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गंगोलीहाट माँ हाट कालिका मंदिर : नवरात्र विशेष

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admin · 2022-09-27

Uttarakhand के पिथौरागढ़ ज़िले में गंगोलीहाट में माँ कालिका का मंदिर, देवदार के खूबसूरत वृक्षों से घिरा है। इस सुविख्यात मंदिर में स्थानीय लोगो के अलावा दूर- दूर से शृदालू  माँ काली के दर्शन को आते हैं, और मनोकामनाओं की सिद्धि के साथ यहाँ आध्यात्मिक शांति पाते हैं। 

नवरात्रियों में माँ हाट कालिका के मंदिर में श्रद्धालुओं का बड़ी संख्या में आगमन, मंदिर के दिव्य वातावरण को और भी उल्लसित करता है और आगंतुकों को ऊर्जा से सरोबोर कर देता है।

माँ हाट कालिका मंदिर-, Uttarakhand मे पिथोरगढ़ जिले मे, जिला मुख्यालय से 57 किलोमीटर दूर  गंगोलीहाट नाम के खूबसूरत पहाड़ी नगर मे हैं। गंगोलिहाट की बाज़ार बहुत बड़ी नहीं हैं, यहाँ थोड़ी सी दूरी मे बस स्टॉप, टॅक्सी स्टैंड है।

ठहरने के लिए KMVN के टुरिस्ट रेस्ट हाउस सहित -  कुछ होटेल्स, lodges है।  मंदिर के अलग से रोड ढलान की ओर जाती हैं, इस जगह नाम गंगोलीहाट पड़ने का कारण और यहाँ का संक्षित इतिहास इस तरह हैं। 

सरयू गंगा तथा राम गंगा नदियों के मध्य स्थित होने के कारण इस क्षेत्र को पूर्वकाल में गंगावली कहा जाता था, जो धीरे धीरे बदलकर गंगोली हो गया। तेरहवीं शताब्दी से पहले इस क्षेत्र पर कत्यूरी राजवंश का शासन था। गंगोलीहाट इस गंगोली क्षेत्र का प्रमुख व्यापारिक केंद्र था, बाज़ार को जिसे स्थानीय बोली मे हाट कहते हैं। गंगोली के साथ साथ हाट -  जुड़कर इस क्षेत्र को नाम मिला गंगोलीहाट। 

तेरहवीं शताब्दी के बाद यहाँ मनकोटी राजाओं का शासन रहा, जिनकी राजधानी मनकोट में थी। सोलहवीं शताब्दी में Kumaon के राजा बालो कल्याण चन्द ने मनकोट पर आक्रमण कर गंगोली क्षेत्र पर अधिकार कर लिया। 

गंगोलीहाट की मुख्य सड़क से आधे से एक किलोमीटर की दूरी पर  रोड के बाद सड़क के किनारे वहाँ पार्क किए जा सकते हैं,यहाँ पर कई दुकाने हैं, जहां से मंदिर के लिए प्रसाद पुष्प आदि खरीदे जा सकते हैं। 

यहाँ से कुछ सीढ़िया उतर मंदिर तक पहुचा जा सकता हैं। पैदल मार्ग का एक बड़ा में टिन की चादरों से कवर्ड हैं और हाट कालिका मंदिर घिरा है, देवदार के छायादार और घने वृक्षों से। 

हजारों वर्ष पूर्व आदि गुरू शंकराचार्य Badrinath, Kedarnath होते हुए, यहां पर आए तो उन्हें आभास हुआ कि यहां पर कोई शक्ति है, यहाँ मां ने कन्या के रूप में दर्शन दिया और कहाँ की उन्हे ज्वाला रूप से शांत रूप में ले आओ।  तब इस जगह माँ हाट कालिका - शक्तिपीठ की स्थापना इस जगह आदि गुरु शंकरायचार्य जी द्वारा हुई।

यह Mana जाता है कि कोलकाता में माँ काली मंदिर मे विराजित महाकाली का ही शक्ति रूप  गंगोलिहाट मैं  हाट कालिका मंदिर में vidhyaman है,  गंगोलीहाट में स्थित हाट कालिका का मंदिर पुरे भारत के साथ-साथ भारतीय सेना बलों के बीच में भी प्रसिद्ध है|

मंदिर के मुख्य पुजारी, रावल परिवार से हैं, यहाँ के पुरोहित  पंत जी से मंदिर के बारे मे कुछ जानकरियाँ ली। 

भारतीय सेना के Kumaon रेजीमेंट के हाट कालिका से जुड़ाव के बारे में एक दिलचस्प कहानी है। "द्वितीय विश्वयुद्ध (1939-1945) के समय एक बार भारतीय सेना का जहाज डूबने लगा। तब सैन्य अधिकारियों ने जवानों से अपने-अपने ईश्वर को याद करने का कहा, Kumaon के सैनिकों ने जैसे ही हाट काली का जयकारा लगाया वैसे ही जहाज किनारे आ गया।" तभी से Kumaon रेजीमेंट ने मां काली को आराध्य देवी के रूप मे मानता हैं।जब भी Kumaon रेजीमेंट के जवान युद्ध के लिए जाते हैं तो काली मां के दर्शन के बिना नहीं जाते हैं। हर वर्ष माघ माह में यहां पर सैनिकों और अधिकारी बड़ी संख्या मे दर्शन के लिए आते हैं, यहाँ बने कई धर्मशाले, मंदिर और रास्ते के  निर्माण मे स्थानीय लोगों, श्रीडालुओं के साथ भारतीय सेना से जुड़े लोगो का भी योगदान हैं। 

गंगोलिहाट से करीब 24 किलोमीटर दूर विश्व विख्यात Patal Bhuvaneshwar गुफा हैं, यहाँ कुछ अन्य गुफाये भी देखी जा सकती हैं - जिनमे हैं - शैलेश्वर गुफा “Mukteshwar गुफा” भी प्रसिद्ध हैं और कुछ समय पूर्व जानकारी मे आई  गुफा - भोलेश्वर गुफा।  

गंगोलिहाट के समीपवर्ती  दर्शनीय स्थलों मे चौकोडी, पिथोरागढ़ , बेरीनाग, धौलछीना, Jageshwar आदि हैं, कुछ दर्शनीय स्थलों  की  दूरी स्क्रीन मे देखी जा सकती हैं। 

गंगोलिहाट से नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर 162 किलोमीटर और Kathgodam रेलवे 190 किलोमीटर हैं। नजदीकी  नैनी सैनी एयरपोर्ट पिथोरागढ़  84 किमी और पंतनगर हवाई अड्डा 223 किलोमीटर हैं। 

दिल्ली, देहारादून, लखनऊ और दूसरे बड़े शहरो से फिलहाल को सीधी बस सर्विस नहीं हैं,  यहाँ से गगोलिहाट आने के लिए  पहले Haldwani पहुचना होगा, से 197 किलोमीटर दूर हैं, पहाड़ी मार्ग होने के कारण इस दूरी को तय करने मे 6 से 7 घंटे लगते हैं।

Haldwani से रोडवेज़ की एक बस शेराघाट, गंगोलीहाट होते हुए पिथौरागढ़ तक जाती हैं, Haldwani से गंगोलिहाट के लिए कुछ प्राइवेट बस सर्विस और shared टॅक्सी भी मिल जाती हैं। 

मंदिर के दर्शन करने और जानने के लिए देखें वीडियो:

https://youtu.be/UPY7ub7SP24

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