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कटारमल सूर्य मंदिर, अल्मोड़ा

Katarmal Sun Temple
Katarmal Sun Temple

कटारमल सूर्य मंदिर, भारत के उत्तरी राज्य उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से लगभग 16 किलोमीटर की दुरी अल्मोड़ा रानीखेत मार्ग पर एक ऊँची पहाड़ी पर बसे गाँव अधेली सुनार में स्थित है।

कटारमल सूर्य मंदिर कुमांऊॅं के विशालतम ऊँचे मन्दिरों में से एक है।  पूरब की ओर रुख वाला यह मंदिर कुमाऊं क्षेत्र का सबसे बड़ा और सबसे ऊंचा मंदिर है।

हिन्दू धर्म की यही खासियत हैं कि इसमे प्रकृति के हर रूप को पूजा जाता है, चाहे वो जल हो, अग्नि हो, वायु हो, अन्न हो, भूमि हो या फिर सूर्य, तो इन्ही में से एक सूर्य को समर्पित विभिन्न मंदिर भारत के कई राज्यों में हैं – जैसे उड़ीसा स्थित कोणार्क सूर्य मंदिर के अलावा मध्य प्रदेश, गुजरात, कश्मीर, बिहार, असम, तमिलनाडु, राजस्थान आदि सहित उत्तराखंड राज्य स्थित कटारमल सूर्य मंदिर प्रमुख हैं।

आज आप जानेंगे, उत्तराखंड स्थित इस कटारमल सूर्य मंदिर के बारे में सम्पूर्ण जानकारी। नमस्कार आपका स्वागत है पॉपकॉर्न ट्रिप में।

इस मंदिर का सामने वाला हिस्सा पूर्व की ओर है। इसका निर्माण इस प्रकार करवाया गया है कि सूर्य की पहली किरण मंदिर में रखे शिवलिंग पर पड़ती है।

अल्मोड़ा रानीखेत मार्ग में कोसी से लगभग ४ किलोमीटर की दुरी पर कटारमल सूर्य मंदिर के लिए ३ किलोमीटर का एक अलग मार्ग जाता है। एक और हलकी पहाड़ी और नीचे की और रेलिंग लगी है। इस मार्ग से चलते हुए आपको कटारमल गाँव और आस पास के ग्रामीण क्षेत्रों जैसे कोसी, हवालबाग आदि गाँव का दृश्य दिखाई देता है। साथ ही मार्ग में आपको पारंपरिक शैली से बने हुए पहाड़ी घर भी दिखते हैं, और ऐसे ही खुबसूरत दृश्यों को देखते हुए आप कब मंदिर के समीप पहुच जाते हैं, पता ही नहीं चलता।

लगभग 9वी से 11वी शताब्दी के मध्य, कत्युरी शासन काल में बने इस सूर्य मंदिर के बारे में मान्यता है कि, इसका निर्माण एक रात में कराया गया था। कत्युरी शासक कटारमल देव द्वारा इस मंदिर का निर्माण हुआ। इस मंदिर का मुख्य भवन का शिखर खंडित है, जिसके पीछे ये कारण बताया जाटा है कि मंदिर निर्माण के अंतिम चरण में सूर्योदय होने लगा था, जिससे मंदिर का निर्माण कार्य रोक दिया गया, और ये हिस्सा अधुरा ही रह गया, जिसे आज भी देखा जा सकता है। हालाँकि एक अन्य मान्यता के अनुसार परवर्ती काल में रखरखाव आदि के अभाव में मुख्य मन्दिर के बुर्ज का कुछ भाग ढह गया।

देखिए video

How to Reach कैसे पहुचे!

कटारमल मंदिर के नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम यहाँ से लगभग 105 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। नजदीकी हवाई अड्डा पंतनगर 135 किलोमीटर की दुरी पर है। जिला मुख्यालय अल्मोड़ा से लगभग 16 किलोमीटर, रानीखेत से 30 किलोमीटर, कौसानी से 42 किलोमीटर है।

कटारमल मंदिर के सबसे नजदीक का क़स्बा मंदिर से लगभग 4.5 किलोमीटर की दुरी पर कोसी है, और पैदल मार्ग द्वारा लगभग २ किलोमीटर की दुरी पर है।

Where to stay रात्रि विश्राम के लिए नजदीक स्थल कोसी में रात्रि विश्राम के लिये आपको होटल मिल जायेंगे, जिसकी दुरी यहाँ से लगभग 5 किलोमीटर है। इसके अतिरिक्त अल्मोड़ा, रानीखेत, कौसानी आदि में भी आप ठहर सकते हैं।

Nearby attractions – आस पास के पर्यटक आकर्षण के केंद्र चितई गोलू देवता मंदिर, कसार देवी मंदिर, जागेश्वर धाम, रानीखेत, कौसानी (इन स्थानों पर बने वीडियो भी आप youtube.com/popcornTrip पर देख सकते हैं।), कोसी नदी आदि हैं। यहाँ आप कोसी से ट्रैकिंग कर के भी पँहुच सकते हैं और उसी दिन वापसी भी कर सकते हैं।

 

खटीमा : भारत और नेपाल की सीमा के निकट बसा उत्तराखंड का नगर

Khatima
Khatima City

उत्तराखण्ड स्थित खटीमा, कुमाऊँ मण्डल के उधमसिंहनगर जनपद में स्थित एक नगर है। समुद्र तल से 653 फीट (199 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित, यह स्थान भारत-नेपाल सीमा के निकट है। खटीमा नगर, राज्य के अन्य भागों से भली भांति, सड़क और रेलमार्गों से जुड़ा है। यह दिल्ली से 8 घण्टे, नैनीताल से 4 घंटा एवं हल्द्वानी से 3 घंटे की दूरी पर स्थित है।

खटीमा उत्तराखंड निर्माण की मांग करते हुए 1994 में शहीद हुए आंदोलनकारियों की भूमि के रूप मे भी जाना जाता है। यहाँ की बाज़ार मे सीमावर्ती राज्य नेपाल के भी लोग खरीददारी करने आते है।

खटीमा क्षेत्र में पर्यटको को आकर्षित और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी ने उत्तराखंड के पहले मगरमच्छों के पार्क का लोकार्पण किया। यहाँ 150 से अधिक क्रोकोडाइल हैं। 01 दिसम्बर 2021 से यहाँ crocodile पार्क आरंभ हुआ। यहाँ आगुन्तुक जान सकेंगे कि मगरमच्छ कैसे रहते हैं, कैसे तैरते हैं, कैसे खाते हैं, कैसे सोते हैं, कैसे अपने भोजन के लिए शिकार करते हैं।

खटीमा कैसे पहुंचे!
खटीमा से निकटतम हवाईअड्डा पंतनगर है। खटीमा के आसपास, पर्यटकों के भ्रमण के लिए अनेक स्थानों में से कुछ – नानकमत्ता साहिब, पूर्णागिरि मंदिर और अंतर्राष्ट्रीय नेपाल सीमा से सटा हुआ बनबसा और नेपाल स्थित महेन्द्रनगर हैं (इन स्थानों की जानकारी देते वीडियो आप Popcorn Trip Youtube चैनल में देख सकते हैं)। खटीमा से उत्तराखंड राज्य की राजधानी देहरादून व अन्य प्रमुख नगर जैसे हरिद्वार, दिल्ली आदि के लिए टूरिस्ट बसों का भी संचालन भी होता। देखिए खटीमा की जानकारी देता विडीयो

Shimla Travel Guide

Shimla Himanchal Pradesh

शिमला की मॉल रोड की सैर करने, जो शिमला का सबसे बड़ा आकर्षण है। चमकदार रोशनी से सजी मॉल रोड, सजी हुई दुकाने, शोरूम, रैस्टौरेंट, bakery और साथ में जगमगाते ब्रिटिश टाइम के भवन जिनमे से कहीं पोस्ट ऑफिस, किसी में municipal भवन, पर्यटन सूचना केंद्र है।

मॉल रोड में घूमना बेहद रिफ्रेशिंग एहसास देता है। मॉल रोड में अति आवश्यक सेवाओं के अतिरिक्त सभी वाहनों का चलना प्रतिबंधित है। इसलिए पैदल सैर करने का आनंद और भी बड़ जाता है। मॉल रोड में कहीं किनारे लगी हिमांचली कल्चर दिखाती पेंटिंग और mural आर्ट, कहीं पानी की आवाज़ और फाउंटेन से गिरता पानी आकर्षित करता है। शाम के समय इनमे लगी रोशनिया वातावरण को और भी खुशनुमा रूप देते है। और शिमला में आने का सबसे खूबसूरत वजह यही लगती है।

मॉल रोड में है मध्य में यह स्थान – scandal पॉइंट – जहां से मॉल रोड का एक हिस्सा ऊपर की ओर रिज की तरफ जाता है। और मॉल रोड का  दूसरा हिस्सा कुछ आगे जाकर शिमला के लोअर बाज़ार, लिफ्ट और दूसरे हिस्सों को मॉल रोड जोड़ता है। हालांकि इस सड़क से थोड़ा आगे सीढ़ियों से ऊपर चद्कर पुनः रिज में पंहुच सकते है।

रिज की ओर चलते चलते जानते है – scandal पॉइंट का यह विचित्र नाम क्यों पड़ा। scandal पॉइंट से कुछ ही कदमों की दूरी पर है – दी रिज शिमला की मॉल रोड का सबसे ऊंचा पॉइंट। यहाँ ब्रिटिश टाइम का एक चर्च है। यहाँ शिमला का समर फस्टिवल के साथ समय समय पर कई एवेंट्स और concert होते है। यहाँ दर्शकों के बैठने के लिए भी स्थान है। तस्वीरें और सेलफ़ी लवर्स के लिए पूरी की पूरी मॉल रोड आकर्षक background का काम करती है। रिज भी सेलफ़ी लवर्स के लिए खास है। यहाँ से शिमला के आस पास की पहाड़ियाँ भी देखी जा सकती है। सुनसेट का भी आनंद लिया जा सकता है।

रिज में घुड़सवारी करने का भी आनंद ले सकते है। फूड और शॉपिंग लवर्स के लिए भी शिमला जन्नत है ही।  

शिमला शहर के मॉल रोड के निकटवर्ती कुछ आकर्षण इस map में स्पॉट सकते है।  कई स्थान scandal पॉइंट और रिज तो मॉल रोड का ही हिस्सा है, इसके अलावा जाखू मंदिर, हाइ कोर्ट, विधान सभा आदि। शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तो पहुँचना हो तो उसके लिए है सर्क्युलर रोड और शिमला शहर के बाहर – बाहर निकल जाना हो तो इसके लिए है – शिमला बाइपास रोड।

इसके साथ ही शिमला इस तरह से बसा है कि – ऊंची नीची सभी जगहों तक सब रोड्स है, जो अगल अलग जगहों को कनैक्ट करती है – शिमला की सड़कों से अपरिचित लोगों को उनमे ड्राइव करने में परेशानी हो सकती है। कई जगह वन वन वे है – कई जगह सड़क ढलान अथवा चड़ाई लिए बेहद संकरी। इसलिए अच्छा यह रहता है कि – अपने वाहन को पार्किंग में रख – एक जगह से दूसरी जगह पनहुचने के लिए स्थानीय टॅक्सी का उपयोग किया है।

अगले दिन किसी दूसरे होटल में रूम लेना चाहते थे तो सुबह victory tunnel के होटल से चेक आउट कर पैदल पहुचे – ओल्ड बस स्टॉप, जिस होटल में हम रुके थे वहाँ से यह 5 से 10 मिनट की वॉकिंग डिस्टन्स पर था। यहाँ वाहनों की पार्किंग भी है और कई होटेल्स भी है। लेकिन हमें यहाँ न  कोई वाहन पार्क करना था, ना ही किसी होटल में रूम लेना था,  यहाँ OLD बस स्टॉप के क्लॉक रूम में अपना समान रखना चाहते थे। वैसे रात्री विश्राम के लिए रूम हमने शिमला शहर से कुछ दूर बूक करा लिया था, जहां शाम को चेक इन करने वाले थे।

ओल्ड बस स्टॉप से बस द्वारा पँहुचे लिफ्ट के पास, यहाँ से मॉल रोड तक लिफ्ट से पंहुच सकते है। जो शिमला की मॉल रोड के एक किनारे रिज के नीचे की माल रोड में मिलती है।

मॉल रोड मे घूमने बाद टॅक्सी से जाखू मंदिर जो कि – शिमला की ऊंची पहाड़ी पर है। जहां चर्च के पीछे से जाती सड़क से 2-3 किमी का ट्रेक कर भी पंहुच सकते है। रिज में चर्च से पीछे की ओर जाती सड़क से कुछ 100-150 मिटर दूर से रोपेवे सुविधा भी है। 

जाखू मंदिर के बाद हम पँहुचे – संकटमोचन मंदिर जो शिमला से लगभग 7 किलोमीटर दूर, ISBT बस स्टॉप से लगभग 4.5 किलोमीटर है। 

देखें video:

शिमला में बजट होटेल्स के रूम्स 800-900 से शुरू हो जाते है, जो शायद इंटरनेट पर सर्च कर न मिलें, और प्रीमियम होटल 15-20 हज़ार या उससे ऊपर भी जाते है। जो पर्यटक सीज़न में डिमांड के अनुसार जिनके रेंट कम या ज्यादा हो सकते है। कुछ होटेल्स हिमांचल टूरिज्म की वेबसाइट में देखें जा सकते है। 

शिमला के होटेल्स देखने के लिए क्लिक करें।(Thrid Party वेबसाइट)

शिमला – कुफ़री हिमांचल प्रदेश में पर्वतों की रानी।

Shimla Himanchal Pradesh

एक ऐसी जगह के बारे में जानकरी मिले, जहां वर्ष भर आपको ठंड का अहसास मिले, जहां के नाम पर आपके किचन में बनने वाली सब्ज़ी का नाम पड़ा हो, शिमला मिर्च का यह नाम क्यों पड़ा यह video में आगे जाएँगे।   जहां आज़ादी से पूर्व ब्रिटिशर्स इसलिए रहना पसंद करते थे क्यूँकि इस स्थान का मौसम उनके अपने देश इंग्लैंड के मौसम से मिलता जुलता था। PopcornTrip चैनल में  ऐसी ही ढेरों ख़ासियतों/ विशेषताओं को अपने में समेटे आज आप जानेंगे उत्तर भारत के सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशनस में से एक हिमांचल प्रदेश की राजधानी शिमला को।

देखें वीडियो:

शिमला नगर ज़िला मुख्यालय होने के साथ साथ प्रदेश का सबसे बड़ा नगर है। देवदार, चीड़, बाँज और बुरांश के पेड़ों से घिरा शिमला, भारत के सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में से एक है शिमला

शिमला का नाम देवी श्‍यामला के नाम पर रखा गया है जो माँ काली का अवतार है।

भारत देश के उत्तरी राज्यों में से एक राज्य हिमांचल प्रदेश की राजधानी, शिमला एक बेहद आकर्षक और प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है। समुद्र तल से 2,276 मीटर (7,467 feet) की ऊँचाई पर देश की राजधानी दिल्ली से लगभग 350 किलोमीटर, चंडीगढ़ से 109 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

सन् 1864 से 1947 में भारत की स्वतंत्रता तक, यह भारत में ब्रिटिश राज की ग्रीष्मकालीन राजधानी था। ब्रिटीशर्स को भारत मे रहने के लिए ऐसी जगह पसंद थी, और ठंडी हो और प्राकृतिक सुंदरता से आच्छादित हो।  विडीओ के आरम्भ में हमने शिमला मिर्च का ज़िक्र किया था, Capsicum को Britishers ब्रिटेन से भारत लाए थे, उसे उन्होंने देश मे सबसे पहले इसे शिमला मे उगाया, और फिर यहाँ से देश के विभिन्न हिस्सों पहुँची। इसलिए वो शिमला मिर्च के नाम से मशहूर हुई।

शिमला में आज भी ब्रिटिश काल के कई स्मृति चिन्ह दिख जाते हैं, जैसे यहाँ के निर्माण, रास्ते, शिमला तक रेलवे लाइन और कुछ पुराने भवन।

शिमला से 12 किलॉमेटर की दूरी पर है कुफ़री। कुफ़री जाना जाता हैं यहाँ होने वाली बर्फ़बारी के लिए, यहाँ की खेती के लिए, यहाँ स्थित जू के लिए, यहाँ होते कई विभिन्न adventure activities के लिए। यहाँ का जू मंगलवार को बंद रहता है। और विस्तार से जानने को देखें वीडियो।

 

गंगोलीहाट माँ हाट कालिका मंदिर : नवरात्र विशेष

Maal Haat Kalika temple

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले में गंगोलीहाट में माँ कालिका का मंदिर, देवदार के खूबसूरत वृक्षों से घिरा है। इस सुविख्यात मंदिर में स्थानीय लोगो के अलावा दूर- दूर से शृदालू  माँ काली के दर्शन को आते हैं, और मनोकामनाओं की सिद्धि के साथ यहाँ आध्यात्मिक शांति पाते हैं। 

नवरात्रियों में माँ हाट कालिका के मंदिर में श्रद्धालुओं का बड़ी संख्या में आगमन, मंदिर के दिव्य वातावरण को और भी उल्लसित करता है और आगंतुकों को ऊर्जा से सरोबोर कर देता है।

माँ हाट कालिका मंदिर-, उत्तराखंड मे पिथोरगढ़ जिले मे, जिला मुख्यालय से 57 किलोमीटर दूर  गंगोलीहाट नाम के खूबसूरत पहाड़ी नगर मे हैं। गंगोलिहाट की बाज़ार बहुत बड़ी नहीं हैं, यहाँ थोड़ी सी दूरी मे बस स्टॉप, टॅक्सी स्टैंड है।

ठहरने के लिए KMVN के टुरिस्ट रेस्ट हाउस सहित –  कुछ होटेल्स, lodges है।  मंदिर के अलग से रोड ढलान की ओर जाती हैं, इस जगह नाम गंगोलीहाट पड़ने का कारण और यहाँ का संक्षित इतिहास इस तरह हैं। 

सरयू गंगा तथा राम गंगा नदियों के मध्य स्थित होने के कारण इस क्षेत्र को पूर्वकाल में गंगावली कहा जाता था, जो धीरे धीरे बदलकर गंगोली हो गया। तेरहवीं शताब्दी से पहले इस क्षेत्र पर कत्यूरी राजवंश का शासन था। गंगोलीहाट इस गंगोली क्षेत्र का प्रमुख व्यापारिक केंद्र था, बाज़ार को जिसे स्थानीय बोली मे हाट कहते हैं। गंगोली के साथ साथ हाट –  जुड़कर इस क्षेत्र को नाम मिला गंगोलीहाट। 

तेरहवीं शताब्दी के बाद यहाँ मनकोटी राजाओं का शासन रहा, जिनकी राजधानी मनकोट में थी। सोलहवीं शताब्दी में कुमाऊँ के राजा बालो कल्याण चन्द ने मनकोट पर आक्रमण कर गंगोली क्षेत्र पर अधिकार कर लिया। 

गंगोलीहाट की मुख्य सड़क से आधे से एक किलोमीटर की दूरी पर  रोड के बाद सड़क के किनारे वहाँ पार्क किए जा सकते हैं,यहाँ पर कई दुकाने हैं, जहां से मंदिर के लिए प्रसाद पुष्प आदि खरीदे जा सकते हैं। 

यहाँ से कुछ सीढ़िया उतर मंदिर तक पहुचा जा सकता हैं। पैदल मार्ग का एक बड़ा में टिन की चादरों से कवर्ड हैं और हाट कालिका मंदिर घिरा है, देवदार के छायादार और घने वृक्षों से। 

हजारों वर्ष पूर्व आदि गुरू शंकराचार्य बद्रीनाथ, केदारनाथ होते हुए, यहां पर आए तो उन्हें आभास हुआ कि यहां पर कोई शक्ति है, यहाँ मां ने कन्या के रूप में दर्शन दिया और कहाँ की उन्हे ज्वाला रूप से शांत रूप में ले आओ।  तब इस जगह माँ हाट कालिका – शक्तिपीठ की स्थापना इस जगह आदि गुरु शंकरायचार्य जी द्वारा हुई।

यह माना जाता है कि कोलकाता में माँ काली मंदिर मे विराजित महाकाली का ही शक्ति रूप  गंगोलिहाट मैं  हाट कालिका मंदिर में vidhyaman है,  गंगोलीहाट में स्थित हाट कालिका का मंदिर पुरे भारत के साथ-साथ भारतीय सेना बलों के बीच में भी प्रसिद्ध है|

मंदिर के मुख्य पुजारी, रावल परिवार से हैं, यहाँ के पुरोहित  पंत जी से मंदिर के बारे मे कुछ जानकरियाँ ली। 

भारतीय सेना के कुमाऊं रेजीमेंट के हाट कालिका से जुड़ाव के बारे में एक दिलचस्प कहानी है। “द्वितीय विश्वयुद्ध (1939-1945) के समय एक बार भारतीय सेना का जहाज डूबने लगा। तब सैन्य अधिकारियों ने जवानों से अपने-अपने ईश्वर को याद करने का कहा, कुमाऊं के सैनिकों ने जैसे ही हाट काली का जयकारा लगाया वैसे ही जहाज किनारे आ गया।” तभी से कुमाऊं रेजीमेंट ने मां काली को आराध्य देवी के रूप मे मानता हैं।जब भी कुमाऊं रेजीमेंट के जवान युद्ध के लिए जाते हैं तो काली मां के दर्शन के बिना नहीं जाते हैं। हर वर्ष माघ माह में यहां पर सैनिकों और अधिकारी बड़ी संख्या मे दर्शन के लिए आते हैं, यहाँ बने कई धर्मशाले, मंदिर और रास्ते के  निर्माण मे स्थानीय लोगों, श्रीडालुओं के साथ भारतीय सेना से जुड़े लोगो का भी योगदान हैं। 

गंगोलिहाट से करीब 24 किलोमीटर दूर विश्व विख्यात पाताल भुवनेश्वर गुफा हैं, यहाँ कुछ अन्य गुफाये भी देखी जा सकती हैं – जिनमे हैं – शैलेश्वर गुफा “मुक्तेश्वर गुफा” भी प्रसिद्ध हैं और कुछ समय पूर्व जानकारी मे आई  गुफा – भोलेश्वर गुफा।  

गंगोलिहाट के समीपवर्ती  दर्शनीय स्थलों मे चौकोडी, पिथोरागढ़ , बेरीनाग, धौलछीना, जागेश्वर आदि हैं, कुछ दर्शनीय स्थलों  की  दूरी स्क्रीन मे देखी जा सकती हैं। 

गंगोलिहाट से नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर 162 किलोमीटर और काठगोदाम रेलवे 190 किलोमीटर हैं। नजदीकी  नैनी सैनी एयरपोर्ट पिथोरागढ़  84 किमी और पंतनगर हवाई अड्डा 223 किलोमीटर हैं। 

दिल्ली, देहारादून, लखनऊ और दूसरे बड़े शहरो से फिलहाल को सीधी बस सर्विस नहीं हैं,  यहाँ से गगोलिहाट आने के लिए  पहले हल्द्वानी पहुचना होगा, से 197 किलोमीटर दूर हैं, पहाड़ी मार्ग होने के कारण इस दूरी को तय करने मे 6 से 7 घंटे लगते हैं।

हल्द्वानी से रोडवेज़ की एक बस शेराघाट, गंगोलीहाट होते हुए पिथौरागढ़ तक जाती हैं, हल्द्वानी से गंगोलिहाट के लिए कुछ प्राइवेट बस सर्विस और shared टॅक्सी भी मिल जाती हैं। 

मंदिर के दर्शन करने और जानने के लिए देखें वीडियो:

GoPro Hero 11 कैमरा लॉंच, कितना बेहतर है यह Hero 10 से।

GoPro Hero 11 and GoPro Hero 10

ऐपल आइफ़ोन की तरह गो प्रो भी हर वर्ष Hero कैमरा के नए अवतार निकलता है। और कैमरा पसंद करने वाले इसका इंतज़ार करते है।  इसी क्रम में 15 सितम्बर 2022 को GoPro Hero 11 लॉंच हो गया है। और भारत में भी यह बिक्री के लिए उपलब्ध है। इसका मूल्य लिंक में देख सकते है।

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अगर आप भी ट्रैवल करना पसंद करते है और साथ में video भी बनाते हैं, तो GoPro 11, निश्चित ही एक हल्का, छोटा और फ़ीचर से भरा कैमरा है, जो video बनाने के कई उद्देश्य पूर्ण करता है। आइए देखें कुछ मुख्य अंतर गो प्रो 10 और 11 के।

मूल्य का अंतर देखें तो गो प्रो 10 और 11 के मूल्य में Amazon इंडिया पोर्टल में लगभग रु 5000/- का अंतर है। GoPro द्वारा Hero 11, Hero 10 की तुलना में कई छोटे छोटे नए फ़ीचर जोड़े गए है।

सबसे बड़ा अंतर है – सेंसर साइज़ का, GoPro Hero 11 में GoPro Hero 10 से बड़ा सेन्सर साइज़ है, जिससे फ़ील्ड ओफ़ व्यू 16% बड़ा हुआ मिलता है। जिससे ज़्यादा अच्छे रेज़लूशन में। स्टिल फ़ोटो लेने के लिए ज़्यादा मेगपिक्सल मिल गए है, जहां गो प्रो हीरो 10 से 23 MP तस्वीरें ली जा सकती थी, वहीं गो प्रो हीरो 11 से 27.13 MP फ़ोटो ले सकते है। video के लिए अभी भी 5.3K रेज़लूशन है, लेकिन बड़े सेन्सर साइज़ के कारण ज़्यादा अच्छी क्वालिटी मिलती है।

Hero GoPro 11 Vs 10

हाइपर व्यू बढ़ गया है। गो प्रो 10 men 16:09 के अनुपात में रिकॉर्डिंग करते थे, अब 8:7 के रेशीयो में भी कर सकते है।

हाइपर स्मूथ, गो प्रो 10 Hyper smooth 5.0 के साथ आता है, इसके पूर्व वर्ती वर्ज़न में हाइपर स्मूथ 4.0 था, जिससे रिकॉर्डिंग अधिक स्मूथ और स्थिर हो जाती है। जो चलते/ दौड़ते/ ऐक्शन में अत्यंत उपयोगी है।

GoPro 11 में Horizon लॉक का भी विकल्प है, जो इस कैमरा को और प्रभावशाली बनाता है। जिससे 360 डिग्री घुमाने के बाद भी footage सीधी रहती है।

Gorpo 11 में अपने पिछले वर्ज़न की तुलना में तीन नए Timelaps प्रीसेट जुड़ गए है, जो है, लाइट पेंटिंग, (चलती रोशनी में ब्रश स्टोक का प्रभाव पैदा करता है)। अगला इफ़ेक्ट व्हीकल लाइट ट्रेल्स टाइम लैप्स है जो आगे चलती गाड़ियों की लाइट्स की रोशनी पकड़ने के लिए है। तीसरा टाइम लैप्स प्रीसेट है – स्टार ट्रेल्स, जो रात के आकाश में तारों की रोशनी कैप्चर करने के लिए बना है।

अच्छी बैटरी लाइफ़, GoPro Hero 11, GoPro Hero 10 की तुलना में 38% अधिक रिकॉर्डिंग टाइम बड़ा देता है। हालाँकि बैटरी साइज़ अभी भी Hero 10 के बराबर है 1750 MAH।

GoPro में नए और अनुभवी यूज़र के अनुसार दो नए मोड है। Easy और Pro मोड। जिससे यूज़र अपनी सुविधानुसार गो प्रो को आसानी से चला सकें।

क्या गो प्रो हीरो 10 से 11 में upgrade करना चाहिए? यह सवाल इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितना ट्रैवल करते है और video आपके लिए महत्वपूर्ण है। GoPro के नए कैमरा में कोई बड़े परिवर्तन देखने नहीं मिलते लेकिन कई छोटे – छोटे सुधार किए गए है। अगर कभी कभी हाई video बनाते है, और GoPro 10 की पर्फ़ॉर्मन्स से संतुष्ट है –  तो अभी Hero 10 से upgrade करने आवश्यकता नहीं। लेकिन हमेशा अपने को update रखते हो या लम्बे समय से इस वर्ज़न का इंतज़ार कर रहे तो, नया वर्ज़न आपके लिए आ ही चुका है। देर किस बात की। नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें और ऑर्डर करें।

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पहाड़ों की यात्रा में नहीं होगी मुश्किल, अगर ये प्रो टिप्स जान लें तो।

Pro Tips to Make Hill Drive Easier

बाइक से आयें या कार से,  पहाड़ी रोड पर घुमावदार मोड़ों से सफर करते हुए अक्सर लोग परेशान हो जाते हैं – तब यह 10 टिप्स यकीनन आपके ट्रैवल अनुभव को बदल देंगी, और आप पर्वतीय क्षेत्रों बार बार आना चाहेंगे।

पहाड़ी रास्तों में चलते हुए वाहन में, कोई पुस्तक पढ़ने, मोबाइल अथवा लैपटॉप के स्क्रीन में देखने से बचें, क्योंकि मोशन के विपरीत किसी भी चीज पर ध्यान देने कई सर  दर्द, चक्कर  आने, मितली  आने  जैसी  कई  परेशानियां हो सकती है, जितना संभव हो अपने सामने की ओर देखें, और सामने देखने का मन ना हो तो आंख बंदकर रिलैक्स हो सकते हैं।

कपड़ों का चयन क्रेते हुए ध्यान रखें – सर्दियों में डेनिम की जगह, कॉर्डरॉय क्लोधिंग ठंड रोकने के लिए अधिकार कारगर है, साथ ही मौसम के अनुसार कपड़ों रखें, पहाड़ी डेस्टिनेशन  में जितने हाई एल्टीट्यूड में जाएंगे, ठंड उतनी ही ज्यादा होगी।

पहाड़ों में सफर करते हुए कान ढ़क कर रखें क्योंकि यहां बहती ठंडी हवाओं में नमी भी होती है कान में जाने से परेशानी हो सकती है।

पहाड़ी घुमावदर रोड्स में एक दिन में डेढ़ ज़्यादा से ज़्यादा डेढ़ सौ से  दो सौ किलोमीटर तक ही यात्रा करें, तेज़ी से मौसम बदलने से परेशानी हो सकती है, आसपास के नजारों का आनंद लेते हुए धीरे-धीरे चलें और ठहरते हुए आगे बढ़े।

पहाड़ी सड़कों पर दिन में ही ड्राइव करें, शाम होने से पहले कहीं रुक जाएं रात में होटल मिलने में परेशानी होगी, क्योंकि पहाड़ों में ज्यादातर जगहों पर स्थानीय बाजार शाम को जल्दी बंद हो जाती है। पहाड़ों में आते हुए अपने वाहन में पर्याप्त ईधन रखें, क्योंकि पेट्रोल पंप के मध्य कई जगह बहुत दूरी है।

घर से बाहर भोजन कुछ अलग स्वाद का मिलता है, इसलिए बाहर का फ़ूड लेते हुए, आप सामान्यतः जितना लेते हैं उसका आधा यह दो तिहाई ही लें, जिससे अगर वो अनुकूल न भी हो, तो भी पाचन में अधिक दिक्कत नहीं होगी। सलाद  की मात्रा बढ़ा  लें।

पहाड़ों में घूमते समय ज्यादा ऊर्जा की आवश्यकता होती है, ज्यादा पसीना बहता है, जिससे डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी हो सकती है, इससे बचने के लिए अपने साथ एनर्जी ड्रिंक्स अथवा इलेक्ट्रोल रखें, और नियमित अंतराल पर लेते रहें।

पहाड़ों में गूगल मैप को ऑफलाइन डाउनलोड करके रखें, क्योंकि इंटरनेट कनेक्टिविटी हर जगह नहीं है, किसी दुविधा की स्थिति में स्थानीय लोगों से भी जानकारी ले लें, कई जगह नए रास्ते बन रहे हैं, और कई मार्ग बंद हो चुके है।

मोड़ों पर कभी भी overtake करने की कोशिश ना करें, भले ही कितनी ही जल्दी में आप हो, कभी मोड़ो पर अचानक से कोई अनचाहा ऑब्जेक्ट जैसे कोई वन्य प्राणी या पहाड़ी से गिरकर आया कोई पत्थर/ मलबा हो सकता है, साथ ही पहाड़ी सड़कों पर अपने वाहन को तय गति सीमा में ही रखें, पहाड़ी सड़के तेज रफ्तार वाहनों के लिए नहीं बनी है

अगर यात्रा मैं आपका बजट कम हो या कुछ नया करना चाहते हैं, तो किसी किसी छोटी, कम जानी पहचने स्थान में रात्रि विश्राम कर सकते हैं, हो सकता है –  इन जगहों पर इंटरनेट कनेक्टिविटी अथवा कुछ दूसरी सुविधाएं ना मिले।

उम्मीद है यह कुछ बातें आपके पहाड़ों में सफर के अनुभव को और भी बेहतर बनाए रखने में आपकी सहायता करेंगी शेयर करें आपके मित्रों के साथ जो पहाड़ों की यात्रा में निकलने वाले हैं।

देखें video :

चंडीगढ़, सिटी ब्यूटीफुल

Chandigarh PopcornTrip

Chandigarh –  The city beautiful.  न सिर्फ भारत की सबसे खूबसूरत प्लैन्ड सिटी है, बल्कि दुनिया के कुछ सबसे खूबसूरत शहरों में गिना जाता है।

शहर के नाम पढ़ा यहाँ के मंदिर में माँ चंडीदेवी के नाम से। वैसे चंडीगढ़ का इतिहास बहुत पुराना माना जाता है – 8000 वर्ष पूर्व हड़प्पाकाल से, तब के मानवों के यहाँ रहने के वैज्ञानिक प्रमाण मिलते है।

लेकिन हम जिस चंडीगढ़ की सैर करेंगे, उसे भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू,  जो यूरोप के तत्कालीन आर्किटेक्चर से प्रभावित थे, और भारत की आजादी मिलने के बाद दुनिया को बताना चाहते थे कि – भारतीय शहर भी आधुनिक हो सकते है। इसी क्रम मे चंडीगढ़ को डिजाइनर सिटी बनाने के लिए फ़्रांस के प्रसिद्ध वास्तुकार और डिजाइनर ले कूरबुसीअर की सेवाये ली, 1960 में वर्तमान चंडीगढ़ की नीव पड़ी।

आज भी चंडीगढ़ क नए समय की जरूरतों और नई चुनौतियों के साथ चंडीगढ़  खूबसूरती को नया आयाम देने के लिए नई चीजें जुड़ती रहती है।

देश के दो राज्यों पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ के केंद्र शासित प्रदेश हैं, चंडीगढ़ के निकट माँ चण्डिका देवी का मंदिर है, और उन्हीं के नाम से शहर को यह नाम मिला।

चंडीगढ़ को डिज़ाइन करते हुए सेक्टरस मे बांटा गया। चंडीगढ़ के सेक्टर १, जो चंडीगढ़ का शीर्ष भाग यानि हेड माना जाता है में है, सबसे अधिक greenery है यहाँ वाइल्ड लाइफ़ का आनंद भी लिया जा सकता हैं।

कैपिटल कॉम्प्लेक्स में चंडीगढ़ के स्प्रिट के प्रतीक – Open hand monument, – जो इस भावना के साथ बना है कि – देने के लिए और लेने के सदैव तैयार।

कैपिटल कॉम्प्लेक्स में – मेटल का बना ओपन हैंड 14 मीटर ऊंचा और 50 टन वजन का है। जमीन से इसकी ऊंचाई 25 मीटर है। यह हाथ के साथ, हवा की दिशा के साथ घूमता रहता है।

कैपिटल कॉम्प्लेक्स को यूनेस्को द्वारा घोषित विश्व धरोहर स्थलों में एक हैं। यहाँ Le Corbusier के अद्भुत वास्तु शिल्प को देखा जा सकता है। यहाँ तीन मुख्य भवन है। जो आमने सामने हैं।

  1. विधान सभा – यहाँ एक ही भवन के दो हिस्सों में पंजाब और हरियाणा की विधानसभा चलती है।
  2. यहाँ दोनों राज्यों के सचिवालय भवन हैं।
  3. उच्च न्यायालय में उच्च न्यायालय संग्रहालय है।

रॉक गार्डन 

चण्डीगढ़ का रॉक गार्डन 35 एकड़ में फैला है, यहाँ विभिन्न कलाकृतियाँ देखी जा सकती है।  दिलचस्प बात यह है – कि इसे पूरी तरह से घरेलू कचरे और अन्य औद्योगिक वस्तुओं के कचरे से बनाया गया है।

  1. यहाँ दिख रही मूर्तियों का निर्माण चूड़ियों, चीनी मिट्टी के बर्तनों, टाइलों, बोतलों और बिजली के कचरे जैसी वस्तुओं का उपयोग करके किया गया है। यहाँ गार्डन लैंडस्केप, वास्तुकला, मूर्तिकला और पौराणिक कथाओं का मिश्रण है। रॉक गार्डन के स्थापना  नेक चन्द जी ने 1957 में अपने खाली समय में गुप्त रूप से, इस गार्डन का निर्माण शुरू किया था। गार्डन की संरचना लॉस्ट किंगडम की कल्पना पर आधारित है। इसमें प्रांगण की तरह 14 अलग-अलग कक्ष हैं। तीज पर्व में रॉक गार्डन उत्सव का रूप धारण कर लेता है और यह पर्यटकों के लिए एक विशेष आकर्षण रखता है।

सुखना लेक

सुखना झील एक 3 वर्ग किमी की वर्षा आधारित कृत्रिम झील है, जिसे 1958 में शिवालिक पहाड़ियों से नीचे आने वाली मौसमी धारा सुखना चो को रोककर बनाया गया था।  शीत काल के समय सूखना झील कई विदेशी प्रवासी पक्षियों जैसे – साइबेरियाई बत्तख, सारस के लिए एक अभयारण्य है। सुखना झील, एशिया में चापू वाली नौका विहार और नौकायन कार्यक्रमों के लिए सबसे लंबी वाहिका/चैनल है।

रोज़ गार्डन

रोज़ गार्डन या जाकिर रोज़ गार्डन का नाम पूर्व राष्ट्रपति जाकिर हुसैन के नाम पर रखा गया है, इस सुंदर गार्डन को 1967 में तैयार किया गया था। यह पार्क 10 acer में फ़ैला हैं और यहाँ गुलाब के पुष्प की 1600 से अधिक प्रजातियाँ के साथ ३२५०० से अधिक पेड़ों और औषधिक पौधे हैं। जिनमे से कई दुर्लभ प्रजातियाँ हैं। यहाँ विज़िटर्ज़ के लिए जॉगिंग ट्रेक भी है। इस पार्क में फ़ुरसत के समय बैठ कर अच्छा वक्त बिताया जा सकता है।

चंडीगढ़ बर्ड पार्क को चंडीगढ़ फॉरेस्ट के देख रेख में, सुखना झील के समीप वन्य क्षेत्र में पक्षी संसार से परिचित होने तथा इनके संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए विकसित किया है। 16 नवंबर, 2021 को चंडीगढ़ बर्ड पार्क का उद्घाटन किया गया।

बर्ड पार्क

पक्षियों और विजिटर्स के बीच मे कोई दीवार या जाल नहीं हैं – इसलिए एकदम सामने से पक्षियों को देखने का अनुभव अद्भुत हैं। यहाँ पंछियों को उड़ान के साथ जमीन मे विचरण के लिए इस तरह से स्थान उपलब्ध कराया गया हैं कि – विजिटर्स के आने के बाद भी उन्हें पर्याप्त निजी स्थान मिले। ऐसा माना जाता है कि यह संरचना पक्षियों के पार्क के रूप में देश की सबसे ऊंची संरचना हैं।

इस पार्क के मुख्य आकर्षण अफ्रीकी लव बर्ड्स, बुडगेरिगर, व्हाइट स्वान, ब्लैक स्वान, वुड डक, गोल्डन तीतर, येलो गोल्डन तीतर, ग्रीन विंग मैकॉ, डन कॉनर्स, अफ्रीकी ग्रे तोता, फिंच और मेलानिस्टिक तीतर हैं।  चंडीगढ़ बर्ड पार्क में जलीय, स्थलीय और टैमड सहित विभिन्न विदेशी पक्षी प्रजातियां हैं।

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सैक्टर 17

सैक्टर 17 या शहर के केन्द्र की वजह से केन्द्रीय स्थान और वाणिज्यिक केन्द्र होने के अपने महत्त्वपूर्ण कार्य से, ल कार्बूज़िये द्वारा नगर के दिल के रूप में माना जाता था। नगर के केन्द्र में 240 एकड़ के क्षेत्र को अधिकृत करता, एक केन्द्रीय चौक या पियाज़ा है जो किसी भी वाहन यातायात से मुक्त है जो आदर्श रूप से सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों और अन्य उत्सव मण्डलों के लिए अनुकूल है जो भारतीय जीवन पद्धति के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। शहरी केन्द्र शहर का महान बाहरी शहरी स्थान है और पूरे परिवार के लिए खरीदारी, भोजन और मनोरञ्जन के लिए कई विकल्प प्रदान करता है। ई कार्ट को हाल ही में आगन्तुकों की आसानी के लिए जोड़ा गया है।

चंडीगढ़ के कुछ होटेल्स/ गेस्ट हाउस

पिथौरागढ़ घूमें!

पिथौरागढ़ pithoragarh uttarakhand

पिथौरागढ़ उत्तराखण्ड का एक ऐसा जनपद हैं  – जहां वह सब है, जिनका होना किसी स्वर्ग जैसे स्थान की कल्पना करने के लिए आवश्यक है। हिमालय के ऊंचे शिखर, glaciers से निकलती नदियां, हरियाली का मनमोहक रूप, खुले मैदान, योग, ध्यान, चिंतन के लिए उपयुक्त स्थान, और यहाँ के लोगों का शांत जीवन। यह सब अपने मूल रूप मे रहे – इसके लिए प्रकृति ने पिथौरागढ़ को ऐसे बनाया है कि, जो प्रकृति से विशेष अनुराग रखते हो, वही यहाँ तक पँहुच सकें। एक ओर हिमालय के ऊंचे शिखर, पड़ोसी देश तिब्बत जो वर्तमान मे पड़ोसी देश चीन का अधिकार क्षेत्र मे है – के साथ पिथौरागढ़ की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं को कठोरता से निर्धारित करती है। वहीं हमारे पड़ोसी देश नेपाल और भारतीय सीमा के बीच मे बहती काली नदी और इसके ऊपर बने सेतु – भारत – नेपाल आवागमन को सरल बना दोनों पड़ोसी राष्ट्रों को करीब लाती है। 

पाताल भुवनेश्वर, हाट कालिका गंगोलिहाट, चौकोडी, डीडीहाट, थल, बेरीनाग, मुनस्यारी, जौलजीबी, धारचुला, तवाघाट , झुलाघाट  जैसे अनेकों सुंदर स्थान पिथौरागढ़ जिले में ही हैं। प्रसिद्ध मिलम ग्लेशियर, रालम ग्लेशियर, नंदा देवी बैसकैम्प, लिपुलेख, पंचाचूली सहित अनेकों साहसिक ट्रेक पिथौरागढ़ जिले से ही किए जाते है। 

विश्व प्रसिद्ध और हिंदुओं के पवित्र तीर्थ – कैलाश मानसरोवर झील के ट्रेक के लिए पिथौरागढ़ जनपद के विभिन्न स्थलों से हो तिब्बत के लिए मार्ग है। काली नदी, धौली गंगा नदी, राम गंगा जैसी प्रसिद्ध नदियां पिथौरागढ़ जिले से ही होकर बहती हैं।

देखें वीडियो:

Accommodation (Private)

Hotel Sangam Dharchula Road, Siltham, Pithoragarh, +91 94121 65425, www.hotelsangampithoragarh.com/

Hotel Meghna Simalgair Bazaar, Pithoragarh +91 84396 03909

Yash Yatharth Hotel, Naya Bazar, Pithoragarh

Hotel Manar Link Road, Pithoragarh

Satkar Hotel and Restaurant, Kailashpuri, Bhatkot, +91-95682 25727

Hotel Jyonar Palace, Nagar Palika Chowk, Simalgair Bazar Road, 05964 223 118

Hotel Mall Palace, Roadways Tiraha, Pithoragarh, + 91 98979 65025

Gunjyal Madhur Residency, Chandak, Pithoragarh

आपका होटेल/ रिज़ॉर्ट/ गेस्ट हाउस/ होम स्टे पिथौरागढ़ में है और इस पेज में लिस्ट करना चाहते हैं अथवा अपनी लिस्टिंग अपडेट करना चाहते हों, तो इस पोस्ट में कॉमेंट करें अथवा हमें ईमेल करें।

पिथौरागढ़ पर्यटक आवास (अतिथि गृह) https://kmvn.in/

  1. केएमवीएन टीआरएच पिथौरागढ़
  2. केएमवीएन टीआरसी डीडीहाट
  3. केएमवीएन टीआरसी चौकोरी
  4. केएमवीएन टीआरसी विर्थी
  5. केएमवीएन टीआरसी पटल भुवनेश्वर
  6. केएमवीएन टीआरसी गंगोलीहाट
  7. केएमवीएन टीआरसी मुनस्यारी
  8. केएमवीएन टीआरसी धारचूला
  9. केएमवीएन टीआरसी नारायण आश्रम
  10. पीडब्ल्यूडी निरीक्षण गृह पिथौरागढ़
  11. पीडब्ल्यूडी निरीक्षण गृह डीडीहाट
  12. पीडब्ल्यूडी निरीक्षण गृह बेरीनाग
  13. पीडब्ल्यूडी निरीक्षण गृह गंगोलीहाट
  14. पीडब्ल्यूडी निरीक्षण गृह धारचूला
  15. पीडब्ल्यूडी निरीक्षण गृहमुनस्यारी
  16. वन विश्राम गृह पिथौरागढ़

शिमला से चंडीगढ़ टैक्सी रु 1200/ में

Shimla to Chandigarh Taxi

अपनी पिछली यात्रा में शिमला से चंडीगढ़ लौटने के लिए बस अथवा टैक्सी से लौटने का ऑप्शन था। कुछ वजहों से हमारे पास सामान अधिक था, तो बस से यात्रा करना असुविधाजनक था, इसलिए टैक्सी हायर की। इस 110 किलोमीटर की दूरी के लिए टैक्सी रु 2500 से रु0 4000 में मिल रही थी।

तब हमने सर्च किया bla bla वेबसाईट/ एप में, जिस समय हमें लौटना था उसके आस-पास हमें, एक कार मिल रही थी। जिसमे प्रति सीट का किराया रु0 300/ दिख रहा था, हमने सभी चार सीटस बुक कर ली, जिससे यात्रा सुविधाजनक हो पाए।

जिनको जानकारी नहीं है इस वेबसाईट की – उनके लिए – bla bla एक कार pooling एप/ वेबसाईट है, इसमे कोई individual या टैक्सी चालक कहीं जा रहे हो, तो अपनी यात्रा की लागत कम करने के लिए, एप मे अपनी जर्नी लिस्ट कर देते है। और उसी दिशा मे किसी और को भी जाना हो तो कार ड्राइवर के द्वारा लिस्ट किया हुआ मूल्य अप्रूव कर बुक करवा सकते हैं, (ध्यान रखें advance मे कुछ भी पेमेंट न दें, अपनी यात्रा पूरी होने के बाद ही भुगतान करें)

कार/ टैक्सी किसी अन्य सवारी के साथ शेयर न करना चाहे तो – उपलब्धता के अनुसार सभी seats बुक कर आराम से अपनी मंजिल पर पँहुच सकते है। जो कि सामान्य टैक्सी बुक कराने की तुलना मे बहुत कम होता है।

सब चीज परफेक्ट और फूलप्रूफ तो होती नहीं, bla bla मे लिस्टेड कार हमेशा आपको तय कार्यक्रम के अनुसार उपलब्ध हो जाएगी, ऐसा भी नहीं है।

हम इस एप के माध्यम से बुकिंग कराने के बाद बताए गए पिक अप पॉइंट पर पँहुचे, और कुछ देर बाद सफेद रंग की स्विफ्ट Dzire कार पहुची, जो एक टैक्सी थी, किसी सवारी को लेकर चंडीगढ़ से शिमला ड्रॉप करने आई थी, और अब उसे वापस लौटना था, चुकि – टैक्सी ड्राइवर दोनों ओर का किराया, बुकिंग कराने वाले से पहले ही वसूल लेते है, तो उसके लिए वापसी मे लौटते हुए कम कीमत मे सवारी बैठा कर अतिरिक्त लाभ कमाने का मौका होता है।

टैक्सी के अलावा कई निजी वाहन स्वामी भी इस एप मे अपने वाहन के route को डेट और टाइम के साथ लिस्ट कर लेते है, जिससे उन्हे यात्रा मे हमसफर भी मिल जाते है, और यात्रा का व्यय भी कम हो जाता है।

हम टैक्सी मे बैठे कुछ ही मिनट हुए थे, तभी ड्राइवर का मोबाइल बजा – बातचीत से मालूम हुआ कि किसी और ने भी हमारी तरह इस एप के माध्यम से इसी टैक्सी मे अपनी बुकिंग कराई थी, ड्राइवर ने काल पर बहाना बनाते हुए दूसरे यात्री को कहाँ कि “वह रास्ते मे कहीं जाम पर फंसा है और समय पर नहीं पहुच पाएगा” हमें बुकिंग कराने वाले दूसरे यात्री के लिए बुरा लगा कि – उसे टैक्सी नहीं मिल पायी।

लेकिन ड्राइवर को इस सब से कोई सरोकार नहीं था, उसने अपनी ओर से सफाई देते बताया कि कई बार लोग बुकिंग कराने के बाद तय जगह पर तय समय पर नहीं पहुचते, तो वह दो मोबाईल से लिस्टिंग कर, दो अलग -2 बुकिंग ले लेता है। और जो पहले मिल जाए या जिससे अच्छी डील मिल जाए उसे अपने साथ ले जाता है, और और दूसरी बुकिंग को ऐसे ही छोड़ देता है।

इस तरह आप जब भी इस एप के माध्यम से बुकिंग कराएं, ड्राइवर से तय करवा लें कि वो लेने ही आएगा। और अगर फिर भी अंतिम समय मे न आए तो, किसी अन्य माध्यम से भी यात्रा के लिए भी तैयार रहें। #popcorntrip

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