Gangotri Temple

गंगोत्रि धाम का, हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण स्थान है, मंदिर के समीप…गौमुख से ही.. गंगा नदी का udgam होता है अगर आपने… उत्तर भारत के, चारोंधामों ki yatra, एक साथ karni ho to ऐसी मान्यता hai… कि सबसे पहले यमुनोत्री धाम के दर्शन किये जाते हैं…, और उसके बाद का क्रम है गंगोत्री… बद्रीनाथ… और फिर केदारनाथ…. धर्मग्रंथों में कहा गया है, कि जो यहां का दर्शन करने में सफल होते हैं उनका न केवल इस जनम का पाप धुल जाता है वरन वे जीवन-मरण के बंधन से भी मुक्‍त हो जाते हैं। इन धामों में से यमुनोत्री के liye लगभग 7 किलोमीटर का, केदरनाथ के लिए 20 किलोमीटर का trek hai jabki बद्रीनाथ और गंगोत्री धाम sadak ke pass hi isthit hai.

गोमुख – जहां से गंगा नदी का उद्गम होता है, गोमुख गंगोत्री से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर है। गोमुख तक पहुंचने का रास्ता बेहद कठिन और दुर्गम है.गंगोत्री एक ग्लेशियर है और गोमुख, इसी का एक हिस्‍सा है. जहां से बर्फ पिघलकर गंगा बनने के लिए आगे बढ़ती है. ये एक उच्च हिमालयी छेत्र है, जहाँ ऑक्सीजन की कमी रहती है, साथ ही गोमुख जाने का मार्ग भी कही कही par काफी संकरा और जोखिम भरा है, एक तरफ पत्थर और मलवे के पहाड़, और दूसरी और नदी, इस तरह ke ट्रेक करने से पहले, आपको apne sarir ko iske lie anukul krna होता है
यह ग्‍लेशियर चारो तरफ से हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं जैसे – शिवलिंग, थलय सागर, मेरू और भागीरथी तृतीय की बर्फीली चोटियों से घिरा हुआ है।

Adi Badri Mandir

उत्तराखंड के चमोली जिले में बदरीनाथ धाम के अलावा छह और बद्री विद्यमान है… जो हैं… वृद्धबद्री, ध्यानबद्री, अर्धबद्री, भविष्यबद्री, योग-ध्यानबद्री व आदिबद्री, अगर आप बद्रीधाम दर्शन की यात्रा में निकले हों तो इन धामों का भी दर्शन कर अपनी यात्रा को सफल बनायें … आदि बद्री उत्तराखंड के प्रसिद्द्ध सप्त बद्री में भी शामिल है… भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर – १६ मंदिरों का समूह, उत्तराखंड में चमोली ज़िले में कर्णप्रयाग से 19 किलोमीटर दूर कर्ण प्रयाग – रानीखेत रोड पर स्तिथ हैं. आदि का तात्पर्य होता है प्राचीन, ऐसी मान्यता हैं – कि सतयुग, त्रेतायुग और द्वापरयुग में भगवान विष्णु यहाँ रहते थे और कलयुग में वे श्री बद्रीनाथ में निवास करते हैं, इसलिए इसे आदि बद्री के नाम से जाना जाता है…

महर्षि वेद व्यास जी द्वारा यहाँ श्री मद भागवत गीता पुराण भी इसी स्थान में लिखा गया. आदि बद्री को सरस्वती नदी के उद्गम स्थान के रूप में भी जाना जाता है.

किंबदंती है कि इन मंदिरों का निर्माण स्वर्गारोहिणी पथ – पर उत्तराखंड आये पांडवों द्वारा किया गया। यह भी माना जाता है कि इसका निर्माण कि आदि गुरु शंकरचार्य ने इन मंदिरों का निर्माण शुरू किया था। भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षणानुसार के अनुसार इनका निर्माण 8वीं से 11वीं सदी के बीच कत्यूरी राजाओं द्वारा किया गया। कुछ वर्षों से इन मंदिरों की देखभाल भारतीय पुरातात्विक के सर्वेक्षणाधीन है।

मूलरूप से इस समूह में 16 मंदिर थे, जिनमें 14 अभी बचे हैं। प्रमुख मंदिर भगवान विष्णु का है । इसके सम्मुख एक छोटा मंदिर भगवान विष्णु की सवारी गरूड़ को समर्पित है। समूह के अन्य मंदिर अन्य देवी-देवताओं यथा सत्यनारयण, लक्ष्मी, अन्नपूर्णा, चकभान, कुबेर (मूर्ति विहीन), राम-लक्ष्मण-सीता, काली, भगवान शिव, गौरी, शंकर एवं हनुमान को समर्पित हैं। इन प्रस्तर मंदिरों पर गहन एवं विस्तृत नक्काशी है तथा प्रत्येक मंदिर पर नक्काशी का भाव उस मंदिर के लिये विशिष्ट तथा अन्य से अलग भी है।

आदि बद्री मंदिर की पूजा पास ही थापली गांव के रहने वाले थपलियाल परिवार के पूजारी करते हैं जो पिछले पांच-छ: पीढ़ियों से इस मंदिर के पुजारी रहे हैं। आदि बद्री धाम के कपाट शीतकाल में एक माह के लिए बंद रहते हैं, इस मंदिर में भगवान विष्णु के 1 मीटर/ ३ फुट ऊंची काले की पत्थर की मूर्ति स्थापित है । विष्णु निश्चित रूप से, बिद्रीनाथ का एक और नाम है इसलिए इस मंदिर को आदिबद्री भी कहा जाता है। यह पांच बद्रि (पंच बद्री) में से एक है, विशाल बद्री, योग-ध्यान बद्री, वृद्ध बद्री और भविष्य बद्री। सभी पांच तीर्थस्थल यहाँ से निकटता में ही स्थित हैं।

कैसे पहुंचें:

बाय एयर
गढ़वाल क्षेत्र आने पर निकटम हवाई अड्डा देहरादून में जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है, जो आदिबद्री से लगभग 210 किमी दूर है। और कुमाऊँ क्षेत्रसे आने पंतनगर करीब 222 किलोमीटर की दुरी पर हैं.

ट्रेन द्वारा
गढ़वाल में ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून सभी के पास रेलवे स्टेशन हैं। आदिबद्री से निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश (लगभग 192 किमी) हैकुमाऊँ में काठगोदाम रेलवे स्टेशन से अदिबद्री की दुरी करीब 188 किलोमीटर हैं. निकटतम रेलवे स्टेशन से बस, टैक्सी द्वारा अदिबद्री पंहुचा जा सकता हैं..

सड़क के द्वारा
कर्णप्रयाग से 19 कि०मी० दूर आदिबद्री पहुंचा जा सकता है जो वापसी में रानीखेत, नैनीताल और रामनगर के साथ एक मोटर रोड से जुड़ा हुआ है।

आदि बद्री मंदिर के हर वर्ष नवम्बर माह दिवाली के बाद कपाट बंद होते हैं मकर संक्रांति के अवसर पर द्वार खुलते हैं. अदि बद्री आने के लिए पुरे वर्ष अच्छा समय हैं बरसात में रोड कनेक्टिविटी में कभी – कभी अवरोध मिल सकता हैं। आदि बद्री में ठहरने के लिए कुछ प्राइवेट गेस्ट हाउस के साथ, गढ़वाल मंडल निगम का एक गेस्ट हाउस भी हैं, जहाँ ठहरा जा सकता हैं, इसके अतिरिक्त रात्रि विश्राम – कर्णप्रयाग में भी किया जा सकता हैं, जहाँ ठहरने के लिए बहुत सारे होटल, गेस्ट हाउस हैं।

Badrinath Travel Guide

बद्रीनाथ धाम : हिमालय के शिखर पर स्थित बद्रीनाथ मंदिर हिन्दुओं की आस्था का बहुत बड़ा केंद्र है। बद्रीनाथ मंदिर उत्तराखंड राज्य में चमोली जिले में जिला मुख्यालय चमोली से १०० किलोमीटर की दुरी पर अलकनंदा नदी के किनारे बसा है। मूल रूप से यह धाम विष्णु के नारायण रुप को समर्पित है।। बद्रीनाथ मंदिर को आदिकाल से स्थापित माना जाता है।

बद्रीनाथ मंदिर के कपाट प्रतिवर्ष अप्रैल के अंत या मई के प्रथम पखवाड़े में दर्शन के लिए खोल दिए जाते हैं। कपाट के खुलने के समय मन्दिर में अखण्ड ज्योति को देखने को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता रहता है।

अधिक जानने के लिए वीडियो देखें।

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Reetha Sahib Gurudwara Vlog

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सिक्खों और हिन्दुओं की धार्मिक आस्था का केंद्र, श्री रीठा साहिब, उत्तराखण्ड के चम्पावत जिले में जिला मुख्यालय से लगभग 72 कि.मी. की दुरी पर ड्युरी नामक एक छोटे से गांव में लोदिया और रतिया नदी के संगम पर स्थित है । गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब उत्तराखंड के चमोली जिले में है। यह गुरुद्वारा समुद्र स्तर से 4000 मीटर की ऊंचाई पर है। बर्फबारी के कारण यात्रियों की सुरक्षा के लिए इसे अक्टूबर से अप्रैल तक बंद कर दिया जाता है। नानकमत्ता गुरुद्वारा से श्री रीठा साहिब पहुचने का मार्ग खटीमा, टनकपुर, चम्पावत, लोहाघाट, धुनाघाट से होते हुए आता है ।

चीड के जंगलों से घिरा हुआ और साथ के हरे भरे उपजाऊ भूमि और नदी से लगा हुआ रीठा साहिब गुरुद्वारा आईये चलते हैं गुरुद्वारा दर्शन को… ये रीठा साहिब बाजार, यहाँ डेली नीड्स की जरूरतों आदि के दुकाने और एक बैंक पंजाब & सिंध बैंक की एक शाखा है. और बाजार से आगे बद हम बद रहें है गुरद्वारे की ओर , यहाँ पर मार्ग संकरा होने की साथ साथ काफी तेज ढलान वाला भी है… ये देखिये सामने रस्ते में ढलान की साथ साथ मोड़ भी है, यहाँ पर काफी धीमी गति में और सावधानी पूर्वक अपना वाहन चल्यें … और अब हम पहुचे हैं गुरूद्वारे के एंट्रेंस पर, एंट्रेंस से लगा हुआ ही पार्किंग स्पेस है… , पार्किंग से लगा हुआ ही रिसेप्शन हैं… यहाँ आपने रुकना हो तो यहाँ आपको एंट्री करनी होती है और पहचान सम्बन्धी डाक्यूमेंट्स जैसे DL, वोटर id कार्ड, aadhar, आदि दिखाने होते हैं, यहाँ आपको काफी रियायती दरो में कमरे अलग अलग श्रेणी जैसे dormatory, डबल एंड फोर beded फॅमिली room आदि . ३००, ५००, ८०० आदि के कीमत में उपलब्ध हैं. …. ये रिसेप्शन से बाहर से दिखने वाला दृश्य जहाँ राईट हैण्ड को रुकने के लिए कमरे, सामने मुख्य गुरूद्वारे के लिए प्रवेश द्वार, और बाये रसोई घर और dining एरिया है … और ये सामने दिख रहा पार्किंग एरिया… चारो और पहाड़ियों के बीचो बीच बसे इस स्थान में पीछे चलती गुरुबानी की मधुर आवाज और मधुर संगीत की आवाज सुन आपको अलग ही आनंद और शांति की प्राप्ति होती है..;.

इस गुरुद्वारे का निर्माण 1960 में करवाया गया था । गुरूद्वारा रीठा साहिब उत्तराखण्ड राज्य के समुद्री तल से लगभग 7,000 फुट की ऊच्चाई पर स्थित है | इस स्थान के बारे में यह कहा जाता है कि गुरु नानक जी ने इस जगह का दौरा किया था यह जगह एक खास तरह के मीठे रीठा के पेड़ों के लिए भी प्रसिद्ध है । यहां तीर्थयात्रियों के आवास, भोजन आदि सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस तीर्थ स्थल में तीर्थयात्रियों के ठहरने के लिए करीब दो सौ कमरे और सराय हॉल है। हरसाल लाखों लोग गुरुनानक की आध्यात्मिक शक्ति के चमत्कार को नमस्कार करने आते हैं।

गुरद्वारे में जाने के लिए आपको अपने जुते चप्पल उतार कर अपने पेरो को रस्ते में बने कुंड में डूबा कर धोना होता है… जिससे आपके पेरो के द्वारा कोई गन्दगी गुरुदारे में ना जाए, साथ ही अपने सर को ढकना भी होता है ।

एक रीठा का वृक्ष (मूल नहीं है) अभी भी यहां है और तीर्थयात्रियों को मिठाई में रीठे का रस का प्रसाद दिया जाता है । गुरुद्वारा से लगभग दस किलोमीटर की दूरी पर, एक ऐसा बगीचा है जहां ऐसे पेड़ उगते हैं और उनके फल एकत्र किए जाते हैं और उन्हें गुरुद्वारा के प्रसाद का भंडार भरने के लिए लाया जाता है। इसे नानक बागीच कहा जाता है।

इस स्थान के बारे में यह मान्यता है कि सन् 1501 में सिख धर्म के संस्थापक श्री गुरु नानक देव (1469-1539) अपने शिष्य “बाला” और “मरदाना” के साथ रीठा साहिब आए थे | इस दौरान गुरु नानक देव जी की उनकी मुलाकात सिद्ध मंडली के महंत “गुरु गोरखनाथ” के चेले “ढ़ेरनाथ” के साथ हुई| इस मुलाकत के बाद दोनों सिद्ध प्राप्त गुरु “गुरु नानक” और “ढ़ेरनाथ बाबा” आपस में संवाद कर रहे थे | दोनों गुरुओं के इस संवाद के दौरान मरदाना को भूख लगी और उन्होंने गुरु नानक से भूख मिटाने के लिए कुछ मांगा | तभी गुरु नानक देव जी ने पास में खड़े रीठा के पेड़ से फल तोड़ कर खाने को कहा, लेकिन रीठा का फल आम तौर पर स्वाद में कड़वा होता हैं, लेकिन जो रीठा का फल गुरु नानक देव जी ने भाई मरदाना जी को खाने के लिए दिया था वो कड़वा “रीठा फल” गुरु नानक की दिव्यता से मीठा हो गया | जिसके बाद इस धार्मिक स्थल का नाम इस फल के कारण “रीठा साहिब” पड़ गया|

साथ ही रीठा साहिब गुरुद्वारे की यह मान्यता है कि रीठा साहिब में मत्था टेकने के बाद श्रद्धालु ढ़ेरनाथ के दर्शन कर अपनी इस धार्मिक यात्रा को सफल बनाते है | आज भी यहाँ होने वाला रीठा का फल खाने में मीठा होता है और और गुरूद्वारे द्वारा इन्ही मीठे रीठो का प्रसाद श्रध्हलुवों को प्रसाद स्वरुप दिया जाता है। वर्तमान समय में वृक्ष अभी भी गुरुद्वारा के परिसर में खड़ा है । इस गुरुद्वारे के निकट ढ़ेरनाथ jee का मंदिर स्थित है |

बैसाखी पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ विशाल मेले का आयोजन किया जाता है | शान्ति का केन्द्र होने के साथ-साथ यह गुरूद्वारा दशकों से आपसी भाईचारे का भी प्रतीक है ।

रीठा साहिब कैसे पहुँचे? How to reach Reetha Sahib Gurudwara
गुरुद्वारा रीठा साहिब लोहाघाट से 64 किमी. की दूरी पर है। यहाँ रोड द्वारा पहुँचा जा सकता है. यहाँ नॅशनल हाइवे नंबर 125 से पहुँचा जा सकता है. यहाँ से नज़दीक रेलवे स्टेशन, टनकपुर रेलवे स्टेशन है जो यहाँ से 142 किमी दूर पर स्थित है. काठगोदाम रेलवे स्टेशन से 160 किमी की दूरी पर स्थित है. रीठा साहिब रोडवेज बस या प्राइवेट टेक्सी से पहुँचा जा सकता है. यहाँ रोड द्वारा दो अलग अलग रूट से पहुँचा जा सकता है-
टनकपुर—> चंपावत—->लोहाघाट —->रीठा साहिब
हल्द्वानी—->देवीधुरा—–>रीठा साहिब

कैसे पहुंचें:

बाय एयर
मीठा रीठा साहिब से निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है जो कि उत्तराखंड राज्य के नैनीताल जिले में 160 किमी दूर स्थित है। पंतनगर हवाई अड्डे से मीठा रीठा साहिब तक टैक्सी उपलब्ध हैं। पंतनगर एक सप्ताह में चार उड़ान दिल्ली के लिए उपलब्ध है |

ट्रेन द्वारा
मीठा रीठा साहिब चम्पावत से 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। टनकपुर रेलवे स्टेशन से मीठा रीठा साहेब तक टैक्सी और बस आसानी से उपलब्ध हैं। टनकपुर लखनऊ, दिल्ली, आगरा और कोलकाता जैसे भारत के प्रमुख स्थलों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। ट्रेन टनकपुर रेलवे स्टेशन के लिए उपलब्ध होती है और रीठा साहिब टनकपुर के साथ मोटर वाहनों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

सड़क के द्वारा
मीठा रीठा साहिब उत्तराखंड राज्य और उत्तरी भारत के प्रमुख स्थलों के साथ मोटर वाहनों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आईएसबीटी आनंद विहार की बसें टनकपुर, लोहाघाट और कई अन्य गंतव्यों के लिए उपलब्ध हैं, जहां से आप आसानी से स्थानीय कैब या बस तक पहुंच सकते हैं

स्टे
मीठा रीठा साहिब में होटल और साथ ही गुरुद्वारा में आवास की सुविधा है।

चितई गोलू देवता मंदिर अल्मोड़ा

यहाँ सत्य के लिए न प्रमाण दिखाने होते, न साथ अपने गवाह लाने होते।
शृद्धा, विश्वास और पवित्र हृदय से जो भी आते, न्याय गोलू देवता से पाते।

Mukteshwar, Nainital

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मुक्तेश्वर एक छोटा सा साफ़ सुथरा और शांत पहाड़ी गाँव है, जहाँ आपको असीम शांति, वन क्षेत्र, किसी भी अन्य हिमालयी छेत्र की तरह ही सीधे व सरल ग्रामीण, और शुद्ध हवा और असीम मानसिक शांति मिलती है, यहाँ से दिखने वाले हिमालय श्रंखला के बेजोड़ दृश्य, अपने शांत माहौल और शीत मौसम व स्वच्छ वातावरण, बाज और देवदार के घने जंगल और यहाँ चौली की जाली नामक स्थान से दिखने वाले असीम व अद्भुत घाटी के दृश्य और मुक्तेश्वर महादेव मंदिर से श्रद्धालुओं को मिलती असीम उर्जा के लिए ट्रैकिंग, रीडिंग, व्रित्तिंग, बर्ड वाचिंग, आदि, यहाँ पर्यटकों द्वारा की जाने वाली कुछ एक्टिविटीज है.

मुक्तेश्वर पहुचने के मार्ग में दिखने वाले दृश्य भी काफी खुबसूरत और लुभावने हैं. सफ़र करते हुए दिखने वाले आकर्षक दृश्यों की सुन्दरता आपका दिल जीत लेती है. मुक्तेश्वर नाम दो संस्कृत शब्द से निकला है “मुक्ति और ईश्वर” । यानी यहाँ आप सांसारिक आपाधापी से दूर मुक्त हो स्वयं को इश्वर के करीब पाते हैं.

मुक्तेश्वर देवदार, बांज, काफल, मेहल आदि के सुंदर और घने आरक्षित वनों से घिरा है। यहाँ IVRI इंडियन वेतेर्निटी रिसर्च इंस्टिट्यूट भी है, जहाँ जानवरों पैर रिसर्च (खोज) की जाती है ये इंस्टिट्यूट 1893 में अंग्रेजों द्वारा यहाँ बनवाया गया था यहाँ एक म्यूजियम और लाइब्रेरी भी है जहाँ जानवरों पर रिसर्च से पुराने डॉक्यूमेंट और किताबें संभाली गयी हैं

मुक्तेश्वर धाम एक प्राचीन शिवमंदिर है, जिसके नाम पर ही इस इलाके को मुक्तेश्वर कहा जाता है। यहाँ से हिमालय और हरियाली भरी घाटियों का दृश्य बहुत खूबसूरत दिखाई पड़ता है।

मुक्तेश्वर बाजार से जो हालाकिं ज्यादा बड़ी नहीं है, से महज २ किलोमीटर की दुरी पर मुक्तेश्वर महादेव का मंदिर स्थित है, जो सडक से लगभग 400 – ५०० मीटर के दुरी जिसमें आपको कुछ सीडियां भी चढ़नी होती है, के बाद ये मंदिर स्थित है।

Ma Barahi Devi Mandir, Devidhura

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देखे देवी धुरा मंदिर उत्तराखंड में कहाँ है, और जाने यहाँ प्रतिवर्ष रक्षा बंधन को होने वाले पत्थर युद्ध के पीछे की वजह। इसे माँ बारही देवी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ प्रति वर्ष बहनें अपने भाइयों को पत्थरों से सुसज्जित कर युद्ध में भाग लेने के लिए भेजती हैं।
Devi Dhura jaha maa barahi devi ka mandir hai aur jo famous hai prativarsh raksha bandhan ko aayojit hone waale pathhar maar maile ke liye. Janiye isi ka eetihas, aur any jaankariyan.
#DeviDhura #MaaBarahiTemple #PattharMarMela

Haidakhan Ashram

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The Haidakhan Babaji ashram was established by Shri Shri 1008 Haidakhan wale baba in the year between 1970 and 1984. There are more than 100 rooms available here for the accomodation of the devotees who visit the ashram, and the members of haidakhan samaj live here and provide room to the devotees of babaji at very nominal charges and more than 100 rooms are going to be constructed soon.

The river gaumati Ganga flows in between the two sites of the Ashram. There is huge hall in the ashram , Devotees of Babaji gather here for meditation.This is the cculpture of Shid brahmchari maharaj.

The ashram cover a quite huge area and divided into 3 levels the main ashram, fakirabad, and the gufa side. Babaji built nine temples (nav durga) on the bank of the River Gautami Ganga.

Every year on 25th of December a huge fair takes place in Haidakhan ashram devotees from 50 55 countries be the part of the fair There are various spiritual centers and ashrams dedicated to Haidakhan wale Babaji have been established in all over the World. Haidakhan Ashram is located in India as well as beyond India(Internationally). In India, Haidakhan Vishwa Mahadham (Village Haidakhan, District Nainital), Ananda Puri Ashram, Chilianaula (Ranikhet), India, Manda Ashram (it’s about 23kms away from Vapi), Haidakhandi Samaj (Yaday Bhawan, Malla Gorakhpur Haldwani).

Internationally the Ashrams are located in Germany(Bhole Baba Ashram, Rieferath , GERMANY), USA( Haidakhandi Universal Ashram ), Italy (Fondazione Bhole Baba in Cisternino (BR), Switzerland ( Brien), the Netherlands (Loenen Ashram Sada Shiva Dham).





The Centres of Haidakhan are located in various places of India including Assam, Ahmedabad, Dariapur, Kayavaroham, Kota, Lobhan, Manda, Mandiri, Mathura, Murar, New Delhi, Almora, Vrindavan.

During the time of Babaji, Haidakhan Samaj got developed, the main purpose behind developing the Samaj was to spread the message of Babaji in the world. There are many festivals celebrated in the ashram by the members of the Ashram and the members of Haidakhan Samaj. Haidakhan Samaj also works for the welfare of the society. There are two main ashrams of Haidakhan Babaji manages by Haidakhan Samaj these are Haidakhan Vishwa Mahadham at Haidakhan village and Anandpuri Ashram at chiliyanaula, Ranikhet. The Haidakhan Samaj serves the poor and the sick people by providing health and medical facilities in both the ashrams .

There are also 5 guest houses and the Bhakti Bhandar Shop, the main temple, the Italian temple and Sri Babaji‘s Kutir (room) and the Sri Baba Research Hospital where both Ashram visitors and local people are treated.
Babaji left his body on 14 February 1984. He gave the message that we can win the heart of the people by truth, simplicity, and love.

You can get details of altitude or contact details of Ashram on given link (http://www.nainitalonline.com/about-haidakhan/) as shown on screen or you can get the link on description below.

Also we are providing the link of our pervious video in which you will get the route of Haidakhan ashram from haldwani and the brief history of haidakhan ashram





India :
Haidakhan : Haidakhan Vishwa Mahadham (Village Haidakhan, District Nainital) WEBSITE : www.haidakhandisamaj.org
Ranikhet : Ananda Puri Ashram, Chilianaula (Ranikhet), India www.haidakhandisamaj.org, http://www.anandpuri.com/Welcome.html
Manda Ashram (about 23 km from vaapi )
Malla Gorakhpur Haldwani: HAIDAKHANDI SAMAJ: Website : Haidakhandisamaj.org
International
U.S.A : HAIDAKHANDI UNIVERSAL ASHRAM: WEBSITE : www.babajiashram.org
THE NETHERLANDS : LOENEN ASHRAM SADA SHIVA DHAM : WEBSITE : www.babaji.nl
SWITZERLAND : BRIENZ : WEBSITE : www.babajiashram.de
ITALY: Fondazione Bhole Baba in Cisternino (BR): WEBSITE : www.bholebaba.org, www.samajitaliano.org
GERMANY: Bhole Baba Ashram, Rieferath (GERMANY) : WEBSITE : www.babajiashram.de