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गंगोलीहाट का हाट कालिका मंदिर: देवदारों के बीच आस्था

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admin · 2022-09-27
पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट में माँ हाट कालिका मंदिर देवदार के घने वृक्षों के बीच स्थित है। स्थानीय लोगों के साथ दूर से आए श्रद्धालु भी यहाँ दर्शन करते हैं। नवरात्र में मंदिर का वातावरण विशेष रूप से जीवंत हो जाता है।
गंगोलीहाट और मंदिर का रास्ता
कस्बे का बाजार बहुत बड़ा नहीं है। बस और टैक्सी का पड़ाव पास-पास मिलता है। मुख्य सड़क से मंदिर की ओर अलग रास्ता ढलान में जाता है। वाहन खड़ा करने के बाद कुछ सीढ़ियाँ उतरकर परिसर पहुँचते हैं। रास्ते के कुछ हिस्से हमारी यात्रा में ढके हुए थे और प्रसाद की दुकानें भी थीं।
नाम और इतिहास
सरयू और रामगंगा के बीच के क्षेत्र के लिए ‘गंगावली’ और फिर ‘गंगोली’ नाम प्रचलित होने की व्याख्या मिलती है। स्थानीय बाजार के अर्थ में ‘हाट’ जुड़ने से गंगोलीहाट नाम माना जाता है। इस क्षेत्र का इतिहास कत्यूरी, मनकोटी और चंद शासकों से जुड़ता है।
मंदिर की मान्यताएँ
एक धार्मिक कथा मंदिर की स्थापना को आदि शंकराचार्य से जोड़ती है। उसमें देवी के उग्र रूप से शांत रूप में प्रतिष्ठित होने का प्रसंग है। स्थानीय श्रद्धालु हाट कालिका को महाकाली का स्वरूप मानते हैं।
हमने मंदिर के पुरोहित से इन परंपराओं के बारे में जाना। कुमाऊँ रेजीमेंट के साथ मंदिर का गहरा भावनात्मक संबंध भी बताया गया। एक प्रचलित कथा में संकट में फँसे सैनिकों द्वारा देवी का स्मरण करने और सुरक्षित पहुँचने का वर्णन है। यह सैनिकों और स्थानीय समाज की आस्था का प्रसंग है।
मंदिर, धर्मशालाओं और रास्तों की व्यवस्था में स्थानीय लोगों तथा सेना से जुड़े श्रद्धालुओं के योगदान का उल्लेख भी मिला।
ठहरना और आगे की यात्रा
गंगोलीहाट में केएमवीएन आवास तथा अन्य होटल और लॉज के विकल्प पूछे जा सकते हैं। नवरात्र या विशेष आयोजन में पहले व्यवस्था करें।
पाताल भुवनेश्वर को अलग यात्रा के रूप में जोड़ा जा सकता है। आसपास की अन्य गुफाओं के बारे में स्थानीय जानकारी लें; हर गुफा पर्यटकों के लिए खुली या व्यवस्थित हो, यह आवश्यक नहीं।
हल्द्वानी, टनकपुर या पिथौरागढ़ की दिशा से सड़क यात्रा की योजना बनाई जा सकती है। पुराने वीडियो में बस और साझा टैक्सी के कुछ विकल्प बताए गए थे; वर्तमान प्रस्थान और समय की पुष्टि करें। नीचे दिए वीडियो में मंदिर और कस्बे का पूरा परिचय है।
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