Shri Kedarnath Travel Guide

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#Kedarnath, Shri Kedarnath is eleventh of twelve jyotirlingas of Lord Shiva Located in Garhwal Himalayas in Uttarakhand, India.

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भगवान श्री केदारनाथ जी  का दर्शन हर तीर्थयात्री के लिए अत्यंत आनंद का पल होता हैं, प्रति वर्ष  मंदिर के कपाट खुलने पर लाखों, की संख्या में श्रदालु भगवान शिव के केदार स्वरुप दर्शन करने यहाँ आते हैं,

इस विडियो में आप जानेगे – भगवान श्री केदारनाथ का मंदिर कहा हैं? केदारनाथ का इतिहास और मंदिर से जुडी जानकारियां, यहाँ कैसे पहुचे? केदारनाथ route की जानकारी, कहाँ रुक सकते हैं, मौसम, और दूसरी जरुरी जानकारिया

केदारनाथ महादेव के विषय में कई कथाएं हैं.

स्कन्द पुराण में लिखा है कि एक बार केदार क्षेत्र के विषय में जब पार्वती जी ने शिव से पूछा तब भगवान शिव ने उन्हें बताया कि केदार क्षेत्र उन्हें अत्यंत प्रिय है. वे यहां सदा अपने गणों के साथ निवास करते हैं. इस क्षेत्र में वे तब से रहते हैं जब उन्होंने सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्मा का रूप धारण किया था. यह अत्यंत पवित्र क्षेत्र है. इस स्थान पर मृत्यु होने पर पशु-पक्षियों को भी मोक्ष प्राप्त हो जाता हैं. .

केदारनाथ ज्योर्तिलिंग की कथा

केदारनाथ ज्योर्तिलिंग की ek katha शिव पुराण में वर्णित है कि नर और नारयण नाम के दो भाईयों ने भगवान शिव की पार्थिव मूर्ति बनाकर उनकी उपासना और ध्यान किया  .

इन दोनों भाईयों की भक्तिपूर्ण तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव इनके समक्ष प्रकट हुए. भगवान शिव ने इनसे वरदान मांगने के लिए कहा तो जन कल्याण कि भावना से इन्होंने शिव से वरदान मांगा कि वह इस क्षेत्र में जनकल्याण हेतु सदा virajman रहें. इनकी प्रार्थना पर भगवान shiv ज्योर्तिलिंग के रूप में केदार क्षेत्र में प्रकट हुए.




केदारनाथ से जुड़ी पाण्डवों की कथा

शिव पुराण में लिखा है कि महाभारत के युद्ध के पश्चात पाण्डवों को इस बात से दुखी थे कि उनके हाथों उनके अपने भाई-बंधुओं, की हत्या हुई है. वे इस पाप से मुक्ति पाना चाहते थे. इसका समाधान हेतु वेद व्यास जी ने उन्हें बताया कि – उन्होंने कहा कि बंधुओं की हत्या का पाप तभी मिट सकता है जब शिव इस पाप से मुक्ति प्रदान करेंगे.

शिव – पाण्डवों से अप्रसन्न थे अत: पाण्डव जब विश्वानाथ के दर्शन के लिए काशी पहुंचे तब वे वहां शंकर प्रत्यक्ष प्रकट नहीं हुए. शिव को ढ़ूढते हुए तब पांचों पाण्डव केदारनाथ पहुंच गये.

पाण्डवों को आया देखकर शिव ने भैंस का रूप धारण कर लिया और भैस के झुण्ड में शामिल हो गये .. भीम ने उन्हें पहचान लिया तो शिव वहां भूमि में विलीन होने लगे, तभी महाबली भीम ने उनका पिछला भाग पकड़ लिया

भगवान शिव पाण्डवों की भक्ति एवं दृढ़ निश्चय को देखकर साक्षात् दर्शन दिए, तथा उन्हें गोत्र हत्र्या, गुरु हत्या पाप के फलस्वरूप प्रायश्चित के लिए भीम द्वारा पकडे गए पृष्ठ भाग की पूजा अर्चना का आदेश दे अंतर्धान हो गए,

भीम द्वारा पकडे गए पृष्ठ भाग ने शिला का रूप धारण किया, जो पांड्वो द्वारा पूजित हुआ, तब से आज तक पूजित होता हैं, शिव के महिष रूप का अग्र भाग नेपाल में जाकर प्रकट हुआ, जो पशुपति नाथ के नाम से विख्यात हैं, महिष के चार भाग क्रमश तुंगनाथ में बाहू/ भुजाएं., रुद्रनाथ में मुख, मद महेश्वर में नाभि, कल्पेश्वर में जटा , केदारनाथ सहित ये स्थान पञ्च केदार नाम से विख्यात हुए.

पांड्व इसी जगह पृष्ठ भाग के शिव रूप की पूजा कर गोत्र और गुरुहत्या के पाप से मुक्त हुए. और इसी जगह उन्होंने भगवान शिव का भव्य मंदिर बनाया.

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By |2018-08-11T12:47:08+00:00July 6th, 2018|Categories: Home, Places|Tags: , |2 Comments

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2 Comments

  1. MK August 10, 2018 at 5:05 pm

    Nice article

  2. admin August 10, 2018 at 5:08 pm

    Thanks.

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