उत्तराखंड में देवी का पवित्र सिद्दपीठ

पूर्णागिरी मंदिर

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Purnagiri Temple

उत्तराखंड में चम्पावत जिले में टनकपुर के निकट, नेपाल की सीमा से लगा - सुप्रसिद्ध पूर्णागिरी देवी का मंदिर ५५०० फीट ऊँचे अन्नपूर्णा पर्वत शिखर में स्थित हैं


यह देवी के १०८ सिद्ध पीठों में से एक है।  कहा जाता है कि दक्ष प्रजापति की कन्या और शिव की अर्धांगिनी सती की नाभि का भाग यहाँ पर विष्णु चक्र से कट कर गिरा था।

पूर्णागिरि मंदिर के लिए टुन्यास नाम के स्थान से लगभग 3 किमी का  पैदल मार्ग है। मार्ग अच्छा बना है।
टनकपुर रेलवे स्टेशन से पूर्णगिरि मंदिर की दूरी  लगभग 23 किमी है।

मार्ग में एक के बाद एक अनेक निजी धर्मशालाएं हैं, जो रास्ते भर मिलते रहती हैं, यहाँ ठहरने के लिए वे कोई शुल्क नही लेते। और अपेक्षा करते है आप मंदिर के लिए प्रसाद उनसे खरीदें।

हर वर्ष यहाँ 25 लाख से भी अधिक श्रदालू माँ के दर्शनों के लिए आते है। विशेषतः चैत्र नवरात्रि में यहाँ काफी भीड़ होती है, और मेले का आयोजन भी होता है।

मार्ग मे धर्मशालाओ के साथ कुछ भोजनालय है जहां शाकाहारी भोजन मिलता है।  नवरात्रि और चैत्र के महीनों के साथ समय समय पर, मंदिर के मार्ग में कई भक्त भंडारे भी आयोजित कराते है।

पैदल मार्ग मे कई छोटे - 2 मंदिर, मूर्तियाँ, भोजनालय, दुकाने, रहने के लिए टिन शेल्टर मिलते रहते है।

पैदल मार्ग मे कई छोटे - 2 मंदिर, मूर्तियाँ, भोजनालय, दुकाने, रहने के लिए टिन शेल्टर मिलते रहते है।

 मंदिर मे शृदालू नारियल, चुनरी, प्रसाद, धूप, अगरबत्ती आदि चढ़ाते है।

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(लेख/ विडियो के साथ)

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