रानीखेत से भवाली की ओर निकलते हुए घने पेड़, सेना के परिसर और पहाड़ी मोड़ साथ चलते हैं। रानीखेत के बाजार वाले रास्ते के बजाय हमने माल रोड की दिशा चुनी। कुछ आगे रास्ते मिल जाते हैं, लेकिन इस हिस्से की शांति सफर की शुरुआत को सुखद बनाती है।

रानीखेत को पीछे छोड़ते हुए

पुराना डाकघर, सैन्य अस्पताल की दिशा और पेड़ों से घिरी सड़क शहर की पहचान याद दिलाते हैं। रानीखेत नाम के साथ रानी और मैदान की स्थानीय कथा जुड़ी है। कुमाऊँ रेजिमेंट से उसका संबंध भी नगर के स्वरूप में साफ दिखाई देता है। सैन्य क्षेत्रों की सीमाओं और फोटोग्राफी संबंधी निर्देशों का सम्मान करें।

रानीखेत में ठहरकर हैड़ाखान मंदिर, चौबटिया, गोल्फ मैदान, कालिका, मझखाली, आशियाना पार्क और रानी झील जैसे स्थान देखे जा सकते हैं। ताड़ीखेत की दिशा में बिनसर महादेव का कार्यक्रम अलग रखा जा सकता है।

पिलखोली से भुजान

पिलखोली के पास घाट घटेश्वरी मंदिर की दिशा का रास्ता मिलता है। आगे उपराड़ी, बजिना, बजोल, बमस्यूँ और पातली जैसे छोटे पड़ाव आते हैं। कहीं दुकानें और घर सड़क के पास हैं, तो कहीं खेत ढलान पर दूर तक फैलते हैं। पुराने घरों और खाली होती बस्तियों को देखकर पहाड़ में बदलते जीवन और रोज़गार के सवाल भी मन में आते हैं।

भुजान से बेतालघाट की ओर सड़क निकलती है। रानीखेत से लगभग 29 किलोमीटर बाद खैरना का क्षेत्र आता है। पुल और तिराहे के पास अल्मोड़ा की दिशा अलग होती है; भवाली के लिए गरमपानी की ओर बढ़ते हैं।

गरमपानी, रातीघाट और कैंची

गरमपानी में बाजार और नदी घाटी का खुला दृश्य मिलता है। आसपास मंदिर तथा जलस्रोत भी हैं। किसी प्राकृतिक स्रोत से पानी पीने से पहले उसकी उपयुक्तता जानें। रातीघाट के बाद कैंची धाम की ओर बढ़ते हुए वाहनों का दबाव बढ़ सकता है। दर्शन के लिए रुकना हो तो निर्धारित पार्किंग में जाएँ।

कैंची से निगलाट होते हुए भवाली की चढ़ाई आती है। रास्ते में हवा, जंगल और बाजार का रूप बार-बार बदलता है। यही छोटे बदलाव इस यात्रा को यादगार बनाते हैं।

भवाली से आगे कहाँ

भवाली कई दिशाओं को जोड़ने वाला बाजार है। यहाँ से नैनीताल और ज्योलीकोट की दिशा अलग है, जबकि भीमताल होकर हल्द्वानी पहुँचा जा सकता है। सातताल, नौकुचियाताल, घोड़ाखाल, रामगढ़ और मुक्तेश्वर के कार्यक्रम के अनुसार आगे का मार्ग चुनें।

सड़क का समय मौसम, भीड़ और काम के कारण बदल सकता है। पुराने टोल या यात्रा-समय को आज की निश्चित जानकारी मानकर न चलें। समय की थोड़ी गुंजाइश रखेंगे तो रास्ते में एक चाय और पहाड़ को देखने का छोटा विराम भी मिल जाएगा।