकर्तिक खूबसूरती, यहाँ से दिखने वाले विशाल हिमालय श्रंखला, यहाँ के मंदिरों, यहाँ स्थित गोल्फ कोर्स, और खुबसूरत खेतों के लिए सभी का मन जीत लेता है।

सुंदर घाटियां, चीड़ और देवदार के ऊंचे-ऊंचे पेड़, शहरी कोलाहल तथा प्रदूषण से दूर अद्भुत सौंदर्य आकर्षण का केन्द्र है। यहाँ, निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम से भवाली, खैरना होते हुए लगभग 80 किलोमीटर की दुरी तय कर पंहुचा जा सकता है।

तो चल पड़िए आप भी इस रानीखेत से भवाली के सफ़र में हमारे साथ डूबते उबरते रहिये अपने अहसासों और यादों के समुन्दर में।

नमस्कार viwers आपका स्वागत है तहे दिल से, popcorn trip की … इस विडियो में हम बात करेंगे यहाँ के कुछ इतिहास, कुछ वर्तमान, कुछ भूगोल, कुछ facts, कुछ सामान्य जानकारी के बारे में और साथ ही जानेंगे और देखेंगे रानीखेत से भवाली तक पड़ने वालें कुछ पहाड़ी कस्बो को, और साथ ही आनंद लेंगे ढेर सारी प्राकर्तिक खूबसूरती का।

अल्मोड़ा/ मझखाली या द्वाराहाट से आते हुए रानीखेत बाजार से पहले आपको इस जगह से दो मार्ग दीखते हैं, राईट हैण्ड साइड वाला रानीखेत मुख्य बाजार से होते हुए और लेफ्ट हैण्ड साइड वाला मार्ग मॉल रोड छावनी छेत्र से होते हुए चिलियानौला के समीप आपस में मिल जातें हैं, हमने ट्रैफिक congesstion से बचने के लिए left हैण्ड वाला मार्ग जो माल रोड होते हुए जाता है वो मार्ग चुना।

छावनी होने से रानीखेत का ये इलाका काफी साफ़ सुथरा, शांत और व्यवस्थित है. स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 के अनुसार रानीखेत दिल्ली और अल्मोड़ा छावनियों के बाद भारत की तीसरी सबसे स्वच्छ छावनी है।

ये यहाँ मॉल रोड स्थित पोस्ट ऑफिस, और military हॉस्पिटल. यहाँ की रिहायशी इलाका नीचे दाहिनी और की और मार्ग सदर बाजार और चिलियानौला के लिए है।

अपर माल रोड से जाने का चार्ज टैक्सी आदि के लिये १० रूपया और प्राइवेट वाहनों के लिये २० रूपया है अपर माल रोड से रानिखेत से यहाँ के दुरी 2.5 किलोमीटर और वाया चिल्यानौअला ६ किलोमीटर है
रानीखेत मॉल रोड स्थित छावनी छेत्र से आगे बढ़ ये मार्ग है रानीखेत – भवाली मोटर मार्ग
बायीं ओर पिलखोली स्थित घट घटेश्वरी मंदिर का प्रवेश द्वार
Ranikhet – se लगभग 11 किलोमीटर एक और चुंगी नाका, यहाँ पर हल्द्वानी से आने वाले वे वाहन जिन्हें मॉल रोड से होकर जाना है उन्हें छावनी परिसर में प्रवेश करने का शुल्क देना होता है . जो की वर्तमान में ३० रुपया है,

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रानीखेत का पिन कोड है – 263645
और STD कोड है 05966

sea लेवल से height – 6132 feet (1869 m) -Ranikhet
2,084 m (Nainital) & 1,642 m (Almora)

मनोरम पर्वतीय स्थल रानीखेत लगभग 25 वर्ग किलोमीटर में फैला है। कुमाऊं क्षेत्र में पड़ने वाले इस स्थान से लगभग 400 किलोमीटर लंबी हिमाच्छादित पर्वत-श्रृंखला का ज़्यादातर भाग दिखता हैं।
छावनी का यह शहर अपने पुराने मंदिरों के लिए मशहूर है।

कहा जाता है कि सैकड़ों वर्ष पहले कोई रानी अपनी यात्रा पर निकली हुई थीं। इस क्षेत्र से गुजरते समय वह यहां के प्राकृतिक सौंदर्य से मोहित होकर रात्रि-विश्राम के लिए रुकीं। बाद में उन्हें यह स्थान इतना अच्छा लगा कि उन्होंने यहीं पर अपना स्थायी निवास बना लिया। चूंकि तब इस स्थान पर छोटे-छोटे खेत थे, इसलिए इस स्थान का नाम ‘रानीखेत’ पड़ गया। दुनिया भर से हर साल लाखों की संख्या में सैलानी यहां मौज-मस्ती करने के लिए आते हैं।

क्योंकि रानीखेत कुमाऊं रेजिमेन्ट का मुख्यालय है, इसलिए यह पूरा क्षेत्र काफ़ी साफ-सुथरा रहता है। cant area होने के कारण यहाँ किसी भी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित है
रानीखेत – उपराडी – बजीना, बजोल, बम्स्युं, पातली, भुजान – खैरना

उपराडी में 4 व्हीलर्स को छावनी परिसद के लिए टोल टैक्स देना होता है,
साफ़ मौसम, गुनगुनी धुप के साथ हलकी सर्द हवाएं मौसम को सुहावना बना रही है
ये न ख़तम होने वाले रस्ते, रास्तो में कहते मुसाफिर, कौन कमबख्त चाहता है ये सफ़र ख़तम हो… इन रास्तो में चलते आपके साथ पेड़, नदी और ये पहाड़ियां… इसीलिए उत्तराखंड टूरिज्म के baseline है Simply Heaven
हाँ पर एस हेवन में यहाँ होना सिम्पल नहीं है ये amazing और अतुलनीय भी है
रानीखेत से खेरना 29 किलोमीटर

रानीखेत के आस पास के आकर्सन – हैडाखान आश्रम, चौबटिया apple गार्डन, दूनागिरी मंदिर, गोल्फ कोर्स, माल रोड, सोहनी बिनसर आदि हैं
और यहाँ के अधिकतर निर्माण अंग्रेजों के समय के हैं’. यहाँ कुछ वर्ष पूर्व रानी lake का निर्माण कराया गया,
रानीखेत शहर से अल्मोड़ा मार्ग में लगभग 5 किलोमीटर की दुरी पर चीड़ के घने जंगल के बीच विश्व प्रसिद्ध गोल्फ मैदान है। उसके पास ही कलिका में कालीदेवी का प्रसिद्ध मंदिर भी है। मजखाली, चौबटिया (10 km), चिलियानौला (6 किलोमीटर) स्थित हेडाखान बाबा का भव्य मंदिर खासतौर से देखने लायक है। खडी बजार, आशियाना पार्क जो की जंगल थीम पर बना आकर्सन का केंद्र है , आर्टिफीसियल रानी झील यहाँ के कुछ प्रमुख , आकर्सन है, बिनसर महादेव – भगवन शिव को समर्पित मंदिर बिनसर महादेव भी यहाँ से कुछ दुरी पर ताडीखेत होते हुए स्थित है।

रानीखेत देश से सभी प्रमुख स्थानों से सड़क मार्ग द्वारा कनेक्टेड है कुछ प्रमुख स्थानों जैसे दिल्ली, देहरादून, चंडीगढ़, आदि से दुरी आप स्क्रीन में देख सकते हैं
नजदीकी रैलवे स्टेशन काठगोदाम ८० किलोमीटर, हवाई अड्डा पंतनगर १३५ किलोमीटर पंतनगर में है. रानीखेत की दूरी नैनीताल से 63 किमी, अल्मोड़ा से 50 किमी, कौसानी से 85 किमी और काठगोदाम से 80 किमी हैं।

रानीखेत सदर बाजार,
रानीखेत के प्राकर्तिक सुन्दरता किसी का भी मन मोह लेती है

रानीखेत से भवाली मार्ग को कुमाओं के बेहतरीन मार्गो में कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी, मार्ग के एकंऔर पहाड़ी और दूसरी और ढलान, कभी कभी दिखती नदी, बीच में पड़ते छोटे छोटे गांव जहाँ स्ठित दुकाने, घर और आबादी आपका मन बरबस अपनी और आकर्षित कर लेती हैं,
अगर आप खुद राइड या ड्राइव कर रहें हो तो आपके लिए ये सुझाव है कि अपने वाहन की गति धीमी और नियंत्रित सीमा में ही रखे, क्युकी इन साफ़ हवाओं में साँसे लेना का मौका आपको बार बार नहीं मिलेगा, और ना ही मिलेगा इतना मनलुभावन दृश्यों से परिपूर्ण मार्ग
यहाँ इस मार्ग में आपको कई जगह कुछ दुरी के अन्तराल टी & स्नैक्स और meal के लिए दुकाने मिलती रहती हैं… पहाड़ी मार्गो के बात हे अपने में निराली है, यहाँ का साफ़ वातावरण और ताजगी लिए हवाओं की खुशबू के सामने इत्र की खुसबू कहीं नहीं ठहरती.
ये घुमावदार मोड जिंदगी का अहसास कराते हुए , जहाँ आपको पता नहीं होता अगले पल क्या मिलेगा ऐसे ही इन मोड़ो से गुजरते वक़्त आपको पता नहीं होता की आपको क्या दिखेगा,
एक शायर की मशहूर चंद पंक्तियाँ भी हैं
सफ़र आसान रखना हो तो सामान कम रखिये
जिंदगी आसां रखनी हो तो अरमान कम रखिये

इन रास्तो में आपको हिंदी सिनेमा के कई नए पुराने गीत याद आयेंगे
जैसे युही कट जायेगा सफ़र साथ चलने से, कि मंजिल आएगी नजर साथ चलने से

युही चला चल राही, यु ही चला चल

आगे दिख रहे बोर्ड के मुताबिक हल्द्वानी की दुरी है ७२ किलोमीटर, काठगोदाम 67, नैनीताल 45 और भीमताल है ४२ किलोमीटर की दुरी पर GOPR3301

और फिर से साफ़ सुथरी सड़क, सड़क के किनारे खड़े वाहनों से पता लग रहा है कि यहाँ पर भी कोई restaurnat होगा

अगर आपने कार/ बाइक रेसिंग गेमिंग कभी खेला या देखा हो तो ये सामने दिख रही सड़क, सड़क के किनारे लगे parafit और पहाड़िया आपको किसी रेसिंग गेम का ध्यान दिलाते हैं.

देखने को बहुत कुछ मिलेगा सड़क से चलते हुए कभी सड़क के किनारे दुकान, कभी कोई रिहायशी घर तो कभी ऐसा घर जहाँ लोग नहीं रहते बस उनकी यादें रहती हैं, वो चले गए किसी बेहतर जिंदगी की तलाश में या फिर छोड़ गए अपना आसियान किसी मज़बूरी के कारण वो एक कुछ और चंद पंक्तियाँ याद आ गयी
कोई युहीं क्यों बेवफा हुआ होगा,
कुछ तो बुरा उसे भी लगा होगा

खैर सफ़र है जिंदगी, चलती रहती है, ठहरती कहाँ है, मंजिल में hmmm
मंजिल भी तो बदलते रहती है, ठहराव को अच्छा नहीं समझा जाता

यहाँ पर का दिख रहा दृश्य अल्मोड़ा – खैरना मार्ग के दृश्य से मिलता जुलता है, वैसी ही घुमावदार सड़क, दाहिनी हाथ को नदी और पहाड़ी

कैंची धाम यहाँ से 27 किलोमीटर की दुरी पर रह गया है, खैरना ७ किलोमीटर और भुजान २ किलोमीटर
पहाड़ों में आपको इस तरह से ४ – ५ ट्रक से ज्यादा ट्रक खड़े दिखाई दे तो समाझ जाईयेगा की वहां आस पास कही जल श्रोत होगा, अक्सर ट्रक ड्राइवर्स अपने ट्रक की साफ़ सफाई हेतु ट्रक रात्रि को ऐसे स्थान में खड़ा करते हैं. और ट्रक खड़े होंगे तो संभवतया आस पास कोई ढाबा भी होगा ही

और भुजान ही वह जगह है जहाँ से बेतालघाट को मार्ग जाता है, जिसकी दुरी यहाँ से — किलोमीटर है

ये सामने सड़क जो बेतालघाट को,

अब खैरना पुल से हम गुजर रहे हैं, यहाँ से लेफ्ट हैण्ड को मार्ग अल्मोड़ा के लिए, राईट हैण्ड को मार्ग हल्द्वानी व नैनीताल के लिए… और यहाँ से खैरना भी शुरू हो जाता है… यहाँ भी काफी बड़ी बाजार है, जहाँ लगभग हर तरह का जरुरी सामान मिल जाता है
यहाँ भी एक पेट्रोल पंप मौजूद है
और खैरना से ही लगा हुआ गरम पानी बाजार, यहाँ लेफ्ट हैण्ड साइड को हनुमान जी के मंदिर से लगा हुआ एक प्राकर्तिक जल श्रोत है, जिससे वर्ष भर चौबीसों घंटे पीने का पानी बहता रहता है

और गरम पानी से कुछ ६ सात किलोमीटर की दुरी पर स्थित रातिघाट, यहाँ पर भी छोटी सी बाजार है

अब ये रातिघट से १० किलोमीटर बाद है कैची धाम, स्क्रीन में दिख रहे suggestion link और नीचे डिस्क्रिप्शन में दिए लिंक द्वारा कैंची मंदिर का दर्शन कर सकते हैं, इस मंदिर से जुडी जानकारी देते रोचक विडियो का लिंक आपको स्क्रीन के उप्परी हिस्से और नीचे discriptoin में मिल जाएगा.

यहाँ से विश्व प्रसिद्द कैंची धाम की दुरी लगभग 20 किलोमीटर, जहाँ विस्व्प्रसिद्द मेला व भंडारा बाबा नीब करौरी जी की याद में प्रतिवर्ष १५ जून को मनाया जाता है
कैंची धाम से लगभग ७ किलोमीटर की दुरी पर है आज के सफ़र की मंजिल भवाली, और भवाली से कुछ पहले ये स्थान है निगलाट

भवाली के सीमा शुरू हो चुकी है, ये राईट हैण्ड साइड को पेट्रोल पंप, और यहाँ की बाजार,
रोडवेज बस डिपो है दाहिनी हाथ की दिशा में, जहाँ से आपको हल्द्वानी, या नैनीताल जाने के लिए बसेस आदि मिल जाएँगी.
और ये भवाली तिराहा जहाँ से राईट हैण्ड साइड का मार्ग नैनीताल को जाता है और वाया ज्योलीकोट होते हुए आप हल्द्वानी काठगोदाम इस मार्ग से भी जा सकते हैं और
और आपने भीमताल, सातताल, नौकुचियाताल, घोडाखाल, मुक्तेश्वर, रामगढ आदि जाना हो तो लेफ्ट हैण्ड का मार्ग आपको choose करना होगा .. जिससे हम आगे बढ़ रहे हैं.
करीब डेढ़ दो सौ मीटर आगे से फिर एक तिराहा आएगा, जहाँ से लेफ्ट का मार्ग रामगढ, मुक्तेश्वर, धानाचूली आदि के लिए जाता है… और आप रामगढ से और आगे बढेंगे तो ये मार्ग भी क्वारब में मिलेगा जहां से भी आप अल्मोड़ा, कौसानी, बिनसर आदि को जा सकते हैं
और सीधे करीब १०० मीटर आगे बढ़ के ये U turn जहाँ से सीधा मार्ग घोडाखाल को और U Turn लेता हुआ मार्ग भीमताल, सातताल, नौकुचियाताल, काठगोदाम, हल्द्वानी को जाता है

राजेश खन्ना अभिनीत किशोर कुमार द्वारा गया एक और गाना है
जिंदगी के सफ़र में गुजर जाते हैं जो मुकाम वो फिर नहीं आते, फिर नहीं आते
तो जिंदगी का तो पता नहीं पर जब भी आपका दिल करे अपनी जिंदगी के मुकामों में वापस आने का तो आप इस चैनल में हमारे द्वारा बनाये गए अलग अलग स्थानों से जुड़े जानकारी देते वीडियोस देख के अपनी बीती यादों में जा सकते हैं

अपना और अपने आस पास के लोगो का ख्याल रखें
फिर मुलाकात होगी किसी और सफ़र में या किसी और जगह की जानकारी देते विडियो में, इसी उम्मीद के साथ आपसे विदा,

हल्द्वानी से 100 किमी दूर – डीजल/ पेट्रोल 15 रूपये सस्ता

नेपाल – भारत का निकटष्ठ पडोसी, सहयोगी और मित्र राष्ट्र रहा हैं, हज़ारो, लाखो की संख्या में भारतीय हवाई अथवा सड़क मार्गे से काठमांडू स्थित सुप्रसिद्ध पशुपति नाथ मंदिर दर्शन के साथ पोखरा और नेपाल की दूसरी जगहों में हर वर्ष घूमने जाते हैं।

सड़क मार्ग से नेपाल जाने का अनुभव, आवश्यक औपचारिकताएं, सावधानियां और नेपाल से जुडी कुछ रोचक बातें – यह जानेगे आज के वीडियो में। और इसी रोड ट्रिप पर एक लम्बा वीडियो भी बनाया है, उनके लिए जो रोड कंडीशन और रूट को ज्यादा अच्छे से देखना चाहते हैं,, लिंक इस वीडियो के अंत में अथवा डिस्क्रिप्शन में दिए वीडियो लिंक पर क्लिक देख सकते हैं.

वीडियो के इस पार्ट में है – कार से जाने पर – नेपाल में कैसे एंट्री ले सकते हैं – और अगले पार्ट्स में काठमांडू तक रोड ट्रिप, पशुपतिनाथ मंदिर, वहां ठहरने के स्थानों के बारे में. साथ में लेंगे पोखरा की रोड ट्रिप और कई उपयोगी और दूसरी जानकारिया।

हमारे देश की सीमा – नेपाल से कई स्थानों से जुडी हैं, काठमांडू तक हवाई मार्ग से भी से पंहुचा जा सकता हैं. नेपाल में इस यात्रा में हमने ने पाल में प्रवेश किया – बनबसा से, जो उत्तराखंड राज्य के चम्पावत जिले में स्थित हैं। हमने बनबसा से बॉर्डर क्रॉस नेपाल सीमा में प्रवेश किया।

अधिक जानने के लिए देखें वीडियो।

Amazing Dashara (dussehra) Festival, दुनिया का अनूठा दशहरा अल्मोड़ा का।

दुनिया के इस अनोखे दशहरा महोत्सव का आनंद लें.. Dashara (Dussehra) Almora, दशहरा अल्मोड़ा, wonderful festival of the world, Goddess Durga Idols, Effigies of Ravan Dynasty #Almora #Dussehra #Festival #Uttarakhand
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विभिन्न पर्यटक स्थलों और यात्राओं से जुडी की जानकारी। और ये जानकारी आपको सहायता करेगी इन स्थानों में जाने से पहले क्या तैयारियां की जाएँ, कैसे पंहुचा जाए, और वहां के मुख्य आकर्षण। इसलिए अलग अलग स्थानों से जुडी रोचक जानकारियों से अपडेट रहने हेतु हो सके तो PopcornTrip youtube चैनल subscribe करें। चैनल पर विजिट करने के लिए धन्यवाद।
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Omkareshwar Temple, Ukhimath | ओम्कारेश्वर मंदिर, उखीमठ

इस वर्ष में 9 नवंबर को केदारनाथ के कपाट बंद होने के बाद ओम्कारेश्वर मंदिर उखीमठ में भगवान श्री केदारनाथ और मद महेश्वर की पूजा होगी, यहाँ पुरे वर्ष भगवान श्री ओम्कारेश्वर की पूजा होती हैं।

उखीमठ भारत के उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित एक तीर्थ स्थल है। यह 1311 मीटर की ऊंचाई पर है और रुद्रप्रयाग से 41 किलोमीटर की दूरी पर है। सर्दियों के दौरान, केदारनाथ मंदिर और मध्यमहेश्वर से मूर्तियों (डोली) को उखीमठ रखा जाता है और छह माह तक उखीमठ में इनकी पूजा की जाती है। उषा (बाणासुर की बेटी) और अनिरुद्ध (भगवान कृष्ण के पौत्र) की शादी यहीं सम्पन की गयी थी। उषा के नाम से इस जगह का नाम उखीमठ पड़ा। सर्दियों के दौरान भगवान केदारनाथ की उत्सव डोली को इस जगह के लिए केदारनाथ से लाया जाता है। भगवान केदारनाथ की शीतकालीन पूजा और पूरे साल भगवान ओंकारेश्वर की पूजा यहीं की जाती है। यह मंदिर उखीमठ में स्थित है।
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i) https://youtu.be/oi68UwM5W8k (गोपेश्वर महादेव मंदिर)
ii) https://youtu.be/as0JQ0PoPLM (श्री केदारनाथ मंदिर)
iii) https://youtu.be/5w70xP_74-k (श्री बद्रीनाथ मंदिर)
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Ukhimath (also written Okhimath) is a small town and a Hindu pilgrimage site in Rudraprayag district, Uttarakhand, India. It is situated at an elevation of 1311 meters and at a distance of 41 km from Rudraprayag. During the winters, the idols from Kedarnath temple, and Madhyamaheshwar are brought to Ukhimath and worshipped here for six months. Ukhimath can be used as center destination for visiting different places located nearby, i.e. Madhmaheshwar (Second kedar), Tungnath (Third kedar) and Deoria Tal (a natural fresh water lake) and many other picturesque places. According to Hindu Mythology, Wedding of Usha (Daughter of Vanasur) and Anirudh (Grandson of Lord Krishna) was solemnized here. By name of Usha this place was named as Ushamath, now known as Ukhimath. King Mandhata penances Lord Shiva here. During winter the Utsav Doli of Lord Kedarnath is brought from Kedarnath to this place. Winter puja of Lord Kedarnath and year-round puja of Lord Omkareshwar is performed here. This temple is situated at Ukhimath which is at a distance of 41 km from Rudraprayag.

Ukhimath has many other ancient temples dedicated to several Gods and Goddesses such as Usha, Shiva, Aniruddha, Parvati, and Mandhata.[3] Situated on the road connecting Guptkashi with Gopeshwar, the holy town is mainly inhabited by the head priests of Kedarnath known as Rawals.

Ukhimath has an All India Radio Relay station known as Akashvani Ukhimath. It broadcasts on FM frequencies

विभिन्न पर्यटक स्थलों और यात्राओं से जुडी की जानकारी। और ये जानकारी आपको सहायता करेगी इन स्थानों में जाने से पहले क्या तैयारियां की जाएँ, कैसे पंहुचा जाए, और वहां के मुख्य आकर्षण। इसलिए अलग अलग स्थानों से जुडी रोचक जानकारियों से अपडेट रहने हेतु हो सके तो PopcornTrip youtube चैनल subscribe करें। चैनल पर विजिट करने के लिए धन्यवाद।
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Delicious Jalebiya Almora Ki

अल्मोड़ा अपनी प्राकर्तिक सुंदरता के साथ और भी कई बातों के लिए जाना जाता है

जिनमे से एक नाम आते ही – मुँह में मिठास घुल जाती हैं। वो हैं – अल्मोड़ा में कारखाना बाजार स्थित जलेबियो की मशहूर दुकान, इस दुकान की स्थापना कुछ तक़रीबन 70-80 साल पहले – स्वर्गीय किशन दत्त जोशी जी ने की थी, उनकी विरासत को आज उनके पुत्र आगे बढ़ा रहे हैं.

अल्मोड़ा मशहूर जलेबियों की यह दुकान, ब्रैंडिंग स्ट्रैटेजिस्ट के लिए शोध का विषय हो सकता हैं कि – दुकान के बाहर आज भी कोई बोर्ड नहीं हैं, कही कोई ब्रांडिंग नहीं हैं.

फिर भी जब जलेबियो का आनंद लेने का मन हो, तो अल्मोड़ा के स्थानीय निवासीयो को पहला ध्यान इसी दुकान का आता हैं. और यहाँ बैठकर दूध या दही के साथ जलेबियाँ लेने पर तो इसका जायका और भी बढ़ जाता हैं।

हर उम्र के लोग आनंद लेते गरमागरम जलेबियो का, यहाँ नज़र आते हैं, दिलचस्प बात यह हैं कि – यहाँ आप जिन जलेबियों का स्वाद लेंगे – उन्हें अपने सामने बनते हुए देख सकते हैं, दिन भर यहाँ स्वादिष्ट जलेबियाँ बनती रहती हैं – और हाथो हाथ बिक जाती हैं.

इस वीडियो को देखते हुए आया आपके में मुहं में पानी, तो आइये अल्मोड़ा और लीजिये खूबसूरत वादियों का आनंद साथ में माउथ मेल्टिंग जलेबिया,

आपको जलेबियाँ पसंद हों या वीडियो अच्छा लगा हो तो, लाइक का बटन दबायें – कमेंट कर बताएं आपके अनुभव, और अपने मित्रो को परिचित कराएं – अल्मोड़ा की एक डेलिकेसी से|