उत्तराखंड मे नैनीताल जिले मे प्रसिद्ध हिल स्टेशन –  मुक्तेश्वर के निकट – एक गाँव – सूपी किरोड़ गाँव में, यह एक लेस traveled बेहद खूबसूरत destination है। हम यहाँ एक होम स्टे मे रुके थे।

गाँव के आस पास घूमने के साथ हमने  – गाँव से दिखने वाली पहाड़ी की एक चोटी मे स्थित थकुड़ शिव मंदिर तक ट्रेक किया। यहाँ से और भी कई जगह के ट्रेक किया जा सकते है। 

शहर मे रहते हुए हम, जिन चीजों के ख्वाब भर देख सकते है – जैसे शुद्ध ऑक्सीज़न, प्रकृतिक स्रोत से मिलता स्वच्छ जल, खेतो मे उगी ताजी ओरगनिक सब्जियाँ, फल और साथ मे गाय के दूध से बने उत्पाद, वो यहाँ प्रचुरता से उपलब्ध हैं।

आस पास के जंगल मे सेकड़ों प्रजातियों के वृक्ष और पौधे देखे, जिनमे से कई औषधीय महत्व के थे। बॉटनी के स्टूडेंट्स को अपने विषय को Practically समझने के लिए इसे उपयुक्त स्थान कह सकते है। बर्ड और नेचर फोटोग्रापरस के केमरे की बेटरीयां यहाँ जल्दी – जल्दी drain होंगी।

यह है – कई सौ वर्ष पुराने सबसे बुजुर्ग साथ ही सबसे ऊँचे और मजबूत वृक्ष – ग्रामवासी श्रद्धा पूर्वक वृक्ष देवता कहते है।

हिम शृंखलाओं को गाँव के ऊपरी हिस्से अथवा – ऊपर जंगल की ओर चढ़ते हुए देखा जा सकता है।

विभिन्न प्रजातियों के पंछियों, तितलियों की कई प्रजातियाँ हमें – बिलकुल पास से गुजरती और अपने आस पास के बगीचों मे देखने को मिली। हर मौसम कम या ज्यादा दिखती है।

ताज़ी ओरगनिक सब्जियाँ, उसी समय तोड़ी जाती है, का स्वाद ही अलग होता है, जिसकी तुलना मंडी से खरीद कर लायी गयी सब्जियों से नहीं हो सकती।

एक दिन हमने गाँव से थकुड़ महादेव के मंदिर के लिए ट्रेक किया, जो लगभग 4-5 किलोमीटर का है, ट्रेक मे कहीं हल्की चढ़ाई कही सिदेह रास्ते और कहीं तीव्र चढाई है।

रास्ते मे कुछ आकर्षक बुगयाल यानि घास के मैदान मिलते है, ऊपर जैसे जंगल को जाते है – हिमालय की और अधिक चोटियाँ नज़र आने लगती है।

सुबह जल्दी निकल/ नाश्ता/ लंच पेक कर – एक पूरा दिन यहाँ बिताने के लिए अच्छा है,

मंदिर के लिए इस गाँव से जाने वाला ट्रेक्किग रूट घने जंगलो से होकर गुजरता है, जंगल मे बांज, चीड़, बुरास, देवदार, काफल, उतीश सहित कई सभी प्रजाति के पहाड़ी क्षेत्रों मे होने वाले वृक्ष और पौधे दिखाई देते है, जिनमे से कई का औषधीय महत्व भी है। जंगल इतना सघन है कि रास्ते मे कई जगह धूप जमीन तक नहीं पहुचती और कई जगह छन कर धूप हम तक पहुचती।

रास्ते मे नमी के कारण कई जगह काई जमी थी, जिससे कहीं – कहीं रास्ते फिसलन भरे थे, जिनमे बहुत धीमे और पैर जमा जमा कर रखने की जरूरत होती है।

देखें किरोड़ गाँव और थकुड़ महादेव मंदिर और पहाड़ी का ट्रेक –

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