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देखे देवी धुरा मंदिर उत्तराखंड में कहाँ है, और जाने यहाँ प्रतिवर्ष रक्षा बंधन को होने वाले पत्थर युद्ध के पीछे की वजह। इसे माँ बारही देवी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ प्रति वर्ष बहनें अपने भाइयों को पत्थरों से सुसज्जित कर युद्ध में भाग लेने के लिए भेजती हैं।
Devi Dhura jaha maa barahi devi ka mandir hai aur jo famous hai prativarsh raksha bandhan ko aayojit hone waale pathhar maar maile ke liye. Janiye isi ka eetihas, aur any jaankariyan.
#DeviDhura #MaaBarahiTemple #PattharMarMela

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The Haidakhan Babaji ashram was established by Shri Shri 1008 Haidakhan wale baba in the year between 1970 and 1984. There are more than 100 rooms available here for the accomodation of the devotees who visit the ashram, and the members of haidakhan samaj live here and provide room to the devotees of babaji at very nominal charges and more than 100 rooms are going to be constructed soon.

The river gaumati Ganga flows in between the two sites of the Ashram. There is huge hall in the ashram , Devotees of Babaji gather here for meditation.This is the cculpture of Shid brahmchari maharaj.

The ashram cover a quite huge area and divided into 3 levels the main ashram, fakirabad, and the gufa side. Babaji built nine temples (nav durga) on the bank of the River Gautami Ganga.

Every year on 25th of December a huge fair takes place in Haidakhan ashram devotees from 50 55 countries be the part of the fair There are various spiritual centers and ashrams dedicated to Haidakhan wale Babaji have been established in all over the World. Haidakhan Ashram is located in India as well as beyond India(Internationally). In India, Haidakhan Vishwa Mahadham (Village Haidakhan, District Nainital), Ananda Puri Ashram, Chilianaula (Ranikhet), India, Manda Ashram (it’s about 23kms away from Vapi), Haidakhandi Samaj (Yaday Bhawan, Malla Gorakhpur Haldwani).

Internationally the Ashrams are located in Germany(Bhole Baba Ashram, Rieferath , GERMANY), USA( Haidakhandi Universal Ashram ), Italy (Fondazione Bhole Baba in Cisternino (BR), Switzerland ( Brien), the Netherlands (Loenen Ashram Sada Shiva Dham).





The Centres of Haidakhan are located in various places of India including Assam, Ahmedabad, Dariapur, Kayavaroham, Kota, Lobhan, Manda, Mandiri, Mathura, Murar, New Delhi, Almora, Vrindavan.

During the time of Babaji, Haidakhan Samaj got developed, the main purpose behind developing the Samaj was to spread the message of Babaji in the world. There are many festivals celebrated in the ashram by the members of the Ashram and the members of Haidakhan Samaj. Haidakhan Samaj also works for the welfare of the society. There are two main ashrams of Haidakhan Babaji manages by Haidakhan Samaj these are Haidakhan Vishwa Mahadham at Haidakhan village and Anandpuri Ashram at chiliyanaula, Ranikhet. The Haidakhan Samaj serves the poor and the sick people by providing health and medical facilities in both the ashrams .

There are also 5 guest houses and the Bhakti Bhandar Shop, the main temple, the Italian temple and Sri Babaji‘s Kutir (room) and the Sri Baba Research Hospital where both Ashram visitors and local people are treated.
Babaji left his body on 14 February 1984. He gave the message that we can win the heart of the people by truth, simplicity, and love.

You can get details of altitude or contact details of Ashram on given link (http://www.nainitalonline.com/about-haidakhan/) as shown on screen or you can get the link on description below.

Also we are providing the link of our pervious video in which you will get the route of Haidakhan ashram from haldwani and the brief history of haidakhan ashram





India :
Haidakhan : Haidakhan Vishwa Mahadham (Village Haidakhan, District Nainital) WEBSITE : www.haidakhandisamaj.org
Ranikhet : Ananda Puri Ashram, Chilianaula (Ranikhet), India www.haidakhandisamaj.org, http://www.anandpuri.com/Welcome.html
Manda Ashram (about 23 km from vaapi )
Malla Gorakhpur Haldwani: HAIDAKHANDI SAMAJ: Website : Haidakhandisamaj.org
International
U.S.A : HAIDAKHANDI UNIVERSAL ASHRAM: WEBSITE : www.babajiashram.org
THE NETHERLANDS : LOENEN ASHRAM SADA SHIVA DHAM : WEBSITE : www.babaji.nl
SWITZERLAND : BRIENZ : WEBSITE : www.babajiashram.de
ITALY: Fondazione Bhole Baba in Cisternino (BR): WEBSITE : www.bholebaba.org, www.samajitaliano.org
GERMANY: Bhole Baba Ashram, Rieferath (GERMANY) : WEBSITE : www.babajiashram.de

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व्यस्त दिनचर्या और थकान भरी जीवनशैली के आप used to (अभ्यस्त) हो गये हों, पर कभी आपको लगे, कि आपने, अपने और अपनों के साथ, अच्छा वक़्त बिताना है, तो almora जो की समुद्र तल से लगभग 6,106 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, आपके लिए एक उपयुक्त स्थान हो सकता है। ये नगर जहाँ एक और ऐतिहासिक महत्व का है, वही सांस्कृतिक, अध्यात्मिक स्थल होने के साथ साथ एक जाना माना पर्यटक स्थल भी है।
आईये रूबरू होते है इस शहर से, बने रहिये इस सफ़र में मेरे साथ, hello फ्रेंड्स मै स्नेहा, आपका स्वागत है अल्मोड़ा नगर के इस टूर में…।
इस जगह से राईट हैण्ड साइड को डोली डाना गोल्जू मंदिर है जो डेढ़ से दो किलोमीटर की soft​ ट्रैकिंग के बाद आता है। ​




अल्मोड़ा, 16 वीं शताब्दी में कुमाऊं साम्राज्य पर शासन करने वाले चंदवंशीय राजाओं की राजधानी थी। एक कथा के अनुसार यह कहा जाता है कि कौशिका देवी ने शुंभ और निशुंभ नामक दानवों को इसी क्षेत्र में मारा था।

head पोस्ट ऑफिस, रैमजे इंटर कॉलेज, एडम्स गर्ल्स inter कॉलेज, GIC आदि कुछ ब्रिटिश कालीन इमारतों में से एक हैं
चितई, नंदा देवी मंदिर, रघुनाथ मंदिर, हनुमान मंदिर, मुरली मनोहर मंदिर, भैरब मंदिर, पाताल देवी, कसारदेवी, उल्का देवी, बानरी देवी, बेतालेश्वर, स्याही देवी , जागेश्वर, डोलीडाना आस्था के केन्द्र इस शहर की धरोहर हैं




​​अल्मोड़ा में, आवागमन के लिए, kmou, roadways की बसें aur taxi asani se uplabdh ho jati hai हैं । जनपद का सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम, यहाँ से लगभग 90० किमी० की दूरी पर, एवं निकटतम एअरपोर्ट पंतनगर लगभग 125 किमी० की दूरी पर स्थित है. Almora se kuch prmukh sehro ki duri ap screen mai dekh skte hai

अल्मोड़ा कुमाऊ का एक प्रमुख शहर है जहाँ से कुमाओं और गडवाल के प्रमुख जगहों के लिए मार्ग जाता है जैसे नैनीताल, हल्द्वानी, पिथोरागढ़, बागेश्वर, द्वाराहाट, रानीखेत, कौसानी, जागेश्वर, कर्णप्रयाग, चमोली, आदि को, स्क्रीन में आपको इन स्थानों की अल्मोड़ा से दुरी का चार्ट दिख रहा है

इतिहासकारों की मान्यता है कि, सन् 1563 ई. में चंदवंश के राजा बालो कल्याणचंद ने आलमनगर के नाम से इस नगर को बसाया था। चंदवंश की पहले राजधानी चम्पावत थी। कल्याणचंद ने इस स्थान के महत्व को भली-भाँति समझा। तभी उन्होंने चम्पावत से बदलकर इस आलमनगर (अल्मोड़ा) को अपनी राजधानी बनाया।

सन् 1563 से लेकर 1790 ई. तक अल्मोड़ा का धार्मिक भौगोलिक और ऐतिहासिक महत्व कई दिशाओं में अग्रणी रहा। इसी बीच कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं राजनैतिक घटनाएँ भी घटीं। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक दृष्टियों से भी अल्मोड़ा समस्त कुमाऊँ अंचल का प्रतिनिधित्व करता रहा।
सन् १७९० ई. से गोरखाओं का आक्रमण कुमाऊँ अंचल में होने लगा था। गोरखाओं ने कुमाऊँ तथा गढ़वाल पर आक्रमण ही नहीं किया बल्कि अपना राज्य भी स्थापित किया। सन् 1896 ई. में अंग्रेजो की मदद से गोरखा पराजित हुए और इस क्षेत्र में अंग्रेजों का राज्य स्थापित हो गया।
स्वतंत्रता की लड़ाई में भी अल्मोड़ा के विशेष योगदान रहा है। शिक्षा, कला एवं संस्कृति के उत्थान में अल्मोड़ा का विशेष हाथ रहा है।
कुमाऊँनी संस्कृति की असली छाप अल्मोड़ा में ही मिलती है – अत: कुमाऊँ के सभी नगरों में अल्मोड़ा ही सभी दृष्टियों से बड़ा है।




जनपद की मुख्य नदियों में रामगंगा, कोसी तथा सुयाल नदियां हैं । जनपद के प्रमुख कृषि उत्पाद चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा, चाय, सेब, आड़ू, खुबानी, पूलम हैं। तथा मयूर, ग्रे बटेर, काला तीतर, चिड़िया, चकोर, मोनाल तीतर, बाघ, चीतल, तेंदुआ, लोमड़ी, गोराल, हिम तेंदुआ, काले भालू जनपद में पायी जाने वाली जीव जन्तुओं की मुख्य प्रजातियां हैं। जनपद का मौसम सर्दियों में ठण्डा तथा गर्मियों में सुहावना रहता है। ऊंचाई वाले स्थानों में सर्दियों में जमकर हिमपात होता है।। जुलाई से सितंबर तक जनपद में भारी वर्षा होती है ।
अब ये बायीं और दींन दयाल उपाध्याय पार्क…

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Haidakhan is the famous Ashram for Meditation, surounded by forest area. Here anyone can meditate and do yoga, reading, day hiking and find himself. Here we bring the short documentary about Haidakhan Ashram.
#Haidakhan #Spirituality #Dhyaan #Nature
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Contacts –
Haidakhan Vishwa Mahadham
P.O. Hairakhan
Dist. Nainital
PIN 263126

Ashram Email connection:
[email protected]
more info also here:
www.haidakhandisamaj.org
www.babajicalling.com
www.babaji.net

सहस्त्रधारा एक खूबसूरत और लोकप्रिय स्थान जो उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से लगभग 16 किलोमीटर की दुरी पर राजपुर गांव के पास जंगलों के बीच स्थित है।

देहरादून से १६ किलीमीटर की दुरी पर स्थित सहस्त्रधारा तक पहुचने में लगभग 50 मिनट लगते हैं. कुछ दुरी तक सीधा रास्ता होने के बाद पहाड़ी घुमावदार सड़क शुरू हो जाती है. यहाँ स्थित, पहाड़ों से गिरने वाली धाराओं के सेकड़ों समूहों की वजह से इस स्थान को सहस्त्रधारा के नाम से जाना जाता है। यह स्थान रोमांच, आध्यात्म और सुंदरता से भरपूर है। पर्यटन आकर्सर्ण के इस केंद्र सहस्त्रधारा में हर वर्ष लाखों की संख्या में लोग यहाँ आते हैं। पहाड़ी के अन्दर प्राकृतिक रूप से तराशी हुई कई छोटी छोटी ग़ुफाएँ हैं जो बाहर से तो स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती किंतु इनमें जब प्रवेश करते हैं तो उनकी छत से अविरल रिमझिम बारिश की बौछारों की तरह पानी टपकता रहता है।





कहते हैं कि गुरू द्रोणाचार्य ने यहां पर तपस्या की थी। गर्मी से परेशान होकर उन्होने भगवान शिव से एक आशीर्वाद प्राप्त किया कि यहां हमेशा पानी टपकता रहे, और तब से लगातार पानी टपक रहा है। यहां गुफा और एक प्राचीन शिव मंदिर भी है। गुफा के भीतर भी गंधक युक्त पानी रिमझिम फुहारों की रूप में गुफा की छत से टपकता रहता हैं. यहां स्थित गंधक झरना त्वचा सम्बंधित बीमारियों की चिकित्सा के लिए प्रसिद्ध है।

यहाँ से लगभग तीन हजार की उचाई पर स्थित एक अन्य आकर्षण का स्थान मणिदीप है, जहाँ आप रोपवे द्वारा जा सकते हैं, ये आप के सहस्त्रधारा यात्रा को और निश्चित ही और भी यादगार बना देगा। यहां पर एक बौद्ध मंदिर भी है ।