रुद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ का ओंकारेश्वर मंदिर केदारनाथ और मध्यमहेश्वर की शीतकालीन पूजा से जुड़ा है। डोली और पूजा के कार्यक्रम की तारीख हर यात्रा से पहले जाँचें।
आस्था और स्थानीय कथाएँ
ऊषा और अनिरुद्ध के विवाह से जुड़ी कथा इस स्थान के नाम और धार्मिक महत्व के साथ सुनाई जाती है। राजा मांधाता की शिव-उपासना का प्रसंग भी स्थानीय परंपरा में आता है। ये आस्था से जुड़े वृत्तांत हैं। मंदिर में वर्ष भर ओंकारेश्वर की पूजा होती है और शीतकालीन धार्मिक परंपराओं के समय इसका महत्व और बढ़ जाता है।
आसपास की यात्रा
रुद्रप्रयाग से सड़क द्वारा ऊखीमठ पहुँचा जा सकता है। तुंगनाथ, मध्यमहेश्वर और देवरिया ताल को एक ही छोटी सैर में जोड़ने के बजाय उनके अलग मार्ग, पैदल दूरी और समय के अनुसार कार्यक्रम बनाएँ।
दर्शन, डोली-आगमन और विशेष पूजा की तारीख के लिए मंदिर तथा स्थानीय प्रशासन की सूचना देखें। साथ दिए गए दूसरे धामों के वीडियो उनके अपने स्थानों का परिचय हैं; उन्हें ओंकारेश्वर मंदिर का दृश्य न समझें।

