Travel story
हल्द्वानी से टनकपुर: तराई के बाजारों और जंगलों के बीच

admin · 2022-03-16
हल्द्वानी से टनकपुर जाते हुए कुमाऊँ का तराई वाला रूप सामने आता है। खेत, जंगल और कस्बों के व्यस्त बाजार इस सफर की पहचान हैं। हमारी यात्रा गौला पार से चोरगलिया, सितारगंज और खटीमा होते हुए आगे बढ़ी।
गौला पार और चोरगलिया
गौला पुल पार करते ही शहर की घनी आबादी पीछे छूटती है। गौला पार में खेतों के बीच नए निर्माण और खेल परिसर दिखाई देते हैं। नवाड़खेड़ा के आसपास काठगोदाम की ओर निकलने वाला रास्ता अलग है; टनकपुर के लिए चोरगलिया की दिशा में बढ़ते हैं।
चोरगलिया के नाम की अलग-अलग स्थानीय व्याख्याएँ सुनने को मिलती हैं। कस्बे के आसपास नंधौर के जंगल हैं। जंगल घूमना हो तो प्रवेश द्वार, अनुमति और भ्रमण की उपलब्ध व्यवस्था अलग से पता करें; मुख्य सड़क से गुजरना वन भ्रमण की अनुमति नहीं है।
सितारगंज और नानकमत्ता
सितारगंज पहुँचते हुए औद्योगिक क्षेत्र, व्यापार और कृषि की गतिविधियाँ बढ़ती दिखती हैं। बाजार में वाहनों के साथ पैदल लोगों की आवाजाही भी रहती है। मुख्य मार्ग से नानकमत्ता के लिए अलग मोड़ आता है। गुरुद्वारे के दर्शन का कार्यक्रम हो तो आने-जाने और परिसर में बिताने का समय जोड़ें।
प्रतापपुर और झनकट के आसपास धान की खेती तथा चावल से जुड़े कारोबार दिखाई देते हैं। बीच-बीच में दुकानों के पास सड़क संकरी और व्यस्त हो जाती है।
खटीमा से बनबसा
खटीमा एक बड़ा बाजार और परिवहन का पड़ाव है। उत्तराखंड राज्य आंदोलन, विशेषकर 1994 की घटनाओं, के कारण भी इसका महत्व है। आसपास वनखंडी महादेव और मगरमच्छ संरक्षण से जुड़ा स्थल यात्रा के अतिरिक्त पड़ाव हो सकते हैं; उनके प्रवेश और रास्ते की जानकारी लेकर जाएँ।
बनबसा भारत-नेपाल सीमा के करीब है। शारदा नदी और सीमा की ओर का मार्ग इस कस्बे की पहचान से जुड़ा है। नेपाल जाने की योजना सामान्य सड़क यात्रा से अलग रखें और सीमा पर लागू पहचान-पत्र तथा वाहन संबंधी नियम जान लें।
टनकपुर में प्रवेश
टनकपुर में बस और रेल संपर्क, बाजार तथा ठहरने की जगहें मिलती हैं। पूर्णागिरि जाने वाले यात्रियों के लिए यह प्रमुख आधार है। ककराली की ओर नंधौर क्षेत्र का प्रवेश भी पड़ता है। आगे चंपावत या श्यामलाताल जाना हो तो पहाड़ी यात्रा के लिए अलग समय रखें।
मैदान की सीधी सड़क होने पर भी बाजारों, पैदल यात्रियों और जंगल वाले हिस्सों में गति नियंत्रित रखना जरूरी है। इस सफर का आनंद तभी है जब केवल मंजिल की जल्दी में रास्ते के बदलते रंग न छूट जाएँ।
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