Travel story
Adi Badri Mandir

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Uttarakhand collection · context photograph · Shyamal · CC BY-SA 4.0 · Resized, WebP conversion and display crop. Same license as original.admin · 2018-08-07
Uttarakhand के चमोली जिले में Badrinath धाम के अलावा छह और बद्री विद्यमान है… जो हैं… वृद्धबद्री, ध्यानबद्री, अर्धबद्री, भविष्यबद्री, योग-ध्यानबद्री व आदिबद्री, अगर आप बद्रीधाम दर्शन की यात्रा में निकले हों तो इन धामों का भी दर्शन कर अपनी यात्रा को सफल बनायें … आदि बद्री Uttarakhand के प्रसिद्द्ध सप्त बद्री में भी शामिल है… भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर - १६ मंदिरों का समूह, Uttarakhand में चमोली ज़िले में कर्णप्रयाग से 19 किलोमीटर दूर कर्ण प्रयाग - Ranikhet रोड पर स्तिथ हैं. आदि का तात्पर्य होता है प्राचीन, ऐसी मान्यता हैं - कि सतयुग, त्रेतायुग और द्वापरयुग में भगवान विष्णु यहाँ रहते थे और कलयुग में वे श्री Badrinath में निवास करते हैं, इसलिए इसे आदि बद्री के नाम से जाना जाता है…
महर्षि वेद व्यास जी द्वारा यहाँ श्री मद भागवत गीता पुराण भी इसी स्थान में लिखा गया. आदि बद्री को सरस्वती नदी के उद्गम स्थान के रूप में भी जाना जाता है.
किंबदंती है कि इन मंदिरों का निर्माण स्वर्गारोहिणी पथ - पर Uttarakhand आये पांडवों द्वारा किया गया। यह भी Mana जाता है कि इसका निर्माण कि आदि गुरु शंकरचार्य ने इन मंदिरों का निर्माण शुरू किया था। भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षणानुसार के अनुसार इनका निर्माण 8वीं से 11वीं सदी के बीच कत्यूरी राजाओं द्वारा किया गया। कुछ वर्षों से इन मंदिरों की देखभाल भारतीय पुरातात्विक के सर्वेक्षणाधीन है।
मूलरूप से इस समूह में 16 मंदिर थे, जिनमें 14 अभी बचे हैं। प्रमुख मंदिर भगवान विष्णु का है । इसके सम्मुख एक छोटा मंदिर भगवान विष्णु की सवारी गरूड़ को समर्पित है। समूह के अन्य मंदिर अन्य देवी-देवताओं यथा सत्यनारयण, लक्ष्मी, अन्नपूर्णा, चकभान, कुबेर (मूर्ति विहीन), राम-लक्ष्मण-सीता, काली, भगवान शिव, गौरी, शंकर एवं हनुमान को समर्पित हैं। इन प्रस्तर मंदिरों पर गहन एवं विस्तृत नक्काशी है तथा प्रत्येक मंदिर पर नक्काशी का भाव उस मंदिर के लिये विशिष्ट तथा अन्य से अलग भी है।
आदि बद्री मंदिर की पूजा पास ही थापली गांव के रहने वाले थपलियाल परिवार के पूजारी करते हैं जो पिछले पांच-छ: पीढ़ियों से इस मंदिर के पुजारी रहे हैं। आदि बद्री धाम के कपाट शीतकाल में एक माह के लिए बंद रहते हैं, इस मंदिर में भगवान विष्णु के 1 मीटर/ ३ फुट ऊंची काले की पत्थर की मूर्ति स्थापित है । विष्णु निश्चित रूप से, बिद्रीनाथ का एक और नाम है इसलिए इस मंदिर को आदिबद्री भी कहा जाता है। यह पांच बद्रि (पंच बद्री) में से एक है, विशाल बद्री, योग-ध्यान बद्री, वृद्ध बद्री और भविष्य बद्री। सभी पांच तीर्थस्थल यहाँ से निकटता में ही स्थित हैं।
कैसे पहुंचें:
बाय एयर
गढ़वाल क्षेत्र आने पर निकटम हवाई अड्डा Dehradun में जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है, जो आदिबद्री से लगभग 210 किमी दूर है। और Kumaon क्षेत्रसे आने पंतनगर करीब 222 किलोमीटर की दुरी पर हैं.
ट्रेन द्वारा
गढ़वाल में ऋषिकेश, हरिद्वार और Dehradun सभी के पास रेलवे स्टेशन हैं। आदिबद्री से निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश (लगभग 192 किमी) हैKumaon में Kathgodam रेलवे स्टेशन से अदिबद्री की दुरी करीब 188 किलोमीटर हैं. निकटतम रेलवे स्टेशन से बस, टैक्सी द्वारा अदिबद्री पंहुचा जा सकता हैं..
सड़क के द्वारा
कर्णप्रयाग से 19 कि०मी० दूर आदिबद्री पहुंचा जा सकता है जो वापसी में Ranikhet, Nainital और रामनगर के साथ एक मोटर रोड से जुड़ा हुआ है।
आदि बद्री मंदिर के हर वर्ष नवम्बर माह दिवाली के बाद कपाट बंद होते हैं मकर संक्रांति के अवसर पर द्वार खुलते हैं. अदि बद्री आने के लिए पुरे वर्ष अच्छा समय हैं बरसात में रोड कनेक्टिविटी में कभी - कभी अवरोध मिल सकता हैं। आदि बद्री में ठहरने के लिए कुछ प्राइवेट गेस्ट हाउस के साथ, गढ़वाल मंडल निगम का एक गेस्ट हाउस भी हैं, जहाँ ठहरा जा सकता हैं, इसके अतिरिक्त रात्रि विश्राम - कर्णप्रयाग में भी किया जा सकता हैं, जहाँ ठहरने के लिए बहुत सारे होटल, गेस्ट हाउस हैं।
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