कैंची धाम, बाबा नीम करोली महाराज का आश्रम

उत्तराखंड में नैनीताल जिले में कैंची नाम की जगह में हैं बाबा नीम करोली महाराज का कैंची धाम आश्रम, नैनीताल से 20 किलोमीटर दूर नैनीताल-अलमोड़ा रोड़ पर समुद्र तल से 1400 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। बाबा नीम करोली आश्रम में हर वर्ष लाखो श्रृदालु आते हैं, और बाबा जी का आशीर्वाद पाते हैं बाबा सशरीर अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन ईश्वरीय अवतार थे, ईश्वर कभी मरते नहीं, उनकी करुणा, दया और आशीर्वाद अब भी शृदालुओ पर बरसता हैं, बाबा नीम करोली महाराज हनुमान जी के अवतार कहे जाते हैं। क्षिप्रा नाम की छोटी पहाड़ी नदी के किनारे सन् 1962 में कैंचीधाम की स्थापना हुई। यहां दो घुमावदार मोड़ है जो कि कैंची के आकार के हैं इसलिए इसे कैंचीधाम आश्रम कहते हैं। कैंची मंदिर परिसर रोड से लगा हैं, मंदिर के निकट सड़क के किनारे गाड़ियों के खड़े करने के लिए पार्किंग हैं, एकदम व्यस्त सीजन न हो तो आमतौर पर गाड़िया पार्क करने के लिए जगह मिल जाती हैं। मंदिर और आश्रम परिसर में श्रृदालु शीतकाल में नवंबर से मार्च तक सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक और शेष वर्ष सुबह 6 से सायं 7 बजे तक किये जा सकते हैं।

कैंची मंदिर और आश्रम, नैनीताल से 23 किलोमीटर दूर नैनीताल-अलमोड़ा रोड़ पर भवाली के समीप समुद्र तल से 1400 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। देश की राजधानी दिल्ली से 321 किलोमीटर, उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से 343 किलोमीटर और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से कैंची की दुरी 390 किलोमीटर हैं। यह आश्रम बाबा नीम करोली महाराज को समर्पित हैं … कैंची धाम आश्रम, नैनीताल से 23 किलोमीटर दूर नैनीताल-अलमोड़ा रोड़ पर भवाली के समीप समुद्र तल से 1400 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। कैंची मंदिर का परिसर रोड से लगा हैं, कुछ सीढिया उतर कर मंदिर और आश्रम तक पंहुचा जा सकता हैं। मंदिर के निकट सड़क के किनारे गाड़ियों के खड़े करने के लिए पार्किंग हैं,। एकदम व्यस्त सीजन न हो तो आमतौर पर गाड़िया पार्क करने के लिए जगह मिल जाती है। महाराजजी की शाश्वत शिक्षा और अंतहीन लीलाओं के कारण, हिंदू, मुसलमान, सिख, जैन, ईसाई, यहूदी और यहाँ तक की नास्तिक भी उनकी ओर आकर्षित हुए। भारत के पूर्व राष्ट्रपति वी.वी.गिरी, गोपाल स्वरूप पाठक, जस्टिस वासुदेव मुखर्जी, जुगल किशोर बिड़ला, जैसे सुविख्यात महत्त्वपूर्ण लोग और अनगिनत दूसरे लोग उनके प्रति आकर्षित हे। स्टीब जॉब्स, मार्क ज़करबर्ग, जूलिया रॉबर्ट्स सहित कई पश्चिमी लोग महाराजजी के भक्त रहें हैं।

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