Chitai Golu Dev Temple Almora

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उत्तराखंड के अल्मोड़ा जीले में स्थित धार्मिक आस्था के केंद्र चितई मंदिर का निर्माण १७ सताब्दी में चंद शासन काल में हुआ था, मंदिर के अंदर घोड़े पे सवार, धनुष बाण लिए गोलू देवता की मूर्ति स्थापित है, गोलू देवता न्याय देवता के रूप में जाने जाते हैं, यहाँ जो श्रद्धालु सच्चे मन से पूर्ण श्रद्धा से और पवित्र ह्रदय से कामना करते हैं तो वो अवस्य पूर्ण होती है |

चारो और चीड के वृक्षों से घिरा हुआ, खुले आसमान के नीचे मंदिर का वातावरण मन को अत्यंत शान्ति प्रदान करता है… यहाँ चारो और आपको श्रधालुवों द्वारा भेट की गयी घंटियों, चिट्ठियों, अर्जियों और चुनरियों को देख, आपको इस मंदिर के प्रति जनमानस में गहरी आस्था का पता लग जाता हैं |

Haldwani to Garjia Temple

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हल्द्वानी से कालाढूंगी, कॉर्बेट म्यूजियम, कॉर्बेट वाटर फॉल, बैलपडाव, रामनगर होते हुए गर्जिया मंदिर के खुबसूरत सफ़र के बारे में विस्तृत जानकारी देता विडियो।

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Mukteshwar, Nainital

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मुक्तेश्वर एक छोटा सा साफ़ सुथरा और शांत पहाड़ी गाँव है, जहाँ आपको असीम शांति, वन क्षेत्र, किसी भी अन्य हिमालयी छेत्र की तरह ही सीधे व सरल ग्रामीण, और शुद्ध हवा और असीम मानसिक शांति मिलती है, यहाँ से दिखने वाले हिमालय श्रंखला के बेजोड़ दृश्य, अपने शांत माहौल और शीत मौसम व स्वच्छ वातावरण, बाज और देवदार के घने जंगल और यहाँ चौली की जाली नामक स्थान से दिखने वाले असीम व अद्भुत घाटी के दृश्य और मुक्तेश्वर महादेव मंदिर से श्रद्धालुओं को मिलती असीम उर्जा के लिए ट्रैकिंग, रीडिंग, व्रित्तिंग, बर्ड वाचिंग, आदि, यहाँ पर्यटकों द्वारा की जाने वाली कुछ एक्टिविटीज है.

मुक्तेश्वर पहुचने के मार्ग में दिखने वाले दृश्य भी काफी खुबसूरत और लुभावने हैं. सफ़र करते हुए दिखने वाले आकर्षक दृश्यों की सुन्दरता आपका दिल जीत लेती है. मुक्तेश्वर नाम दो संस्कृत शब्द से निकला है “मुक्ति और ईश्वर” । यानी यहाँ आप सांसारिक आपाधापी से दूर मुक्त हो स्वयं को इश्वर के करीब पाते हैं.

मुक्तेश्वर देवदार, बांज, काफल, मेहल आदि के सुंदर और घने आरक्षित वनों से घिरा है। यहाँ IVRI इंडियन वेतेर्निटी रिसर्च इंस्टिट्यूट भी है, जहाँ जानवरों पैर रिसर्च (खोज) की जाती है ये इंस्टिट्यूट 1893 में अंग्रेजों द्वारा यहाँ बनवाया गया था यहाँ एक म्यूजियम और लाइब्रेरी भी है जहाँ जानवरों पर रिसर्च से पुराने डॉक्यूमेंट और किताबें संभाली गयी हैं

मुक्तेश्वर धाम एक प्राचीन शिवमंदिर है, जिसके नाम पर ही इस इलाके को मुक्तेश्वर कहा जाता है। यहाँ से हिमालय और हरियाली भरी घाटियों का दृश्य बहुत खूबसूरत दिखाई पड़ता है।

मुक्तेश्वर बाजार से जो हालाकिं ज्यादा बड़ी नहीं है, से महज २ किलोमीटर की दुरी पर मुक्तेश्वर महादेव का मंदिर स्थित है, जो सडक से लगभग 400 – ५०० मीटर के दुरी जिसमें आपको कुछ सीडियां भी चढ़नी होती है, के बाद ये मंदिर स्थित है।

Almora City Tour

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व्यस्त दिनचर्या और थकान भरी जीवनशैली के आप used to (अभ्यस्त) हो गये हों, पर कभी आपको लगे, कि आपने, अपने और अपनों के साथ, अच्छा वक़्त बिताना है, तो almora जो की समुद्र तल से लगभग 6,106 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, आपके लिए एक उपयुक्त स्थान हो सकता है। ये नगर जहाँ एक और ऐतिहासिक महत्व का है, वही सांस्कृतिक, अध्यात्मिक स्थल होने के साथ साथ एक जाना माना पर्यटक स्थल भी है।
आईये रूबरू होते है इस शहर से, बने रहिये इस सफ़र में मेरे साथ, hello फ्रेंड्स मै स्नेहा, आपका स्वागत है अल्मोड़ा नगर के इस टूर में…।
इस जगह से राईट हैण्ड साइड को डोली डाना गोल्जू मंदिर है जो डेढ़ से दो किलोमीटर की soft​ ट्रैकिंग के बाद आता है। ​




अल्मोड़ा, 16 वीं शताब्दी में कुमाऊं साम्राज्य पर शासन करने वाले चंदवंशीय राजाओं की राजधानी थी। एक कथा के अनुसार यह कहा जाता है कि कौशिका देवी ने शुंभ और निशुंभ नामक दानवों को इसी क्षेत्र में मारा था।

head पोस्ट ऑफिस, रैमजे इंटर कॉलेज, एडम्स गर्ल्स inter कॉलेज, GIC आदि कुछ ब्रिटिश कालीन इमारतों में से एक हैं
चितई, नंदा देवी मंदिर, रघुनाथ मंदिर, हनुमान मंदिर, मुरली मनोहर मंदिर, भैरब मंदिर, पाताल देवी, कसारदेवी, उल्का देवी, बानरी देवी, बेतालेश्वर, स्याही देवी , जागेश्वर, डोलीडाना आस्था के केन्द्र इस शहर की धरोहर हैं




​​अल्मोड़ा में, आवागमन के लिए, kmou, roadways की बसें aur taxi asani se uplabdh ho jati hai हैं । जनपद का सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम, यहाँ से लगभग 90० किमी० की दूरी पर, एवं निकटतम एअरपोर्ट पंतनगर लगभग 125 किमी० की दूरी पर स्थित है. Almora se kuch prmukh sehro ki duri ap screen mai dekh skte hai

अल्मोड़ा कुमाऊ का एक प्रमुख शहर है जहाँ से कुमाओं और गडवाल के प्रमुख जगहों के लिए मार्ग जाता है जैसे नैनीताल, हल्द्वानी, पिथोरागढ़, बागेश्वर, द्वाराहाट, रानीखेत, कौसानी, जागेश्वर, कर्णप्रयाग, चमोली, आदि को, स्क्रीन में आपको इन स्थानों की अल्मोड़ा से दुरी का चार्ट दिख रहा है

इतिहासकारों की मान्यता है कि, सन् 1563 ई. में चंदवंश के राजा बालो कल्याणचंद ने आलमनगर के नाम से इस नगर को बसाया था। चंदवंश की पहले राजधानी चम्पावत थी। कल्याणचंद ने इस स्थान के महत्व को भली-भाँति समझा। तभी उन्होंने चम्पावत से बदलकर इस आलमनगर (अल्मोड़ा) को अपनी राजधानी बनाया।

सन् 1563 से लेकर 1790 ई. तक अल्मोड़ा का धार्मिक भौगोलिक और ऐतिहासिक महत्व कई दिशाओं में अग्रणी रहा। इसी बीच कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं राजनैतिक घटनाएँ भी घटीं। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक दृष्टियों से भी अल्मोड़ा समस्त कुमाऊँ अंचल का प्रतिनिधित्व करता रहा।
सन् १७९० ई. से गोरखाओं का आक्रमण कुमाऊँ अंचल में होने लगा था। गोरखाओं ने कुमाऊँ तथा गढ़वाल पर आक्रमण ही नहीं किया बल्कि अपना राज्य भी स्थापित किया। सन् 1896 ई. में अंग्रेजो की मदद से गोरखा पराजित हुए और इस क्षेत्र में अंग्रेजों का राज्य स्थापित हो गया।
स्वतंत्रता की लड़ाई में भी अल्मोड़ा के विशेष योगदान रहा है। शिक्षा, कला एवं संस्कृति के उत्थान में अल्मोड़ा का विशेष हाथ रहा है।
कुमाऊँनी संस्कृति की असली छाप अल्मोड़ा में ही मिलती है – अत: कुमाऊँ के सभी नगरों में अल्मोड़ा ही सभी दृष्टियों से बड़ा है।




जनपद की मुख्य नदियों में रामगंगा, कोसी तथा सुयाल नदियां हैं । जनपद के प्रमुख कृषि उत्पाद चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा, चाय, सेब, आड़ू, खुबानी, पूलम हैं। तथा मयूर, ग्रे बटेर, काला तीतर, चिड़िया, चकोर, मोनाल तीतर, बाघ, चीतल, तेंदुआ, लोमड़ी, गोराल, हिम तेंदुआ, काले भालू जनपद में पायी जाने वाली जीव जन्तुओं की मुख्य प्रजातियां हैं। जनपद का मौसम सर्दियों में ठण्डा तथा गर्मियों में सुहावना रहता है। ऊंचाई वाले स्थानों में सर्दियों में जमकर हिमपात होता है।। जुलाई से सितंबर तक जनपद में भारी वर्षा होती है ।
अब ये बायीं और दींन दयाल उपाध्याय पार्क…